बस्तर

धर्मांतरण पर रेटावंड में ‘रणसंग्राम’ : ग्रामीणों ने चप्पलों से पास्टर को पीटा, फटे कपड़े; सरेआम हुआ हाई-वोल्टेज ड्रामा…

बस्तर। जिले के शांत इलाकों में एक बार फिर धर्मांतरण को लेकर माहौल गरमा गया है। बस्तर थाना क्षेत्र के रेटावंड गांव में धर्मांतरण के गंभीर आरोपों के बाद ग्रामीणों का गुस्सा ज्वालामुखी की तरह फूट पड़ा। ग्रामीणों ने ओडिशा से आए एक पास्टर पर न केवल हमला किया, बल्कि सरेआम उसकी शर्ट फाड़ दी और लात-घूंसों व चप्पलों से उसकी जमकर धुनाई कर दी।

​इस हाई-वोल्टेज ड्रामे का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है, जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है।

डेढ़ साल का गुस्सा एक बैठक में निकला – ​जानकारी के अनुसार, विवाद की जड़ें पिछले 18 महीनों से गहरी हो रही थीं। पीड़ित पास्टर मूल रूप से ओडिशा के नवरंगपुर का निवासी है, जो पिछले डेढ़ साल से रेटावंड गांव में किराए के मकान में अपने परिवार के साथ रह रहा था।

ग्रामीणों के मुख्य आरोप :

  • ​पास्टर गांव के भोले-भाले आदिवासियों को प्रलोभन देकर उनका धर्म परिवर्तन करा रहा था।
  • ​गांव की प्राचीन संस्कृति और परंपराओं के विरुद्ध लोगों को भड़काया जा रहा था।
  • ​कई बार मौखिक चेतावनी के बावजूद पास्टर की गतिविधियां बंद नहीं हुई थीं।

पंचायत में हुआ ‘सरेआम इंसाफ’ : रविवार को गांव के सामुदायिक भवन में एक बड़ी बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में न केवल पारंपरिक ग्रामीण, बल्कि वे परिवार भी शामिल हुए थे जिन्होंने हाल के दिनों में ईसाई धर्म अपनाया था।

घटनाक्रम का ब्योरा:

  • अल्टीमेटम : पंचायत ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि पास्टर को तुरंत अपने गृह राज्य ओडिशा लौट जाना चाहिए।
  • विरोध की चिंगारी : जब पास्टर ने गांव छोड़ने से इनकार किया और ग्रामीणों के साथ बहस शुरू की, तो माहौल अचानक हिंसक हो गया।
  • पिटाई और बदसलूकी : उग्र भीड़ ने पास्टर को पकड़ लिया। महिलाओं और पुरुषों ने मिलकर उसे चप्पलों और घूंसों से पीटना शुरू कर दिया। इस दौरान उसकी शर्ट भी फाड़ दी गई।

पुलिस की एंट्री और वर्तमान स्थिति : ​मामले की गंभीरता को देखते हुए बस्तर पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस ने आक्रोशित भीड़ के बीच से पास्टर और उसके परिवार को सुरक्षित बाहर निकाला।

बस्तर में बढ़ता तनाव : बस्तर के भीतरी इलाकों में धर्मांतरण एक बेहद संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी संस्कृति से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेंगे। वहीं, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है और किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

“गांव में अब शांति है। दोनों पक्षों को सुना गया है। पास्टर ने स्वेच्छा से वापस जाने की बात कही है, जिससे तनाव कम हुआ है।” – स्थानीय पुलिस अधिकारी

Ambika Sao

सह-संपादक : छत्तीसगढ़

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