जशपुर

सन्ना वन परिक्षेत्र में बड़ी कार्रवाई : दातुनपानी के जंगलों में अवैध बोरवेल खनन पर वन विभाग का शिकंजा, दो मशीनें जब्त…

जशपुर। जिले के सन्ना वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दातुनपानी क्षेत्र में वन विभाग ने अवैध उत्खनन के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। विभाग ने वन भूमि पर बिना अनुमति बोरवेल खनन कर रहे दो भारी ट्रकों (बोरवेल मशीनों) को रंगे हाथों पकड़कर जब्त कर लिया है। यह कार्रवाई वन विभाग द्वारा स्थानीय ग्रामीणों की सूचना और विभागीय मुस्तैदी के बाद की गई है।

ग्रामीणों की सूचना पर वन अमले की त्वरित घेराबंदी – ​प्राप्त जानकारी के अनुसार, दातुनपानी के ग्रामीणों ने दूरभाष के माध्यम से वन विभाग को सूचित किया था कि जंगल के भीतर अवैध रूप से बोरवेल की खुदाई की जा रही है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए डीएफओ (DFO) ने तत्काल टीम गठित करने के निर्देश दिए।

​डीएफओ के आदेश पर तोरा और सन्ना के परिक्षेत्र सहायक समेत कामारिमा, चलनी, धनपुरी और बगीचा के बीएफओ (BFO) की संयुक्त टीम गठित की गई। वन विभाग की इस टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर कक्ष क्रमांक पी-303 की घेराबंदी की। टीम ने देखा कि वन भूमि की सीमाओं के भीतर अवैध रूप से मशीनों द्वारा खनन कार्य किया जा रहा था।

पंचनामा तैयार और अवैध गतिविधि पर रोक – ​वन विभाग के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर तत्काल खनन कार्य को रुकवाया। वहां उपस्थित पंचों और गवाहों के समक्ष स्थल निरीक्षण किया गया और विस्तृत पंचनामा तैयार किया गया। जांच अधिकारियों ने पाया कि इस अवैध गतिविधि से वन क्षेत्र की जैव विविधता और पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुँचने की आशंका थी।

पूछताछ में हुआ बड़ा खुलासा – ​मौके पर मौजूद लोगों से पूछताछ के दौरान इस अवैध खनन के पीछे के नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ:

  • मशीनों के चालक : सल्लू राम (ग्राम मनोहरपुर, जिला बालोद) और गोधन कोमा (ग्राम नर्राटोला, जिला बालोद) को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई।
  • स्थानीय संलिप्तता : ड्राइवरों ने स्वीकार किया कि वे ग्राम दातुनपानी निवासी राजेश यादव के कहने पर वन भूमि में बोर खनन कर रहे थे।
  • वाहन मालिक : जांच में पता चला कि जब्त की गई बोरवेल मशीनों का मालिक रमेश जायसवाल है, जो बलौदाबाजार जिले के बिलाईगढ़ का निवासी है।

कानूनी कार्रवाई और जब्ती – वन विभाग ने भारतीय वन अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। विभाग ने दोनों बोरवेल मशीनों (ट्रकों) को अपने कब्जे में लेकर राजसात की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि वन भूमि का किसी भी प्रकार का व्यावसायिक या निजी उपयोग बिना अनुमति के दंडनीय अपराध है और भविष्य में भी ऐसी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।

​इस कार्रवाई ने क्षेत्र के भू-माफियाओं और अवैध खनन करने वालों के बीच हड़कंप मचा दिया है। ग्रामीणों द्वारा दी गई समय पर सूचना ने इस प्राकृतिक संपदा को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसकी सराहना विभागीय अधिकारियों द्वारा भी की जा रही है।

Ambika Sao

सह-संपादक : छत्तीसगढ़

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!