रायगढ़

कुंजारा कांड : “72 घंटे में रिपोर्ट दो या कुर्सी छोड़ो!” – जंगल की जमीन निगल रहे रसूखदारों पर कलेक्टर का कड़ा अल्टीमेटम…

भाग 2

रायगढ़। जिले में सरकारी जमीन की लूट का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक तंत्र की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्राम पंचायत कुंजारा (लैलूंगा) में ‘बड़े झाड़ जंगल’ की सुरक्षित भूमि पर सरपंच पति और सचिव द्वारा मिलकर अवैध शॉपिंग कॉम्प्लेक्स खड़ा किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि शासन के ‘स्टे’ को ठेंगा दिखाकर निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी है।

जंगल काटकर बन रहा ‘व्यावसायिक गढ़’ – राजस्व दस्तावेजों में खसरा नंबर 243/1 की जो भूमि ‘बड़े झाड़ जंगल’ के रूप में संरक्षित है, उस पर सरपंच पति दिलकुमार भगत, सचिव परमेश विश्वाल, अनुज चौधरी, नेतराम साहू और नरेश प्रधान ने अवैध कब्जा कर लिया है। शिकायतकर्ता जनेश्वर महतो के अनुसार, बिना किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति के इस सरकारी मद की भूमि का स्वरूप बदला जा रहा है।

प्रशासन बेअसर : आदेश बना ‘कागज का टुकड़ा’ – इस मामले में प्रशासनिक विफलता के गंभीर प्रमाण मिले हैं :

  • 15 अप्रैल 2026 : तहसीलदार लैलूंगा ने ‘काम रोको’ (स्थगन) आदेश जारी किया था。
  • हकीकत : इस आदेश के बावजूद रसूखदारों ने निर्माण कार्य नहीं रोका, बल्कि और तेज़ गति से लिंटर डालने की तैयारी शुरू कर दी。
  • आरोप : जनेश्वर महतो ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि तहसीलदार का आदेश अब सिर्फ एक ‘कागज का टुकड़ा’ बनकर रह गया है और इसमें अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका है।

“मेरी हत्या हो सकती है” – शिकायतकर्ता का सनसनीखेज आरोप : कलेक्टर कार्यालय पहुंचे जनेश्वर महतो ने न केवल जमीन के अवैध कब्जे की बात की, बल्कि अपनी जान को खतरा भी बताया है। वीडियो बयान में उन्होंने आरोप लगाया कि:

​”सरपंच पति और उनके सहयोगियों का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है (रेंजर हत्याकांड का हवाला देते हुए)। मुझे और मेरे परिवार को जान का खतरा है। तहसीलदार और रसूखदारों की मिलीभगत के कारण मेरे वैध प्रधानमंत्री आवास पर भी बिना किसी जांच के स्थगन आदेश दे दिया गया है, ताकि मुझे दबाया जा सके।” [वीडियो स्त्रोत]

कलेक्टर का 72 घंटे का अल्टीमेटम : मामले की गूंज अब रायगढ़ कलेक्टर कार्यालय के गलियारों में है। 30 अप्रैल 2026 को आवेदन मिलने के तुरंत बाद, अपर कलेक्टर ने एसडीएम लैलूंगा को आदेश जारी कर 3 दिन के भीतर जांच प्रतिवेदन मांगा है。 प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्माण नहीं रोका गया, तो यह शासन की संपत्ति और सार्वजनिक हित का बड़ा नुकसान होगा。

मुख्य बिंदु एक नजर में :

  • भूमि का प्रकार : शासकीय बड़े झाड़ जंगल (संरक्षित श्रेणी)।
  • दबंगई : तहसीलदार के ‘स्टे’ के बाद भी निर्माण जारी।
  • धमकी : शिकायतकर्ता के परिवार पर हमले की आशंका।
  • कार्रवाई: कलेक्टर कार्यालय ने 3 दिन में मांगी रिपोर्ट।

संपादकीय टिप्पणी : क्या सरकारी जमीन पर कंक्रीट का यह ढांचा प्रशासन की इकबाल को चुनौती दे रहा है? क्या 3 दिन बाद कलेक्टर का चाबुक चलेगा या रसूख के आगे कानून एक बार फिर बौना साबित होगा?

शिकायतकर्ता जनेश्वर महतो ने साफ कर दिया है कि यदि जिला प्रशासन से न्याय नहीं मिला, तो वे हाईकोर्ट की शरण लेंगे।

पूर्व में प्रकाशित खबर –

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!