कुनकुरी : 10 लाख की ‘उन्नति’ पर विवादों का ब्रेक; तहसील कोर्ट के स्टे से अधर में लटका सेन समाज का सामुदायिक भवन…

जशपुर। विकास की फाइलों पर जब कानूनी अड़ंगे की स्याही गिरती है, तो योजनाएं अक्सर ‘अधर’ में लटक जाती हैं। कुछ ऐसा ही मामला कुनकुरी में सामने आया है, जहाँ उन्नति योजना के तहत स्वीकृत ₹10 लाख की लागत से बनने वाला सेन समाज सामुदायिक भवन विस्तार कार्य अब कागजी दांव-पेच और भूमि विवाद की भेंट चढ़ गया है।
क्या है पूरा मामला? – जनपद पंचायत कुनकुरी ने बीते 4 फरवरी को सेन समाज की सुविधा हेतु भवन विस्तार, शौचालय निर्माण और सौंदर्यीकरण के लिए बजट की हरी झंडी दी थी। ग्राम पंचायत रेमते को इसकी निर्माण एजेंसी बनाया गया था। लेकिन जैसे ही नींव पड़ने की तैयारी हुई, बजरंग नगर के राजेश साव व अन्य ग्रामीणों ने कानूनी मोर्चा खोल दिया।
विवाद की मुख्य वजहें : विपक्षी पक्ष ने तहसील न्यायालय में आपत्ति दर्ज कराते हुए गंभीर सवाल खड़े किए हैं :
- भूमि की प्रकृति : आरोप है कि जिस खसरा नंबर 99/2 पर निर्माण हो रहा है, वह असल में शासकीय या वन भूमि है।
- अनुमति का अभाव : बिना वैधानिक प्रक्रियाओं और अनुमति के सरकारी राशि का उपभोग किया जा रहा है।
- सार्वजनिक हित : ग्रामीणों का दावा है कि इस निर्माण से क्षेत्र की पुरानी सार्वजनिक सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं।
“न्यायालय का कड़ा रुख : जब तक पटवारी का प्रतिवेदन और भूमि की वास्तविकता स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक विवादित स्थल पर ‘यथास्थिति’ (Status Quo) बनाए रखने के आदेश दिए गए हैं।”
अधर में ‘उन्नति’ और सरकारी बजट – तहसील न्यायालय के इस अंतरिम आदेश के बाद निर्माण कार्य को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। निर्माण एजेंसी (ग्राम पंचायत रेमते) को मिले गुणवत्ता और समयसीमा के निर्देश अब ठंडे बस्ते में हैं।
बड़ा सवाल : आखिर निर्माण शुरू करने से पहले भूमि के दस्तावेजों की जांच क्यों नहीं की गई? यदि जमीन विवादित थी, तो जनपद पंचायत ने बजट आवंटित करने में जल्दबाजी क्यों दिखाई? फिलहाल, पटवारी की रिपोर्ट ही तय करेगी कि सेन समाज का यह भवन आकार लेगा या फाइलों में ही दफन होकर रह जाएगा।




