‘फाइव स्टार’ मयखाना : जीवन होटल में अवैध शराब की खुली महफ़िल

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद। बस स्टैंड का जीवन होटल— जहां कानून अपने दोनों हाथों से आँख मूंदे हुए है। अवैध शराब का मयखाना बेखौफ चल रहा है। शिकायतें बालोद एसपी के टेबल पर पड़ी धूल फांक रहीं, हुड़ुकचुल्लू टाइप पत्रकारों ने परदा गिरा रखा है, वही जीवन यादव होटल में आराम से “अवैध शराब” की महफ़िल सज रही है। अब नए थानेदार से उम्मीद, या फिर पुराना धारावाहिक निरंतर चलता रहेगा?
बालोद जिले के दल्ली राजहरा शहर में पुलिस और आबकारी विभाग की नाक के नीचे “अवैध बार” चल रहा है। वही एसपी बालोद को लिखित शिकायत के बावजूद भी कार्यवाही न होना, समझ से परे है। आपको बता दें कि राजहरा बस स्टैण्ड में जीवन यादव होटल में अवैध शराब बेची व पिलाई जाती है। यहां हर ब्रांड की चिल्ड (ठंडी बर्फीली) बियर व देशी विदेशी शराब के शौकीनों को आरामदायक और बिना किसी खौफ के खुलेआम शराब पीने की सुविधा उपलब्ध है। यहां ऐसी बेहतरीन व्यवस्था है कि शराबियों को पुलिस का खौफ व डर बिल्कुल ही नहीं सताता। आपको बता दें कि इस अवैध बार संचालक ने हर ब्रांड की देशी विदेशी शराब व बियर के साथ खाने पीने का भी फाइव स्टार इंतजाम कर रखा है।

मजे की बात तो यह है कि जिले और शहर के “हुड़ुकचुल्लू टाइप के पत्रकार” इस “अ-वैध मयखाने” के खिलाफ कोई समाचार ही नहीं छपवाते। सबसे शर्मनाक पहलू यह है कि छत्तीसगढ़ पुलिस आजतक अवैध शराब कारोबारी जीवन यादव के गिरेबान पर हाथ नहीं डाल सकी। शहर में नए थानेदार के आगमन के बावजूद भी यहां अवैध शराब और शराबियों की रोजाना महफिल सजती है। इनसे जुड़े गुप्त सूत्र बतलाते है कि जीवन यादव जी का भाजपा और कांग्रेस के बड़े नेताओं से बड़े गहरे संबंध है। जिसके चलते छत्तीसगढ़ पुलिस के रडार का सिग्नल इनके अवैध मयखाने में काम ही नहीं करता।
हद तो तब हो गई जब शहर के लोगों ने इस अवैध शराब खाने की कई बार लिखित शिकायत बालोद पुलिस अधीक्षक को भी कर डाली। बावजूद इसके न तो जीवन यादव की हिम्मत टूटी और न ही इनसे याराना रखने वाले कथित नेताओं और पुलिस वालो को कोई फर्क पड़ा। आपको बता दें कि अभी फिलहाल शहर में कई जगह अवैध शराब बिक्री पर नए थानेदार ने कार्यवाही कर रखी है लेकिन उन्होंने मात्र बस स्टैण्ड स्थित जीवन होटल को क्यों छूट दे रखी है समझ से परे है। शहर में चर्चा है कि शहर में कई जगह अवैध शराब कारोबार पर राजहरा पुलिस ने नकेल कस रखी है लेकिन नया बस स्टैण्ड स्थित इस “बदनाम मयखाने” में देशी विदेशी सहित हर ब्रांड की शराब और जबरदस्त चिल्ड बियर 24 घंटे उपलब्ध है।

पिछले आए गए कई थानेदारों ने इनकी कलाई पर आज तक हथकड़ी नहीं बांध पाए। अब देखना यह है कि नए थानेदार कौन सा नया कीर्तिमान रच पाते है? नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र में अपनी पुलिस सेवा के कई साल बिताने तथा दुर्दांत नक्सली कमांडरों के छक्के छुड़ाने वाले छत्तीसगढ़ पुलिस के कद्दावर थानेदार अविनाश सिंह, दल्ली राजहरा में क्या कुछ कर गुजरते है? खैर जो भी हो शहर के लोगों में इनके प्रति बड़ी आशा और विश्वास है कि इनके कार्यकाल में शहर में अवैध शराब, सट्टा कारोबार, गांजा बिक्री, जुआं फड़ व नशीली गोलियों पर रोक लगेगी।
बस स्टैंड स्थित जीवन होटल अब शहर के लिए सिरदर्द बन चुका है। यहां खुलेआम चलने वाला अवैध मयखाना पुलिस और आबकारी विभाग की नाक के नीचे “फाइव-स्टार” आराम दे रहा है, जबकि स्थानीय नागरिक इसकी शिकायतें बार-बार एसपी कार्यालय तक भेज चुके हैं। बावजूद इसके कार्यवाही न होने से लोगों में नाराजगी है।
महिलाएं घर की आर्थिक संकट और पारिवारिक हिंसा से जूझ रही हैं। कई घरों में पुरुषों की बढ़ती शराबखोरी ने घरेलू बजट खंडित कर दिया है; राशन, बच्चों की पढ़ाई और स्वस्थ्य खर्च कट रहे हैं। कुछ महिलाएं बताती हैं कि पति की बेरोक शराबखोरी के बाद घरेलू कलह, मानसिक तनाव और शारीरिक हिंसा के मामले बढ़े हैं। बुजुर्गों की चिंता बढ़ी है— वे पीढ़ियों की परवरिश और सामाजिक मर्यादा खोते देख दिल दबा कर बैठते हैं।
बच्चों और जवानों पर प्रभाव विशेष रूप से चिंताजनक है। शराब के खुले विक्रय ने नशे की पहुंच कम उम्र तक कर दी है। कई अभिभावकों ने शिकायत की कि लड़के — कुछ तो स्कूल ही छोड़ चुके वही रोज़ाना शाम को जीवन होटल में शराब की महफिल में मिलते हैं। किशोरों में असामाजिक प्रवृत्तियों, पढ़ाई में गिरावट और भविष्य के प्रति निराशा तेज हुई है। डॉक्टरों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, युवा वर्ग में शराब से जुड़े व्यवहारिक और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं, जिससे समुदाय की दीर्घकालिक सुरक्षा खतरे में है। ट्रैफिक और सार्वजनिक सुरक्षा भी दांव पर लगी है। नशे में वाहन चलाने के कारण हाल के महीनों में कई दर्दनाक हादसे हुए हैं।
शहर में यह सवाल उठ रहे हैं कि जब शिकायतें एसपी तक पहुँच चुकी हैं तो कार्यवाही क्यों नहीं की जा रही? स्थानीय सूत्रों के अनुसार जीवन यादव के राजनीतिक गठजोड़ और संरक्षण की चर्चा है, जबकि स्थानीय पत्रकार भी इस मुद्दे पर मौन साधे बैठे हैं। शहरवासियों की उम्मीद अब नए थानेदार अविनाश सिंह पर टिकी है कि वे इस अवैध कारोबार, सट्टा और नशीले पदार्थों की बिक्री पर कड़ी कार्यवाही करके शहर की सार्वजनिक सुरक्षा और पारिवारिक शांति को बहाल करेंगे।




