खाकी पर दाग : क्या बसंतपुर थानेदार ही हैं ‘टायर चोर’? खबर छापने वाले पत्रकार को सलाखों के पीछे भेजा!

रायपुर/बलरामपुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले का बसंतपुर थाना इन दिनों अपराधियों की धरपकड़ के लिए नहीं, बल्कि अपनी विचित्र कार्यप्रणाली और ‘बदले की कार्रवाई’ को लेकर सुर्खियों में है। थाना परिसर के भीतर से जब्ती का माल (टायर और धान) गायब हो जाना और फिर इस सच को उजागर करने वाले पत्रकार की गिरफ्तारी ने पुलिस प्रशासन की साख पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।
सच की कीमत गिरफ्तारी?

मामला तब गरमाया जब बसंतपुर थाने में जब्त वाहनों से टायर चोरी होने और कस्टडी से धान कम होने की खबरें सामने आईं। स्थानीय पत्रकार रामहरी गुप्ता ने इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। उम्मीद तो यह थी कि पुलिस अधीक्षक इस पर संज्ञान लेकर जांच बिठाते, लेकिन इसके उलट पुलिस ने खबर लिखने वाले पत्रकार पर ही धारा 308 (2)(6) के तहत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
जनता के तीखे सवाल: पुलिस की चुप्पी या मिलीभगत?
इस गिरफ्तारी के बाद बसंतपुर की गलियों से लेकर सोशल मीडिया तक सवालों की बाढ़ आ गई है:
- क्या थानेदार ही टायर चोर है? यदि नहीं, तो जांच पूरी होने से पहले पत्रकार को जेल भेजने की इतनी जल्दबाजी क्यों?
- बौखलाहट या षड्यंत्र? क्या अपनी चोरी पकड़े जाने के डर से पुलिस ने पत्रकार की आवाज दबाने का ताना-बाना बुना है?
- एसपी की भूमिका: क्या जिले के पुलिस अधीक्षक को इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी नहीं है, या वे भी मातहतों के इस कारनामे पर मौन सहमति दे रहे हैं?
- सुरक्षा का सवाल: जब थाना परिसर के भीतर खड़ी गाड़ियां सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता अपनी सुरक्षा के लिए किसके पास जाए?
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर प्रहार : पत्रकार संगठनों ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र की हत्या करार दिया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि पुलिस की कस्टडी से सामान गायब होता है, तो उसकी जवाबदेही थानेदार की होनी चाहिए। पत्रकार का काम सच दिखाना है, और अगर सच दिखाने पर जेल जाना पड़े, तो यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।
निष्पक्ष जांच की मांग : फिलहाल, रामहरी गुप्ता को न्यायालय में पेश करने की तैयारी है, लेकिन क्षेत्र में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। लोगों की मांग है कि:
- थाने से गायब टायर और धान के मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच हो।
- पत्रकार पर की गई कार्रवाई की समीक्षा हो और द्वेषपूर्ण पाए जाने पर दोषियों पर एक्शन लिया जाए।
- यह स्पष्ट किया जाए कि क्या वाकई ‘रक्षक’ ही इस चोरी के पीछे छिपे ‘भक्षक’ हैं?
विशेष रिपोर्ट: बलरामपुर-रामानुजगंज ब्यूरो




