लैलूंगा में डिजिटल लूट का ‘अड्डा’ बना करवारजोर का CSC सेंटर : ₹60 की ‘अवैध वसूली’ से ग्रामीणों में भारी आक्रोश, प्रशासन बेखबर!…

लैलूंगा। सरकार का दावा है -डिजिटल सेवाएँ द्वार तक। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। ग्राम पंचायत करवारजोर में संचालित अटल डिजिटल सुविधा केंद्र (CSC ID: 241125110018) इन दिनों सरकारी सेवा के नाम पर ‘जेबकतरी’ का केंद्र बन गया है। यहाँ KYC के नाम पर प्रति व्यक्ति 60 रुपये की वसूली का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
रसीद नदारद, वसूली बरकरार : आखिर किसके संरक्षण में चल रहा खेल? – ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि केंद्र संचालक द्वारा पैसे तो लिए जा रहे हैं, लेकिन मांगने पर कोई पक्की रसीद नहीं दी जाती। बिना रसीद के लिया जाने वाला यह पैसा न तो सरकारी कोष में जा रहा है और न ही किसी नियम के तहत वैध है।
बड़ा सवाल : क्या यह “डिजिटल डाका” केंद्र संचालक की अपनी मनमर्जी है, या फिर इसमें तंत्र की मौन सहमति शामिल है?
गरीबों की मजबूरी, संचालक की ‘चांदी’ – सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आज KYC अनिवार्य है। इसी अनिवार्यता को करवारजोर का यह केंद्र संचालक अपनी कमाई का जरिया बना चुका है।
- अनिवार्य सेवा : KYC करना ग्रामीणों की मजबूरी है।
- अवैध शुल्क : प्रति व्यक्ति 60 रुपये की मांग।
- शोषण : गरीब तबके के लोगों से उनकी मेहनत की गाढ़ी कमाई डिजिटल सेवा के नाम पर ऐंठी जा रही है।
प्रशासन की चुप्पी : लापरवाही या मिलीभगत? – इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली भूमिका स्थानीय प्रशासन की है। शिकायतों के बावजूद अब तक कोई विभागीय जांच या दंडात्मक कार्रवाई नहीं होना कई संदेह पैदा करता है।
- क्या प्रशासन को इस खुली लूट की भनक नहीं है?
- क्या CSC केंद्रों के लिए तय शुल्कों की मॉनिटरिंग बंद कर दी गई है?
- आखिर क्यों ग्रामीणों को ठगने वाले संचालक का लाइसेंस अब तक रद्द नहीं हुआ?
जनता की हुंकार : अब और बर्दाश्त नहीं! – करवारजोर के ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उनकी मांगें स्पष्ट हैं :
- तत्काल जांच : CSC केंद्र के लेन-देन और आईडी की उच्च स्तरीय जांच हो।
- कड़ी कार्रवाई : अवैध वसूली करने वाले संचालक पर FIR दर्ज हो और लाइसेंस निरस्त किया जाए।
- पारदर्शिता : हर केंद्र पर सरकारी शुल्कों की रेट लिस्ट अनिवार्य रूप से चस्पा की जाए।
सवाल तंत्र से है – क्या “डिजिटल इंडिया” का उद्देश्य गांवों में लूट का नया मॉडल तैयार करना था? यदि नहीं, तो प्रशासन कब अपनी कुंभकर्णी नींद से जागेगा? करवारजोर की जनता अब जवाब मांग रही है, आश्वासन नहीं।




