प्रशासन का कड़ा प्रहार : रामनवमी पर रुकवाया बाल विवाह, डोली उठने से पहले पहुंची टीम…

रायगढ़ | पवित्र पावन पर्व रामनवमी के दिन जहाँ पूरा शहर उत्सव में डूबा था, वहीं कानून की आंखों में धूल झोंककर एक मासूम का बचपन छीनने की तैयारी चल रही थी। रायगढ़ जिला प्रशासन और पुलिस की मुस्तैदी ने ऐन वक्त पर एक 16 वर्षीय नाबालिग बालिका को बाल विवाह की बेड़ियों में बंधने से बचा लिया।
सर्जिकल स्ट्राइक जैसा एक्शन : बारात निकलने ही वाली थी कि… मामला शहर के एक सामुदायिक भवन का है, जहाँ शहनाइयां गूंज रही थीं और बारात प्रस्थान के लिए तैयार थी। तभी कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के निर्देश पर महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस और चाइल्ड हेल्पलाइन की संयुक्त टीम ने मौके पर ‘दबिश’ दी। टीम के अचानक पहुंचने से परिजनों में हड़कंप मच गया।
हैरान करने वाला खुलासा : जब टीम ने बालिका के उम्र संबंधी दस्तावेजों की जांच की, तो कड़वा सच सामने आया। बालिका की उम्र मात्र 16 साल 5 माह 13 दिन निकली। यह कानून द्वारा तय न्यूनतम आयु (18 वर्ष) से काफी कम थी। टीम ने तत्काल हस्तक्षेप कर फेरों की रस्म को रुकवा दिया।
कड़ी चेतावनी और कानूनी शिकंजा :
- परिजनों पर नकेल : प्रशासन ने परिजनों से लिखित शपथ पत्र भरवाया कि 18 वर्ष से पहले विवाह नहीं करेंगे।
- भवन संचालक को नोटिस : जिस सामुदायिक भवन में शादी हो रही थी, उसके संचालक को तलब कर सख्त हिदायत दी गई। अब से किसी भी शादी के लिए हॉल बुक करने से पहले वर-वधू के आयु प्रमाण पत्र देखना अनिवार्य होगा।
- टीम की सक्रियता : इस कार्रवाई में जिला बाल संरक्षण अधिकारी, विधिक अधिकारी, चाइल्ड हेल्पलाइन और पुलिस बल की अहम भूमिका रही।
“बाल विवाह सिर्फ कुरीति नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ किया जाने वाला कानूनी अपराध है। प्रशासन ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रहा है।”
प्रशासनिक संदेश
सावधान! आपकी एक सूचना बचा सकती है एक बचपन : जिला प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि बाल विवाह की जानकारी मिलते ही तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर सूचित करें। आपकी गोपनीयता बरकरार रखी जाएगी।




