डबल इंजन का ‘डिजिटल’ सुशासन : गृह जिले में PMO की शिकायतें 6 महीने से फांक रहीं धूल, राजधानी में लॉन्च हो गया ‘1076’ का नया झुनझुना!…

रायपुर (व्यंग्य प्रभाग) : राजधानी के वातानुकूलित महानदी भवन में आज ‘सुशासन’ का जो बटन दबा है, उसकी गूंज भले ही पूरे प्रदेश के अखबारों के पहले पन्ने पर सुनाई दे रही हो, लेकिन मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के अपने गृह जिले में यह गूंज पिछले 6 महीनों से फाइलों के भारी-भरकम बोझ तले दबी हुई है। एक तरफ जहां ‘डबल इंजन’ की सरकार ने अपनी तेज रफ्तार दिखाते हुए 1076 नंबर का नया और चमचमाता शंखनाद कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से आई शिकायतें मुख्यमंत्री के अपने ही आंगन में न्याय की भीख मांगते-मांगते थक चुकी हैं।
8000 अधिकारियों की ‘फौज’ और PMO की लाचार फाइलें – वाह रे सिस्टम! बड़े-बड़े अक्षरों में बताया जा रहा है कि 42 विभागों के 8000 अधिकारी 1195 श्रेणियों में शिकायतों का निपटारा करेंगे। वो भी बिल्कुल “समयबद्ध” तरीके से। यह सुनकर उन फरियादियों की आंखों में जरूर ‘खुशी के आंसू’ आ गए होंगे जिनकी शिकायतें साक्षात PMO से होकर आईं और पिछले छह महीनों से सीएम साहब के गृह जिले में अधिकारियों की मेज पर केवल ‘पेपरवेट’ का काम कर रही हैं। शायद इन 8000 अधिकारियों के जीपीएस (GPS) में मुख्यमंत्री के गृह जिले का नक्शा ही फीड नहीं है, या फिर ‘डबल इंजन’ में से एक इंजन वहां जाते-जाते पंचर हो जाता है।
हेलो! मैं मुख्यमंत्री बोल रहा हूं… (और पीछे फाइलों का अंबार लगा है) – हेल्पलाइन की लॉन्चिंग के दौरान एक बड़ा ही भावुक और ‘कैमरा-फ्रेंडली’ दृश्य देखने को मिला। मुख्यमंत्री जी ने स्वयं कॉलर श्री पूनाराम ठाकरे जी से बात की और उन्हें आय प्रमाण पत्र की समस्या सुलझाने का आश्वासन दिया। पूनाराम जी तो धन्य हो गए! लेकिन वो लोग जो पिछले 6 महीने से PMO पोर्टल का मुंह ताक रहे हैं, वो सोच रहे हैं कि काश! एक कॉल उनके पास भी आ जाता। लेकिन जमीन पर पड़ी 6 महीने पुरानी फाइलों की धूल साफ करने से ज्यादा मजा कैमरे के सामने ‘लाइव डेमो’ देने में है, इसमें कोई शक नहीं।
‘मल्टी-लेवल एस्केलेशन’ या सिर्फ बातों का ‘व्हाट्सएप’? – इस नई प्रणाली की सबसे मजेदार बात यह है कि अगर शिकायत का समाधान नहीं हुआ, तो वह स्वतः उच्च अधिकारियों के पास एस्केलेट (अग्रेषित) हो जाएगी। अब सवाल यह है कि जो शिकायतें देश के सबसे बड़े कार्यालय यानी ‘प्रधानमंत्री कार्यालय’ से सीधे आई हैं, क्या वो ‘उच्च’ स्तर की नहीं थीं?
कुल मिलाकर, “नागरिक देवो भव:” का पवित्र मंत्र जपने वाली सरकार ने जनता के हाथों में 1076 नंबर का एक नया खिलौना थमा दिया है। जब तक जनता इस टोल-फ्री नंबर पर ‘आप कतार में हैं, कृपया प्रतीक्षा करें’ सुनती रहेगी, तब तक शायद गृह जिले की वो 6 महीने पुरानी PMO की फाइलें भी अपना ‘स्वर्ण जयंती’ वर्ष मना लेंगी। आखिर सुशासन की इस नई चमक-दमक में, पुरानी फाइलों की धूल किसे दिखाई देती है?




