एशिया के दूसरे सबसे बड़े चर्च कुनकुरी में मसीह जन्मोत्सव की धूम, आस्था और वास्तुकला का अद्भुत संगम…

जशपुर। जिले में क्रिसमस का उत्साह अपने चरम पर है। कड़ाके की ठंड के बावजूद लोगों की आस्था कम नहीं हुई है। सुबह से ही चर्चों में श्रद्धालुओं के आने-जाने का सिलसिला शुरू हो चुका है, और पूरा वातावरण ‘मैरी क्रिसमस’ की बधाइयों से गूंज रहा है। 24 दिसंबर की रात प्रभु यीशु के आगमन के इंतजार में हर आंखें टिकी हुई हैं।
कुनकुरी महागिरजाघर : सात खंभों पर टिकी आस्था – जशपुर जिला मुख्यालय से 42 किमी दूर स्थित ‘रोजरी की महारानी महागिरजाघर’ (Cathedral of Our Lady of the Rosary) न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे एशिया के लिए गर्व का विषय है। इसे एशिया का दूसरा सबसे बड़ा चर्च माना जाता है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इसे विश्व प्रसिद्ध बनाती हैं:
- अनोखी वास्तुकला : यह विशालकाय भवन केवल सात बिम्बों (खंभों) पर टिका हुआ है, जो बाइबिल के विशेष तथ्यों को दर्शाते हैं।
- हजारों की क्षमता : यहाँ एक साथ हजारों लोग प्रार्थना (मिस्सा) में शामिल हो सकते हैं।
- विशेष झांकियां : चर्च के बाहर 15-16 गांवों के लोगों द्वारा बनाई गई सजीव झांकियां आकर्षण का केंद्र हैं, जो समाज को विशेष संदेश दे रही हैं।
बिशप एमानुएल केरकेट्टा की अगुवाई में होगी मुख्य प्रार्थना : जशपुर धर्मप्रांत के बिशप एमानुएल केरकेट्टा ने बताया कि इस वर्ष भी मसीह जन्मोत्सव का आयोजन बेहद भव्य होगा। मुख्य अधिष्ठाता के रूप में बिशप केरकेट्टा रात्रि में विशेष मिस्सा पूजा और प्रार्थना संपन्न कराएंगे। उनके साथ पुरोहितों का समूह भी मौजूद रहेगा। जिले के अन्य छोटे चर्चों और गांवों में भी सामूहिक प्रार्थना सभाओं की विशेष व्यवस्था की गई है।
कैरोल गीतों की धुन और कड़ाके की ठंड : पिछले एक महीने से जिले के चर्चों में कैरोल गीतों का अभ्यास चल रहा था, जो अब फिजाओं में गूंज रहा है। कुनकुरी चर्च में बज रही कैरोल की मधुर धुन श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर रही है। ठंड की परवाह किए बिना बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी पारंपरिक गीतों पर झूमते और खुशियां मनाते नजर आ रहे हैं।
दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब : चर्च परिसर के बाहर प्रभु यीशु के जन्म के सजीव दृश्य को दिखाने के लिए भव्य ‘चरनी’ (Manger) बनाई गई है। लोग कतारों में लगकर दर्शन कर रहे हैं। शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन और चर्च वॉलंटियर्स भी मुस्तैद हैं।
संदेश : यह त्योहार केवल उत्सव नहीं, बल्कि आपसी भाईचारे और शांति का प्रतीक है। कुनकुरी का यह भव्य आयोजन जशपुर की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक समृद्धि को पूरे विश्व के सामने रखता है।




