महा-कवरेज : ‘औकात में रहो, तुम्हारा दिया खाएंगे तो धर्म भ्रष्ट हो जाएगा’ – दबंगों का फरमान, न्याय न मिलने पर कोटवार ने दी सपरिवार आत्मदाह की चेतावनी…

महासमुंद: छत्तीसगढ़ के पिथौरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पाटनदादर में ‘खाप पंचायत’ जैसी दबंगई और घोर जातिगत भेदभाव का एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है। गाँव के एक कोटवार को केवल इसलिए गंभीर सामाजिक बहिष्कार का दंश झेलना पड़ रहा है क्योंकि उसने अपनी स्वेच्छा से एक धार्मिक आयोजन में चंदा देने की पेशकश की थी। पुलिस प्रशासन की लगातार निष्क्रियता से हताश होकर अब पीड़ित ने सपरिवार मुख्यमंत्री निवास (रायपुर) के समक्ष आत्मदाह करने की सीधी चेतावनी दे दी है।

क्या है पूरा मामला? – पाटनदादर के कोटवार भागीरथी चौहान (गांडा जाति) ने पुलिस अधीक्षक, महासमुंद को दिनांक 06/06/2026 को दिए गए अपने शिकायती पत्र में गाँव के दबंगों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं:
- जुलाई 2024 का घटनाक्रम : गाँव में ‘हरी नाम कीर्तन यज्ञ’ का आयोजन हो रहा था, जिसमें सभी ग्रामवासी अपनी क्षमता अनुसार सहयोग के रूप में चंदा दे रहे थे।
- चंदा लेने से स्पष्ट इनकार : भागीरथी ने भी धार्मिक आयोजन में सहयोग स्वरूप 1000 रुपये नकद और 5 किलो चावल चंदे के रूप में देने का प्रस्ताव रखा था।
- जातिसूचक गालियां और सरेआम अपमान : गाँव के नरेश साहू, दुर्योधन साहू, हराधन साहू, कृष्ण कुमार नायक, दुष्टि, रंजीत साहू, पुस्तम नायक और प्रमोद साहू ने एकराय होकर यह कहते हुए चंदा लेने से सख्त मना कर दिया कि, “तुम गांडा जाति के नीच व्यक्ति हो, तुम्हारे पैसे व चावल का उपयोग हम करेंगे तो हमारा धर्म भ्रष्ट हो जाएगा”।
- औकात की सीधी धमकी : आरोपियों ने पीड़ित को सार्वजनिक रूप से अपमानित करते हुए कहा कि, “तुम छोटे से कोटवार हो, गांडा होने से तुम्हें कोटवार बनाया गया है, अपनी औकात में रहो”।
‘खाप पंचायत’ का तुगलकी फरमान: हुक्का-पानी बंद और मनमाना जुर्माना – मामला सिर्फ मौखिक अपमान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि गाँव में रात को बकायदा एक मीटिंग बुलाकर पीड़ित और उसके पूरे परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया।
- समाज का विरोध करने पर सामूहिक सजा : जब भागीरथी के समाज वालों ने इस घोर दुर्व्यवहार का विरोध किया, तो दबंगों ने उनके समाज के सभी लोगों को ही गाँव से बहिष्कृत कर दिया।
- भारी भरकम जुर्माना वसूली : बाद में कृष्ण कुमार (पिता मनबोध चौहान) नामक व्यक्ति से 25,000 रुपये का भारी भरकम अर्थदंड वसूल कर ही उसे वापस गाँव में शामिल किया गया।
- मजदूरों तक पर पाबंदी और आर्थिक दंड : जो भी व्यक्ति पीड़ित के घर आता-जाता है, बातचीत करता है या मजदूरी करता है, उसे भी गाँव वाले दंडित करते हैं। हद तो तब हो गई जब पीड़ित के मकान निर्माण में काम करने गए एक गरीब मजदूर देवकुमार पर भी दबंगों ने 1100 रुपये का जुर्माना ठोक दिया।
थाना सांकरा पुलिस की लचर कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल – पीड़ित भागीरथी चौहान का स्पष्ट आरोप है कि उसने इस पूरे प्रकरण की कई बार लिखित शिकायत स्थानीय थाना सांकरा में की है।
- पुलिस की निरंतर निष्क्रियता : महीनों बीत जाने के बाद भी अब तक दबंग आरोपियों के खिलाफ कोई भी प्रभावी कार्रवाई या प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज नहीं की गई है।
- दबंगों के हौसले बेखौफ : पुलिसिया कार्रवाई न होने के कारण आरोपियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि हाल ही में दिनांक 05/06/2026 को पंचायत भवन के सामने उन्होंने कोटवार को फिर से खुलेआम धमकी दी कि जब तक उसे कोटवार पद से निकाल नहीं देंगे, वे चैन से नहीं बैठेंगे।
मुख्यमंत्री निवास के सामने आत्मदाह का अंतिम अल्टीमेटम – स्थानीय थाने से लेकर पुलिस महानिरीक्षक (IG), पुलिस अधीक्षक (SP) और राज्य अनुसूचित जाति आयोग तक न्याय की गुहार लगाने के बाद भी खाली हाथ रहने पर पीड़ित कोटवार अब पूरी तरह टूट चुका है। दिनांक 06/06/2026 को सौंपे गए अपने पत्र में भागीरथी चौहान ने प्रशासन को साफ शब्दों में अल्टीमेटम दे दिया है कि यदि उपरोक्त दबंग व्यक्तियों के विरुद्ध प्रथम रिपोर्ट दर्ज कर तत्काल कार्रवाई नहीं की गई, तो वह अपनी पत्नी और बच्चों सहित रायपुर स्थित मुख्यमंत्री आवास के समक्ष आत्मदाह करने के लिए विवश होगा।
संविधान में छुआछूत और जातिगत भेदभाव को जड़ से खत्म हुए दशकों बीत चुके हैं। लेकिन पिथौरा के ग्राम पाटनदादर की यह घटना स्पष्ट रूप से यह बयान कर रही है कि सिस्टम की लाचारी और दबंगों के खौफ की जमीनी हकीकत आज भी कितनी भयावह है। अब यह देखना लाजमी होगा कि पीड़ित की इस अंतिम चेतावनी के बाद भी क्या महासमुंद पुलिस प्रशासन हरकत में आता है, या किसी बड़ी अनहोनी के होने का इंतज़ार करता है?




