प्रज्ञा बुद्ध विहार में हर्षोल्लास : डॉ. आंबेडकर की 135वीं जयंती का भव्य आयोजन

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद। जिले में संविधान निर्माता और भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती 14 अप्रैल 2026 को प्रज्ञा बुद्ध विहार, अंबेडकर चौक के निकट उत्साहपूर्ण और सम्मानजनक माहौल में धूमधाम से मनाई गई। सुबह से शुरू हुए इस आयोजन ने डॉ. आंबेडकर के समतामूलक समाज, स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के आदर्शों को जीवंत कर दिया। बड़ी संख्या में उपस्थित जनसमुदाय ने उनके जीवन और संघर्ष को याद करते हुए संकल्प लिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह 7:30 बजे पंचशील ध्वजारोहण, पूजा-अर्चना तथा प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुआ। इसके बाद बालोद के अनुयायियों ने शहर के मुख्य मार्गों—जय स्तंभ चौक, घड़ी चौक, सदर रोड, रामदेव चौक और मधु चौक—से गुजरते हुए एक भव्य शोभायात्रा निकाली, जो अंततः प्रज्ञा बुद्ध विहार लौटकर समाप्त हुई। दोपहर 12 बजे मुख्य समारोह आयोजित किया गया, जहां अध्यक्ष प्यारे बोरकर ने स्वागत भाषण और प्रतिवेदन प्रस्तुत कर सबका स्वाग किया।

मुख्य अतिथि नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिभा चौधरी ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि बाबासाहेब समानता पर आधारित समाज के अटल समर्थक थे। उनके प्रयासों से ही स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों को मजबूती मिली। उन्होंने जोर देकर कहा कि संविधान ने महिलाओं को गरिमा प्रदान की, जो सभी के लिए गौरव का विषय है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वामनराव वानखेड़े ने जोर दिया कि डॉ. आंबेडकर को किसी जाति या वर्ग तक सीमित नहीं किया जा सकता— वे संपूर्ण मानवजाति के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने वंचितों को सशक्त बनाने और मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए उनके आजीवन संघर्ष की सराहना की।

विशेष अतिथि नगर पालिका उपाध्यक्ष कमलेश सोनी ने बताया कि बाबासाहेब ने समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति में आत्मविश्वास भरकर उसे मुख्यधारा से जोड़ा और राष्ट्र को नई दिशा दी। अन्य अतिथियों डॉ. चावड़ा, धनसिंह महिलांग तथा कृष्ण कुमार भारती ने भी बाबासाहेब के पथ पर चलने का संकल्प दिलाया। इस दौरान वार्ड पार्षद दीपक लोढ़ा ने प्रज्ञा बुद्ध विहार में नलकूप खुदाई की अनुमति प्रदान की, जिसके लिए समिति ने उनका धन्यवाद ज्ञापित किया।

सांस्कृतिक अनुष्ठानों ने आयोजन को रंगीन बना दिया। संगीता बोरकर, पूर्वी महिश्वर, आरोही लांजेवार और श्रुति पवार की भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। सेवानिवृत्ति की ओर बढ़ रहे कविता वानखेड़े और दिनेश सुखदेव को स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया। सभी अतिथियों को संविधान की प्रति उपहार में दी गई। समापन पर उपस्थित लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई। संचालन दिनेश सुखदेव और राजेंद्र कानेकर ने कुशलतापूर्वक किया, जबकि आभार टिकेंद्र रामटेके ने ज्ञापित किया।
इस अवसर पर प्रवीण महिलांगे, राजेश घोडेसवार, कमला पाटिल, रेखा निकोसे, दीपक मेश्राम, कविता वानखेड़े, धर्मेंद्र रामटेके, सुशील जामवंते, शैल महिश्वर, रितु महिश्वर, अमिला रामटेके, संगीता बोरकर, रूपा घोडेसवार, अनिल पवार, राकेश वैदै सहित असंख्य नागरिक मौजूद थे। भारी जनसमूह ने समारोह को ऐतिहासिक और अविस्मरणीय बना दिया।




