रायगढ़

बड़ी खबर : रायगढ़ पुलिस की सशक्त पैरवी ने मासूम से दुष्कर्म के दोषी को कोर्ट ने सुनाई अंतिम सांस तक जेल की सजा, पीड़िता को 7 लाख रुपये मुआवजे का आदेश…

रायगढ़। मासूमों और महिलाओं के विरुद्ध अपराध करने वालों के लिए रायगढ़ न्यायालय ने एक नजीर पेश की है। महिला थाना में दर्ज पॉक्सो एक्ट के एक जघन्य मामले में सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी (पॉक्सो) श्री देवेंद्र साहू ने आरोपी सूरज निषाद को आजीवन कारावास (शेष प्राकृतिक जीवन तक) की कठोर सजा सुनाई है।

आइसक्रीम का झांसा देकर किया था मासूम से कुकृत्य : यह रूह कंपा देने वाली घटना 18 मार्च की है। जतरी (पुसौर) निवासी आरोपी सूरज निषाद (23 वर्ष) ने मासूम बालिका को आइसक्रीम खिलाने का लालच देकर उसे सुनसान जगह पर ले जाकर अपनी हवस का शिकार बनाया था। पीड़िता ने जब घर लौटकर अपनी मां को आपबीती सुनाई, तो तत्काल महिला थाना रायगढ़ में मामला दर्ज कराया गया।

पुलिस की ‘सुपरफास्ट’ विवेचना और ठोस सबूत – मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देशन में महिला थाना प्रभारी उपनिरीक्षक दीपिका निर्मलकर ने केस की बागडोर संभाली। पुलिस ने न केवल आरोपी को तत्काल गिरफ्तार कर जेल भेजा, बल्कि वैज्ञानिक साक्ष्य और पुख्ता गवाहों की ऐसी चैन तैयार की कि आरोपी कोर्ट में बच नहीं सका। अभियोजन की ओर से अपर लोक अभियोजक श्री मोहन सिंह ठाकुर ने सशक्त पैरवी करते हुए आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की थी।

न्यायालय का फैसला : ‘जब तक सांसें, तब तक जेल’ – ​माननीय न्यायालय ने आरोपी सूरज निषाद को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2) और पॉक्सो एक्ट की धारा 5(ड), 6 के तहत दोषी पाते हुए निम्नलिखित सजा सुनाई:

  • आजीवन कारावास : आरोपी अब अपने शेष प्राकृतिक जीवन तक जेल की सलाखों के पीछे रहेगा।
  • अर्थदंड : 5000 रुपये का जुर्माना।
  • बड़ी राहत : पीड़िता के पुनर्वास के लिए कोर्ट ने शासन को 7 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि देने का आदेश दिया है।

एसएसपी का कड़ा संदेश : अपराधियों की खैर नहीं – इस ऐतिहासिक फैसले के बाद एसएसपी शशि मोहन सिंह ने स्पष्ट शब्दों में अपराधियों को चेतावनी दी है। उन्होंने कहा :

“नाबालिगों और महिलाओं के विरुद्ध अपराध करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। रायगढ़ पुलिस की प्राथमिकता न केवल अपराधियों को पकड़ना है, बल्कि उन्हें उनके अंजाम तक पहुंचाकर पीड़ितों को त्वरित न्याय दिलाना है।”

Ambika Sao

सह-संपादक : छत्तीसगढ़

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