पशु, पक्षियों के साथ करूणा के बीच बूचड़खाने की अवैधता पर मौन बालोद कलेक्टर
पशु-हितैषी आदेश वही अवैध बूचड़खाने पर चुप्पी

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद। जिला प्रशासन ने हाल ही में मूक पशु-पक्षियों के संरक्षण और संवर्धन के लिए जन – जागरूकता अभियान चलाते हुए व्यापारियों और आम लोगों से अपील की है कि दोपहिया वाहनों में मुर्गा-मुर्गियों को उल्टा न लटकाएँ, चारपहिया वाहनों में गाय-भैंस ठूंस-ठूंस कर न परिवहित करें और भूखे, प्यासे तथा बीमार पशुओं का परिवहन न करें। प्रशासन ने करुणा और संवेदना का भाव बनाए रखने का संदेश देते हुए पालन-पर अमल करने पर ज़ोर दिया।

इसी बीच जिले के डौंडी तहसील के ग्राम पंचायत कुसुमकसा से एक गंभीर शिकायत सामने आई है — एक मुस्लिम कसाई ने गांव के साप्ताहिक बाजार में स्थित शासकीय जमीन पर बिना अनुमति बूचड़खाना खोलकर अवैध कब्जा कर लिया है। इस बाबत स्थानीय लोगों और मीडिया रिपोर्टों में लगातार उठती आवाज़ों के बावजूद जिला प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई ठोस कार्यवाही दिखाई नहीं दे रही। शिकायतकर्ता बताते हैं कि मामले की प्रतिलिपि दुर्ग संभाग आयुक्त को लिखित रूप में दी जा चुकी है और इसकी नकल बालोद कलेक्टर कार्यालय में भी भेजी गई है, परन्तु फिर भी प्रशासन ने संज्ञान लेकर आवश्यक कदम नहीं उठाए। गांव में चर्चा है कि वाहिद अली नामक कसाई की इतनी ऊंची पहुंच है कि इसके अवैध बूचड़खाने की दीवार पर एक खरोंच भी नहीं लग पाई। जिसमें दुर्ग संभाग आयुक्त (कमिश्नर) सहित बालोद कलेक्टर भी चुप्पी साधे हुए है।

स्थानीय लोग इस असंगत स्थिति पर नाराज़ हैं — जहाँ एक ओर प्रशासन पशु-हितैषी आदेश जारी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर शासकीय जमीन पर चल रहे अवैध बूचड़खाने पर चुप्पी संदेह पैदा करती है। वे आशंका जताते हैं कि संभवतः कलेक्टर महोदया तक संबंधित रिपोर्टें नहीं पहुँचीं, अथवा मामला अनदेखा किया जा रहा है। ग्रामीणों ने उचित जांच और तत्काल कानूनी कार्रवाई की मांग की है ताकि शासकीय जमीन की रक्षा हो और पशु-कल्याण संबंधी दिशा-निर्देशों की निष्पक्षता बनी रहे।
वही पशुधन विभाग के उप संचालक ने नागरिकों और व्यापारियों से आग्रह किया है कि जीव-जन्तुओं के साथ अमानवीय व्यवहार न करें क्योंकि यह पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत दंडनीय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुर्गियों व अन्य पक्षियों को उल्टा लटकाना, पैर बाँधकर दोपहिया पर ले जाना या प्रताड़ित करना पहले अपराध पर आर्थिक जुर्माना और तीन साल के भीतर पुनरावृत्ति पर तीन महीने तक कारावास, जुर्माना या दोनों के दायरे में आता है।
उप संचालक ने बताया कि वाहन में निर्धारित क्षमता से अधिक पशु ठूंसना या बीमार, भूखे पशुओं का परिवहन करने पर वाहन मालिक व चालक के विरुद्ध मामला दर्ज करने के साथ वाहन जब्त करने का प्रावधान भी है। गंभीर मामलों में भारतीय दण्ड संहिता की प्रासंगिक धाराओं के तहत अपंग करने पर भारी जुर्माना व पाँच वर्ष तक का कारावास भी हो सकता है।
जिला प्रशासन ने व्यवसायिक हित में भी पशुओं के साथ क्रूरता न दिखाने की सख्त हिदायत दी है तथा सुझाव दिया है कि पशु परिवहन के समय उपयुक्त पिंजरों या हवादार वाहनों का प्रयोग करें और निर्धारित क्षमता का पालन करें। आम नागरिकों से अपील की गई है कि किसी भी स्थल पर पशु क्रूरता देखते ही नजदीकी पशु चिकित्सालय या पुलिस थाने को तुरंत सूचित करें और मूक पशुओं के प्रति संवेदनशील व जिम्मेदार रवैया अपनाएँ। वही जिले में ही शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर बूचड़खाना संचालित किया जाना जिला प्रशासन पर सवालिया निशान लगाता है।
अब देखना यह है कि कलेक्टर मैडम चुप्पी साधे रहती है अथवा कोई ढुलमुल आदेश जारी कर सांकेतिक कार्यवाही करवाती है?



