प्रशासनिक लापरवाही पर गिरी गाज : सूचना छिपाने वाले जनसूचना अधिकारियों को कड़ा फरमान…

लैलूंगा (रायगढ़): शासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर कुंडली मारकर बैठे पंचायत अधिकारियों की अब खैर नहीं। जनपद पंचायत लैलूंगा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) सह प्रथम अपीलीय अधिकारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी न देने वाले अधिकारियों को तलब किया है।

मामला क्या है? – एक जागरूक नागरिक (अपीलकर्ता) ने ग्राम पंचायत केशला, कोडासिया एवं चोरंगा में 01 अप्रैल 2021 से अब तक हुए 15वें वित्त आयोग के कार्यों का पूरा ब्यौरा मांगा था। इसमें भ्रष्टाचार की जड़ तक पहुँचने के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों की मांग की गई थी:
- कार्यों की माप पुस्तिका (Measurement Book) की प्रमाणित छायाप्रति।
- जियो-टैग (Geo-tag) तस्वीरें (कार्य से पूर्व, दौरान और पूर्ण होने के बाद)।
- मजदूरी भुगतान की पुष्टि करने वाले मास्टर रोल की सत्यापित प्रतियां।
30 दिन बीते, पर नहीं टूटी चुप्पी – नियमानुसार 30 दिनों के भीतर जानकारी उपलब्ध करानी थी, लेकिन संबंधित जनसूचना अधिकारियों ने आवेदन को ठंडे बस्ते में डाल दिया। न तो जानकारी दी गई और न ही विलंब का कोई ठोस कारण बताया गया। इस टालमटोल की नीति से यह संदेह गहरा गया है कि क्या इन पंचायतों में हुए निर्माण कार्यों में कोई बड़ी अनियमितता छिपी हुई है?
प्रथम अपीलीय अधिकारी का ‘अल्टीमेटम’ – अपीलकर्ता की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए जनपद पंचायत लैलूंगा ने सूचना के अधिकार (RTI) प्रकरण क्रमांक 49 के तहत सख्त आदेश जारी किया है।

बड़ी कार्रवाई : प्रथम अपीलीय अधिकारी ने जनसूचना अधिकारियों को आदेश दिया है कि वे दिनांक 12 मई 2026 को प्रातः 11:00 बजे समस्त दस्तावेजों के साथ व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों।
भ्रष्टाचार पर प्रहार या केवल कागजी खानापूर्ति? – क्षेत्र में इस कार्रवाई को लेकर चर्चा जोरों पर है। मास्टर रोल और जियो-टैग तस्वीरों की मांग ने कई अधिकारियों की नींद उड़ा दी है, क्योंकि अक्सर कागजों पर होने वाले ‘विकास कार्यों’ की पोल इन्हीं दस्तावेजों से खुलती है। अब देखना यह होगा कि सुनवाई के दिन अधिकारी पुख्ता सबूत पेश कर पाते हैं या उन्हें अपनी लापरवाही के लिए भारी दंड भुगतना पड़ेगा।
प्रतिलिपि : राज्य सूचना आयोग और मुख्य कार्यपालन अधिकारी (जिला पंचायत रायगढ़) को भी इस मामले की जानकारी भेज दी गई है।




