खल्लारी मंदिर हादसा : मौत का ‘रोपवे’, लापरवाही ने ली एक और जान; अब तक 2 की मौत, 2 के हालात नाजुक…

महासमुंद। आस्था के केंद्र खल्लारी मंदिर में चैत्र नवरात्रि के दौरान हुआ रोपवे हादसा अब और भी दर्दनाक हो गया है। रविवार को हुए इस भीषण हादसे में घायल एक और श्रद्धालु गोविंद स्वामी (47) ने मंगलवार रात इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वह पिछले दो दिनों से वेंटिलेटर पर जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे थे। इस हृदयविदारक घटना में अब तक कुल दो मौतें हो चुकी हैं।

खाई में गिरी खुशियाँ : एक हँसता-खेलता परिवार तबाह – हादसे का शिकार हुआ परिवार रायपुर के राजातालाब क्षेत्र से माता के दर्शन करने पहुँचा था। खुशियों भरे माहौल में मातम तब पसरा जब दर्शन कर नीचे लौट रही ट्रॉली का केबल अचानक टूट गया।
- पहली मौत : आयुषी धावरे (28), जो पाटन के आत्मानंद स्कूल में शिक्षिका थीं। महज 4 महीने पहले ही उनकी शादी हुई थी।
- दूसरी मौत : गोविंद स्वामी (47), पेशे से किसान। उनकी पत्नी नमिता और 10 वर्षीय बेटी अंशुमिता अभी भी अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही हैं।
हादसे का घटनाक्रम : जब हवा में मौत झूलने लगी – रविवार सुबह करीब 22 मार्च को जब श्रद्धालु नीचे उतर रहे थे, तभी मुख्य केबल जवाब दे गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार:
- अनियंत्रित ट्रॉली : केबल टूटने से नीचे आ रही ट्रॉली बेकाबू होकर सीधे पहाड़ी की चट्टानों से जा टकराई और 20 फीट नीचे जा गिरी।
- दूसरी ट्रॉली का टकराव : झटके के कारण नीचे से ऊपर जा रही दूसरी ट्रॉली भी असंतुलित होकर स्टेशन से टकरा गई।
- चीख-पुकार : इस भयावह मंजर के बाद मंदिर परिसर में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय ग्रामीणों और पुलिस ने घायलों को खाई से निकालकर अस्पताल पहुँचाया।
प्रशासनिक कार्रवाई : संचालक और कर्मचारियों पर FIR –
हादसे की प्रारंभिक जांच में सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी और मेंटेनेंस में लापरवाही की बात सामने आई है। जिला प्रशासन के कड़े रुख के बाद खल्लारी थाने में निम्नलिखित के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है:
- कंपनी : रोप-वे एवं रिसॉर्ट प्राइवेट लिमिटेड, कोलकाता।
- कर्मचारी : स्थानीय ऑपरेटर बीरबल जंघेल और रामेश्वर यादव।
- धाराएँ : भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 173 के तहत सेक्शन 289 और 125(a) के अंतर्गत प्रकरण दर्ज।
“स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि समय पर मेंटेनेंस किया गया होता, तो केबल नहीं टूटता। भीड़भाड़ वाले सीजन में बिना पुख्ता सुरक्षा जांच के रोपवे का संचालन करना सीधे तौर पर जान से खिलवाड़ है।”
खल्लारी मंदिर का महत्व – महासमुंद से 25 किमी दूर पहाड़ी पर स्थित यह मंदिर महाभारत कालीन मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। पहाड़ी की चोटी तक पहुँचने के लिए 800 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं, जिससे बचने के लिए बड़ी संख्या में लोग रोपवे का सहारा लेते हैं। चैत्र नवरात्रि के चौथे दिन हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्थाओं पर बड़े सवालिया निशान लगा दिए हैं।




