अंबिकापुर : ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ का रियल डॉन : 13 साल का ‘अंडरग्राउंड’ साम्राज्य, 40 एम्बुलेंस, बसें और आलीशान कोठी; पुलिस के पहुंचने से पहले ही उड़ा…

अंबिकापुर। फ़िल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ की खूनी रंजिश तो आपने पर्दे पर देखी होगी, लेकिन उसी वासेपुर का एक खूंखार गैंगस्टर पिछले 13 साल से छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में न सिर्फ़ छिपकर रह रहा था, बल्कि पुलिस की नाक के नीचे करोड़ों का साम्राज्य चला रहा था। दोहरे हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पा चुका और धनबाद पुलिस का घोषित भगोड़ा शब्बीर आलम (60) अपने साथी जावेद के साथ मिलकर यहां राज कर रहा था।
जब तक झारखंड पुलिस की स्पेशल टीम अंबिकापुर में दबिश देती, तब तक यह शातिर गैंगस्टर अपने साथी समेत एक बार फिर चकमा देकर फरार हो गया। पुलिस के हाथ खाली हैं, लेकिन इस रेड के बाद जो खुलासे हुए हैं, उसने सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं।
डॉन फहीम खान की मां का हत्यारा : 2013 से था फरार – यह कहानी साल 2001 से शुरू होती है। 18 अक्टूबर 2001 को धनबाद में वासेपुर के कुख्यात डॉन फहीम खान की मां नजमा खातून और मौसी शहनाज खातून की सरेराह गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस खूनी खेल को अंजाम दिया था शब्बीर आलम, उसके भाई शाहिद आलम और साथियों ने।
अदालत ने शब्बीर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। लेकिन, साल 2013 में हाईकोर्ट में पेशी के दौरान शब्बीर पुलिस को चकमा देकर रफूचक्कर हो गया। तब से वह धनबाद पुलिस के लिए एक ‘भूत’ बना हुआ था।
अंबिकापुर बना ‘सेफ हेवन’, बस संचालक ने दी पनाह – फरार होने के बाद शब्बीर आलम अंबिकापुर पहुंचा। यहां उसकी मुलाकात स्थानीय बस संचालक बैदुल खान (57) से हुई। बैदुल जानता था कि शब्बीर एक सजायाफ्ता और खूंखार भगोड़ा है, इसके बावजूद उसने न सिर्फ उसे पनाह दी, बल्कि अपने अवैध और वैध धंधों में साझीदार भी बना लिया।
सोमवार को सरगुजा पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए कोतवाली थाने में बस संचालक बैदुल खान के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। उस पर एक इनामी और उम्रकैद के अपराधी को संरक्षण देने का गंभीर आरोप है।
रंगदारी का पैसा और करोड़ों का नेटवर्क – अंबिकापुर में बैठकर शब्बीर आलम सीधे धनबाद के क्रिमिनल सिंडिकेट को ऑपरेट कर रहा था। वहां से रंगदारी, कोयलांचल की वसूली और लेवी का मोटा पैसा लगातार अंबिकापुर पहुंच रहा था। इस काले धन को सफेद करने के लिए उसने बैदुल खान के साथ मिलकर ‘राजहंस बस सर्विस’ का बड़ा नेटवर्क खड़ा किया। सासाराम और पटना रूट पर इसकी बसें दौड़ने लगीं।
सिंडिकेट की अघोषित संपत्तियां :
- 40 से ज्यादा एम्बुलेंस : SECL (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) और अन्य बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में गैंगस्टर की लगभग 40 एम्बुलेंस चल रही थीं।
- रियल एस्टेट में पैर : शब्बीर और उसके गुर्गे जावेद उर्फ बाबू ने खरसिया नाका के पास करोड़ों की जमीनें खरीदकर अवैध प्लॉटिंग का धंधा शुरू कर दिया था।
- आलीशान कोठी : अंबिकापुर के रिहायशी इलाके में गैंगस्टर ने एक आलीशान महलनुमा मकान भी बना लिया था।
ऐन वक्त पर ‘लीक’ हुई रेड, जांच के घेरे में मददगार – झारखंड पुलिस तीन दिन पहले पूरी तैयारी के साथ अंबिकापुर पहुंची थी। लेकिन पुलिस की घेराबंदी और छापेमारी से चंद मिनट पहले ही शब्बीर और जावेद को भनक लग गई और वे रफूचक्कर हो गए। अब पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या विभाग के ही किसी ‘विभीषण’ ने अपराधियों को इनपुट लीक किया था?
पुलिस का आधिकारिक बयान –
”कोतवाली थाने में उम्रकैद के आरोपी को संरक्षण देने और उसके साथ व्यापारिक साझीदारी करने के आरोप में बैदुल खान के खिलाफ अपराध दर्ज कर लिया गया है। गैंगस्टर के पूरे आर्थिक नेटवर्क, उसकी बेनामी संपत्तियों और उसे पर्दे के पीछे से मदद करने वाले सफेदपोशों की भूमिका की बारीकी से जांच की जा रही है। वैधानिक कानूनी कार्रवाई जारी है।”
अमोलक सिंह, ASP (अंबिकापुर)
बड़ा सवाल : 13 साल तक एक राज्य की पुलिस जिस अपराधी को तलाश रही थी, वह दूसरे राज्य में करोड़ों का बिजनेस एम्पायर खड़ा कर लेता है और पुलिस को भनक तक नहीं लगती। क्या शब्बीर आलम का यह साम्राज्य सिर्फ बैदुल खान के भरोसे चल रहा था, या इसके पीछे कुछ और बड़े चेहरे भी शामिल हैं? पुलिस अब इस पूरे सिंडिकेट को नेस्तनाबूद करने में जुट गई है।




