लैलूंगा में कानून का ‘कफन’ : रेंजर हत्याकांड के आरोपी का ‘जंगल’ पर कब्जा, कलेक्टर के आदेश को ठेंगा दिखा खड़ा हुआ अवैध कॉम्प्लेक्स!…

- कलेक्टर का अल्टीमेटम फेल, तहसीलदार का ‘स्टे’ बना कागज का खिलौना; कुंजारा में खौफ और खादी के संरक्षण में ‘सिस्टम’ हुआ सरेंडर।…
रायगढ़। क्या रायगढ़ जिले के लैलूंगा में अब संविधान की जगह ‘हिस्ट्रीशीटरों’ का मैन्युअल चलता है? यह सवाल इसलिए क्योंकि लैलूंगा के कुंजारा में प्रशासन की नाक के नीचे ‘बड़े झाड़ के जंगल’ को कंक्रीट के अवैध कॉम्प्लेक्स में तब्दील कर दिया गया। ताज्जुब की बात यह है कि जिले के सबसे बड़े अधिकारी (कलेक्टर) का अल्टीमेटम और तहसीलदार का ‘स्थगन आदेश’ (Stay Order) दबंगों के लिए रद्दी के टुकड़े से ज्यादा कुछ साबित नहीं हुए।

स्टे ऑर्डर की धज्जियां : कागजों पर ‘रोक’, मौके पर ‘ठोक-पीट’ जारी – कुंजारा पंचायत के जागरूक नागरिक जनेश्वर महतो की शिकायत ने सरकारी दावों की पोल खोल दी है। खसरा नंबर 243/1 (शासकीय वन भूमि) पर जब अवैध निर्माण शुरू हुआ, तो मामला जनदर्शन से लेकर कलेक्टर की चौखट तक पहुँचा। तहसीलदार ने ‘स्टे’ का झुनझुना तो पकड़ा दिया, लेकिन माफियाओं ने एक दिन भी काम नहीं रोका। आज वहां 5 दुकानें सीना ताने खड़ी हैं, जो प्रशासन की नपुंसकता का प्रतीक बन चुकी हैं।
हिस्ट्रीशीटर का ‘हथौड़ा’ : रेंजर हत्याकांड से गांजा तस्करी तक का सफर – आखिर प्रशासन किससे डर रहा है? शिकायतकर्ता के अनुसार, इस पूरे काले साम्राज्य का बेताज बादशाह सरपंच पति दिलकुमार भगत है। दिलकुमार का इतिहास खून और तस्करी से सना है—रेंजर हत्याकांड, हत्या के प्रयास और गांजा तस्करी जैसे संगीन मामलों में जेल की हवा खा चुका यह शख्स अब सरकारी जमीन को अपनी जागीर समझ बैठा है। चर्चा है कि इसे जनपद उपाध्यक्ष सुक्कन मनोज का वरदहस्त प्राप्त है, जिसके कारण तहसीलदार जैसे अधिकारी भी “ज्यादा काम होने” का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ रहे हैं।
‘साहब’ की चुप्पी या ‘सांठगांठ’ का खेल? – प्रशासनिक लापरवाही का आलम देखिए :
- डेडलाइन पार : कलेक्टर और एसडीएम ने 3 दिन में रिपोर्ट मांगी थी, 24 तारीख बीत गई लेकिन फाइल आज भी खाली है।
- फोन से परहेज : जब तहसीलदार से इस मामले पर जवाब मांगा गया, तो उन्होंने फोन उठाना भी मुनासिब नहीं समझा। क्या साहब की खामोशी के पीछे ‘मलाई’ का खेल है या माफिया का डर?
- पंचायत का तमाचा : महिला आरक्षण का मजाक उड़ाते हुए सरपंच महोदया कहती हैं – “मुझे कुछ नहीं पता, पतिदेव देखते हैं।” यह बयान बताता है कि पंचायत राज नहीं, बल्कि ‘पति राज’ और ‘गुंडा राज’ चल रहा है।
विधायक की ‘खामोशी’ पर खड़े हुए तीखे सवाल – यह पूरा इलाका विधायक विद्यावती सिदार के क्षेत्र में आता है। जब क्षेत्र की बेशकीमती सरकारी जमीन को एक आदतन अपराधी निगल रहा है, तो विधायक महोदया की चुप्पी जनता को खल रही है। क्या जनप्रतिनिधि भी इस ‘भू-माफिया राज’ के आगे बेबस हैं, या फिर चुनावी समीकरणों के चलते मौन साधा गया है?
अंतिम विकल्प : बुलडोजर या जन-आक्रोश? – लैलूंगा की जनता अब जनपद सीईओ और प्रशासन से एक ही सवाल पूछ रही है— क्या अवैध कॉम्प्लेक्स पर बुलडोजर चलेगा? अगर एक हिस्ट्रीशीटर के अवैध निर्माण पर प्रशासन का हथौड़ा नहीं चला, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि रायगढ़ में कानून का नहीं, बल्कि ‘कट्टे और कब्जे’ का राज है।




