महा-खुलासा : मुख्यमंत्री के गृह जिले में दलालो का साम्राज्य, जशपुर का ‘खसरा-तंत्र’ और पीएमओ का हंटर सब बेअसर…

- “सुधर जाओ, नहीं तो सुधार देंगे!” – भ्रष्ट अधिकारियों को प्रार्थी का सीधा अल्टीमेटम…
भाग 10
जशपुर। छत्तीसगढ़ में सुशासन के दावों के बीच जशपुर जिले के पत्थलगांव में एक ऐसा ‘लैंड स्कैम’ सामने आया है, जिसने पूरी राजस्व व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। स्वतंत्र पत्रकार की शिकायत के बाद अब इस मामले की गूंज सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) दिल्ली तक पहुँच चुकी है. आदिवासियों की ज़मीन हड़पने, रिकॉर्ड रूम से फाइलें गायब करने और रातों-रात अपनी जाति बदल लेने के इस तिलिस्म ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है।
सिस्टम को ठेंगा दिखाता ‘जातीय गिरगिट’ और करोड़ों का खेल – इस पूरे घोटाले का मुख्य किरदार नरेश कुमार सिदार (पिता अजब सिंह) है, जिसके कारनामे किसी जादूगर से कम नहीं हैं। शासन के कड़े नियमों को इस सिंडिकेट ने ‘कागज की रद्दी’ साबित कर दिया है।
- जाति बदलने का ‘चमत्कार’ : सरकारी दस्तावेजों में नरेश कुमार सिदार ग्राम पालीडीह में ‘गोंड’ जनजाति का है, लेकिन पत्थलगांव के खसरा नंबर 513/85/ख में वह अचानक ‘उरांव’ बन जाता है।
- डायवर्जन और कंक्रीट का जंगल : कृषि भूमियों (खसरा नं. 513/15/क/5, 513/24/क आदि) को धड़ल्ले से ‘वाणिज्यिक’ (Commercial) में परिवर्तित कर दिया गया है।
- HDFC बैंक का असीम प्रेम : 28 अगस्त 2025 का दिन इस सिंडिकेट के लिए महा-मुहूर्त था, जब एक ही दिन में इन व्यावसायिक जमीनों को HDFC BANK, रायगढ़ में बंधक (Mortgage) रखकर करोड़ों के वित्तीय लेनदेन को अंजाम दिया गया।
- पर्दे के पीछे का असली खिलाड़ी : एक सीक्रेट ऑडियो कॉल ने आयुष अग्रवाल की पोल खोल दी है, जो रायपुर की बड़ी पार्टियों को जशपुर की प्राइम लोकेशन (लुड़ेग रोड) पर 5-10 एकड़ ज़मीन दिलाने की सेटिंग कर रहा है।
‘मिस्टर इंडिया’ बन चुकी राजस्व विभाग की फाइलें – पत्थलगांव तहसील कार्यालय में भ्रष्टाचार का आलम यह है कि यहाँ ज़मीनों का मालिकाना हक बिना किसी आदेश के बदल जाता है।
- स्व. सालिकराम की 2.015 हेक्टेयर ज़मीन का रिकॉर्ड बिना किसी सक्षम अधिकारी के आदेश के रातों-रात विलोपित कर दिया गया।
- पटवारी रिपोर्ट में यह माना गया है कि 2011 तक ज़मीन सालिकराम की थी, लेकिन 2013 में बिना किसी दस्तावेज़ या आधार के यह सुशीला कुजूर के नाम कैसे दर्ज हो गई, इसका कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।
- हैरानी की बात यह है कि जिस ज़मीन का मूल आधार ही गायब है, उसे अब तहसीलदार द्वारा नरेश कुमार सिदार, किशन सिंह और विकास राठिया के नाम पर नामांतरित करने की कार्यवाही की जा रही है।
PMO की एंट्री और प्रशासन की ‘गहरी नींद’ – इस मामले की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय में 5 जनवरी 2026 को दर्ज की गई (पंजीकरण संख्या: PMOPG/D/2026/0007354), जो फिलहाल ‘Under Process’ है।
- RTI में लीपापोती : 16 अप्रैल 2026 को जशपुर कलेक्ट्रेट ने आरटीआई के जवाब में बेशर्मी से कह दिया कि उनके पास इस शिकायत की जांच से संबंधित कोई जानकारी या रिकॉर्ड ‘संधारित’ नहीं है।
- पुलिस के दबाव में खुला राज : मामले के तूल पकड़ने पर आखिरकार 29 अप्रैल 2026 को तहसीलदार पत्थलगांव ने SDOP (पुलिस) को एक गोपनीय रिपोर्ट सौंपी।
- इस रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि नरेश कुमार सिदार और उसके परिवार के नाम पर ग्राम पालीडीह में 3.149 हेक्टेयर (खसरा 100, 163/1 आदि) और ग्राम पत्थलगांव में 0.672 हेक्टेयर (10 विभिन्न खसरों में) अचल संपत्ति दर्ज है।
अब अधिकारियों की खैर नहीं! – आदिवासियों के अधिकारों पर डाका डालने वाले इस ‘अजब-गजब’ गठजोड़ की फाइलें अब दिल्ली के रडार पर हैं. प्रार्थी और स्थानीय जनता का संदेश एकदम स्पष्ट है – सिस्टम में बैठे जो दलाल और भ्रष्ट अधिकारी भू-माफियाओं की चाकरी कर रहे हैं, वे अपना बोरिया-बिस्तर बांध लें।
“समय रहते सुधर जाओ, नहीं तो जनता और कानून तुम्हें सुधार देगा “ इस लैंड स्कैम में शामिल ‘सफेदपोशों’ और ‘खाकी-खादी’ के गठजोड़ पर अब एफआईआर (FIR) और कड़ी कानूनी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
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