खाकी का ‘खौफ’ खत्म या अपराधियों से ‘गठबंधन’?… 4 साल जेल काट चुके डकैत ने दलित को पीटा, पुलिस ने 3 घंटे में खिलाई ‘रिहाई की मिठाई’…

रायगढ़। जूटमिल थाना क्षेत्र के कोड़ातराई में न्याय का गला घोंटने वाली एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसे देखकर आप दंग रह जाएंगे। एक तरफ सूबे की सरकार अपराध मुक्त छत्तीसगढ़ का दावा करती है, वहीं रायगढ़ पुलिस एक खूंखार अपराधी और पूर्व डकैत के आगे ‘नतमस्तक’ नजर आ रही है।
अपराध का ‘बायोडाटा’ : जेल से लौटा और अब गांव में आतंक – आरोपी सतीश चौधरी कोई साधारण युवक नहीं, बल्कि एक शातिर आदतन अपराधी है। मिली जानकारी के अनुसार, वह डकैती जैसे संगीन मामले में 4 साल जेल की सजा काटकर बाहर आया है। जेल से छूटने के बाद उसने सुधारने के बजाय गांव में दहशत का साम्राज्य फैला रखा है। आरोपी के पास मौजूद लाइसेंसी बंदूक अब कोड़ातराई के ग्रामीणों के लिए काल बन गई है, जिससे वह आए दिन इलाके में फायरिंग कर लोगों को भयाक्रांत (आतंकित) करता रहता है।
ताजा वारदात : सरेआम दलित युवक का अपमान और लूट – ताजा मामला 13 अप्रैल का है, जब इस आदतन बदमाश ने दलित युवक दिलेश्वर सोनी को न केवल बेदम पीटा, बल्कि उसकी जाति को लेकर भद्दी और घृणित गालियां दीं। दिलेश्वर के फटे हुए कपड़े उसकी प्रताड़ना की गवाही दे रहे हैं। पीड़ित का आरोप है कि सतीश ने उसका गला दबाया, ₹5000 लूटे और अपनी बंदूक का धौंस दिखाते हुए जान से मारने की धमकी दी।
पुलिस की भूमिका पर ‘सुलगते’ सवाल : हैरानी की बात यह है कि जिस अपराधी का रिकॉर्ड डकैती जैसे अपराधों से भरा हो, उसे जूटमिल पुलिस ने महज 3 घंटे में ही रिहा कर दिया।
- क्या पुलिस को सतीश के आपराधिक इतिहास की जानकारी नहीं थी?
- एक डकैती के आरोपी के पास लाइसेंसी बंदूक कैसे बरकरार है? उसका लाइसेंस अब तक निरस्त क्यों नहीं किया गया?
- एट्रोसिटी एक्ट (SC/ST Act) जैसे गंभीर मामले में इतनी त्वरित रिहाई किसके दबाव में की गई?
वीडियो सबूत : सरेआम लहराई जा रही बंदूक – वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि आरोपी पक्ष किस तरह बेखौफ होकर हथियार लहरा रहा है। यह वीडियो चीख-चीख कर कह रहा है कि कोड़ातराई में प्रशासन का नहीं, बल्कि ‘बंदूकधारियों’ का राज चल रहा है।
“आरोपी डकैती का सजायाफ्ता है, फिर भी वह खुलेआम फायरिंग करता है। पुलिस की इस मेहरबानी ने हमें दहशत में डाल दिया है। अगर हमें कुछ हुआ, तो इसकी जिम्मेदार जूटमिल पुलिस होगी।” – पीड़ित पक्ष का बयान
अब आर-पार की लड़ाई – इस घटना ने जूटमिल पुलिस की कार्यप्रणाली को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। एक तरफ पीड़ित न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है, वहीं दूसरी ओर डकैती का आरोपी पुलिसिया संरक्षण में फिर से सीना तानकर घूम रहा है। अब देखना यह है कि रायगढ़ के आला अधिकारी इस ‘गठजोड़’ पर क्या कार्रवाई करते हैं या फिर किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार किया जा रहा है?
मांग : तत्काल आरोपी की गिरफ्तारी हो, बंदूक का लाइसेंस निरस्त किया जाए और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हो।




