लैलूंगा : ४० दिनों की ‘प्रशासनिक बुज़दिली’ ने बढ़ाए घोनो यादव के हौसले! जन-चौपाल के बाद ‘काट डालने’ का खुला ऐलान; अब पीड़िता ने महिला आयोग व SP को लिखा पत्र…

रायगढ़। जिले के न्याय विभाग और पुलिस प्रशासन के लिए इससे शर्मनाक खबर और क्या होगी कि जिस ‘जन-चौपाल’ में जनता को सुरक्षा का भरोसा दिया जाता है, वहीं से एक अपराधी की खूनी गुंडागर्दी शुरू होती है। मामला ग्राम कोयलारडीह का है, जहाँ पीड़िता आज अपनी और अपने परिवार की जान की भीख मांग रही है, लेकिन लैलूंगा पुलिस ४० दिनों से गहरी नींद में सोई है।
SP महोदय, क्या आपकी नाक के नीचे अपराधी ‘सुपर-पावर’ हो गए हैं? – पीड़िता ने SP रायगढ़ और अध्यक्ष महोदया, छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग को भेजे अपने शिकायती पत्र में सनसनीखेज खुलासा किया है। पीड़िता का आरोप है कि :
- जन-चौपाल को खुली चुनौती : तत्कालीन टी.आई. और गणमान्य नागरिकों की मौजूदगी में जनचौपाल आयोजन के बाद आरोपी घोनो यादव ने बाहर से गुंडे बुलाकर पीड़िता को “मार-काट कर फेंक देने” की धमकी दी।
- पुलिस की रहस्यमयी चुप्पी : १५ जनवरी २०२६ को लिखित आवेदन देने के बावजूद आज २७ फरवरी तक कोई FIR दर्ज नहीं हुई। क्या लैलूंगा पुलिस अपराधी घोनो यादव को वीआईपी ट्रीटमेंट दे रही है?
- चरित्र हनन और अश्लीलता : आरोपी ने सरेआम अश्लील गालियां दीं और महिला की अस्मिता को तार-तार किया, जो BNS की धारा २९६ और ७४ के तहत संगीन अपराध है।
महिला आयोग से न्याय की अंतिम उम्मीद : पीड़िता ने राज्य महिला आयोग से गुहार लगाई है कि जब पुलिस ही अपराधी के साथ खड़ी नजर आए, तो एक बेबस महिला कहाँ जाए? आरोपी घोनो यादव खुलेआम गांव में शराब और गांजे का अवैध व्यापार करने की चुनौती दे रहा है और लैलूंगा थाना प्रभारी तमाशबीन बने हुए हैं।
“१५ जनवरी से अब तक कार्रवाई न करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब-तलब किया जाए। क्या पुलिस किसी बड़ी अनहोनी या मेरी हत्या का इंतजार कर रही है?” – पीड़िता
सीधे सवाल – सीधे जवाब चाहिए :
- SP रायगढ़ बताएं कि ४० दिनों तक शिकायत को ठंडे बस्ते में क्यों रखा गया?
- महिला आयोग क्या लैलूंगा पुलिस की इस संवेदनहीनता पर संज्ञान लेकर दोषियों को निलंबित करेगा?
- क्या BNS की धारा २९६, ३५१ और ७४ के तहत तत्काल FIR दर्ज कर आरोपी घोनो यादव को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा?
चेतावनी : यदि पीड़िता या उनके परिवार को खरोंच भी आती है, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी लैलूंगा पुलिस और लापरवाह प्रशासन की होगी। यह खबर केवल सूचना नहीं, बल्कि न्याय के लिए एक चीख है!
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