लैलूंगा में प्रशासनिक सर्जरी की मांग : ‘मठाधीश’ बन चुके पंचायत सचिवों के खिलाफ फूटा आक्रोश; पूर्व भाजपा नेता ने खोला मोर्चा, उग्र आंदोलन की दी चेतावनी…

विशेष रिपोर्ट : रायगढ़। जिले के लैलूंगा विकासखंड के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों में प्रशासनिक शुचिता और विकास कार्यों की गति को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विकासखंड की विभिन्न ग्राम पंचायतों में लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे पंचायत सचिवों के खिलाफ अब स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा है। वर्षों से एक ही पंचायत में पदस्थ रहने के कारण निरंकुश और मनमानी पर उतारू हो चुके सचिवों के तत्काल स्थानांतरण (तबादाला) की मांग को लेकर पूर्व भाजपा नेता रवि भगत ने मोर्चा खोल दिया है।

इस संबंध में रवि भगत ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ), जनपद पंचायत लैलूंगा के नाम एक अत्यंत तीखा और तथ्यात्मक ज्ञापन सौंपकर जल्द से जल्द प्रशासनिक फेरबदल करने की मांग की है। संलग्न की गई आधिकारिक फाइल “1002781100.png” को देखने से स्पष्ट होता है कि इस ज्ञापन को 06 जुलाई 2026 को जनपद पंचायत कार्यालय में आधिकारिक तौर पर जमा कर पावती (रिसीविंग सील) प्राप्त कर ली गई है।
‘अंगद का पैर’ बने सचिव : मनमानी और लापरवाही से त्रस्त ग्रामीण – सौंपे गए ज्ञापन में पूर्व भाजपा नेता रवि भगत ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि लैलूंगा विकासखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है। इसका मुख्य कारण कई ग्राम पंचायतों में सचिवों का पिछले कई वर्षों से एक ही जगह पर ‘कुंडली मारकर’ बैठे रहना है।
लंबे समय तक एक ही स्थान पर जमे रहने के कारण इन सचिवों में स्थानांतरण का डर खत्म हो चुका है, जिसके चलते वे ग्रामीणों के बुनियादी और जरूरी कार्यों को करने में घोर लापरवाही और मनमानी बरत रहे हैं। ग्रामीणों को अपने राशन कार्ड, पेंशन, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य शासकीय योजनाओं के लाभ के लिए हफ्तों तक पंचायत भवन के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। जनता की इस उपेक्षा के कारण पूरे विकासखंड के ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
लोकतंत्र का अपमान? नए सरपंचों को परेशान करने का घिनौना खेल – ज्ञापन में सबसे सनसनीखेज और गंभीर आरोप पंचायतों के आंतरिक राजनीतिक तालमेल को लेकर लगाया गया है। रवि भगत के मुताबिक, कई ग्राम पंचायतों के सचिव पुराने (पूर्व) सरपंचों के प्रभाव और साठगांठ में काम कर रहे हैं। लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत चुनकर आए नए निर्वाचित सरपंचों को ये सचिव लगातार टारगेट कर रहे हैं।
आरोप है कि पुराने सरपंचों के इशारे पर काम करते हुए ये सचिव नए सरपंचों के कामकाज में असहयोग कर रहे हैं, आवश्यक फाइलों को दबा रहे हैं और विकास कार्यों की प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति में जानबूझकर अड़ंगेबाजी कर रहे हैं। इस राजनैतिक द्वेष और जुगलबंदी के कारण पंचायतों के भीतर होने वाले नए विकास कार्य पूरी तरह से ठप हो गए हैं, जिसका सीधा खामियाजा निर्दोष ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।
भ्रष्टाचार की जड़ बनी ‘दीर्घकालिक पदस्थापना’ – पारदर्शिता और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था की वकालत करते हुए रवि भगत ने कहा कि एक ही ग्राम पंचायत में वर्षों तक सचिवों की पदस्थापना रहने से वहां ‘भ्रष्टाचार का एक मजबूत नेटवर्क’ तैयार हो जाता है। लंबे समय से एक ही जगह पर टिके रहने के कारण इन सचिवों पर वित्तीय अनियमितताओं, निर्माण कार्यों में लीपापोती और शासकीय फंड के दुरुपयोग के आरोप लगातार सामने आते रहे हैं।
भ्रष्टाचार के इस सिंडिकेट को तोड़ने और ग्रामीण विकास में पारदर्शिता लाने के लिए यह अनिवार्य हो चुका है कि संपूर्ण लैलूंगा विकासखंड के भीतर बड़े पैमाने पर प्रशासनिक सर्जरी की जाए और सभी सचिवों का एक ग्राम पंचायत से दूसरे ग्राम पंचायत में तत्काल स्थानांतरण किया जाए।
अल्टीमेटम : ‘प्रशासन चेते, वरना ठप होगा लैलूंगा’ – अपने ज्ञापन के अंत में रवि भगत ने स्थानीय प्रशासन को सीधे शब्दों में दो टूक चेतावनी (अल्टीमेटम) दी है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि ग्रामीणों के व्यापक हितों और पंचायतों के सुचारू संचालन से जुड़े इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर प्रशासन को तत्काल और कड़ा निर्णय लेना होगा।
यदि लैलूंगा जनपद प्रशासन द्वारा सचिवों के स्थानांतरण को लेकर जल्द ही कोई ठोस और दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाती है, तो क्षेत्र की जनता और जनप्रतिनिधियों को मजबूरन सड़क पर उतरकर एक उग्र और व्यापक आंदोलन करने के लिए विवश होना पड़ेगा। रवि भगत ने साफ कहा है कि इस संभावित आंदोलन के कारण उत्पन्न होने वाली किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति और विभागीय गतिरोध की संपूर्ण जिम्मेदारी सीधे तौर पर शासन और स्थानीय प्रशासन की होगी।
अब देखना यह होगा : 06/07/2026 को जनपद कार्यालय में प्राप्त हुए इस आधिकारिक पत्र (जैसा कि “1002781100.png” में दर्ज सील से प्रमाणित है) के बाद लैलूंगा जनपद सीईओ महोदया इन मठाधीश सचिवों के खिलाफ क्या कड़ा रुख अपनाती हैं, या फिर ग्रामीण अंचल को एक बड़े जन-आंदोलन का गवाह बनना पड़ेगा।




