धरमजयगढ़ में ACB के ‘रिश्वतकांड’ ने खोल दी जमीन घोटाले की पोल : धरमजयगढ़ में सरकारी जमीन की ‘महा-डकैती’, अब जालसाजों पर FIR का हंटर!…

रायगढ़। छत्तीसगढ़ का रायगढ़ जिला अपनी प्राकृतिक संपदा के साथ-साथ अब जमीन के सनसनीखेज फर्जीवाड़ों के लिए भी सुर्खियों में रहने लगा है। जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र में भू-माफियाओं और सरकारी मुलाजिमों की सांठगांठ का एक ऐसा मामला उजागर हुआ है, जिसने राजस्व विभाग की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकारी जमीन को कूटरचना कर निजी संपत्ति बनाने और फिर उसे बेचने के इस ‘महाखेल’ में अब एफआईआर (FIR) की गाज गिरने वाली है।
रिश्वत कांड : जहाँ से शुरू हुई तफ्तीश की डोर -इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब भ्रष्टाचार निवारण ब्यूरो (ACB) ने धरमजयगढ़ एसडीएम कार्यालय में पदस्त बाबू अनिल कुमार चेलक को ₹1,00,000 की रिश्वत लेते हुए ट्रैप किया। शिकायतकर्ता राजू कुमार यादव (निवासी ग्राम अमलीटिकरा) से बाबू ने ₹2,00,000 की मांग की थी। बाबू का दावा था कि राजू ने जो जमीन खरीदी है, उसकी शिकायत हुई है और उस फाइल को दबाने के बदले यह रकम मांगी गई थी।
बाबू की गिरफ्तारी ने केवल भ्रष्टाचार को ही उजागर नहीं किया, बल्कि उस ‘जमीन’ के काले सच को भी बाहर ला दिया जिसे बचाने के लिए रिश्वत दी जा रही थी।
सरकारी जमीन को ‘निजी’ बनाने का 24 साल पुराना खेल – जांच में यह बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि जिस जमीन की रजिस्ट्री और नामांतरण को लेकर सारा विवाद था, वह असल में सरकारी (शासकीय) भूमि थी।
- पटवारी की भूमिका : वर्ष 2001 के आसपास, हल्का पटवारी ने अपने अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी की।
- फर्जी इंद्राज : शासकीय रिकॉर्ड को ‘दुरुस्त’ करने के नाम पर अमलीटिकरा की बेशकीमती जमीन को फुलेश्वरी (निवासी अमृतपुर) के नाम पर चढ़ा दिया गया।
- रजिस्ट्री का खेल : 17 जनवरी 2025 को फुलेश्वरी ने इसी जमीन को राजू कुमार यादव के नाम बेच दिया। इस सौदे में कुल 5 खसरा नंबर (348/2, 349/2, 334, 355/2, 357/2) शामिल थे, जिनका कुल रकबा 1.312 हेक्टेयर है।
प्रशासनिक लापरवाही या सोची-समझी साजिश? – हैरानी की बात यह है कि जब जनवरी 2025 में इस जमीन की रजिस्ट्री हुई, तो तत्कालीन तहसीलदार ने बिना किसी गहन जांच के नामांतरण (Mutation) के लिए नोटिस जारी कर दिया। किसी भी ग्रामीण या विभाग की ओर से आपत्ति न आने का फायदा उठाकर नामांतरण आदेश भी पारित कर दिया गया। सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी रिकॉर्ड में ‘शासकीय’ दर्ज भूमि के निजीकरण की भनक किसी भी वरिष्ठ अधिकारी को नहीं लगी?
एसडीएम का कड़ा रुख : दर्ज होगी एफआईआर – मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम प्रवीण भगत ने विस्तृत जांच करवाई। जांच में कूटरचना और सरकारी दस्तावेज के साथ छेड़छाड़ की पुष्टि होने के बाद, अब शिकंजा कसना शुरू हो गया है।
प्रवीण भगत (SDM) का बयान: “जमीन के रिकॉर्ड में गड़बड़ी और कूटरचना पाई गई है। एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मांगी गई थी, जिसे देखते हुए तहसीलदार को राजू यादव और अन्य संबंधितों के विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्यवाही करने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।”
कलेक्टर के निर्देश : जीरो टॉलरेंस की नीति – सूत्रों के अनुसार, रायगढ़ कलेक्टर ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया है कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों और इसमें मदद करने वाले राजस्व कर्मियों को बख्शा नहीं जाएगा। इस मामले के बाद अब धरमजयगढ़ क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में हुए अन्य नामांतरणों की भी स्क्रूटनी होने की संभावना बढ़ गई है।
धरमजयगढ़ का यह मामला केवल एक जमीन का विवाद नहीं है, बल्कि यह उस गहरे भ्रष्टाचार का उदाहरण है जहाँ सरकारी तंत्र की मदद से ही सरकारी संपत्ति को लूटा जा रहा है। अब देखना यह है कि क्या पुलिस उन असली चेहरों तक पहुँच पाएगी जिन्होंने 2001 में इस फर्जीवाड़े की नींव रखी थी।
बहुत जल्द जारी करेंगे उन दलालों व अधिकारीयों की विस्तृत कुंडली जिन्होंने रायगढ़ व जशपुर जिले में मचा रखा है उत्पात… बने रहिये RM24 के साथ…




