रायगढ़ : रेबीज के विरुद्ध स्वास्थ्य अमला मुस्तैद, विशेषज्ञों ने दिया ‘जीरो डेथ’ का मंत्र…

रायगढ़। रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी को जड़ से मिटाने और जिले में ‘शून्य मृत्यु’ का लक्ष्य हासिल करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के निर्देशन एवं सीएमएचओ डॉ. अनिल कुमार जगत के मार्गदर्शन में बुधवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के आरोग्यम् सभाकक्ष में एक दिवसीय सघन प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया।
“सतर्कता ही सुरक्षा” : विशेषज्ञों ने साझा किए महत्वपूर्ण तथ्य – प्रशिक्षण में मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ डॉ. आनंद मसीह लकड़ा, डॉ. जितेन्द्र नायक और डॉ. कलेश्वर राठिया ने मास्टर ट्रेनर के रूप में अमले को प्रशिक्षित किया। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि रेबीज 100% घातक है, लेकिन समय पर सही उपचार से इसे 100% रोका भी जा सकता है।
प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु :
- तत्काल उपचार : जानवर के काटने पर घाव को साबुन और बहते पानी से तुरंत धोना प्राथमिक सुरक्षा है।
- टीकाकरण प्रोटोकॉल : एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) और जरूरत पड़ने पर इम्यूनोग्लोबुलिन का सही समय पर उपयोग।
- प्रबंधन : दवाओं की उपलब्धता, केस रेजिस्ट्रेशन और डेटा एंट्री की बारीकियां समझाई गईं।
अस्पतालों के लिए कड़े निर्देश : हर केंद्र में होगा नोडल अधिकारी – शासन के दिशा-निर्देशों और माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए स्वास्थ्य केंद्रों के लिए नई गाइडलाइन जारी की गई है:
- नोडल अधिकारी : प्रत्येक शासकीय और निजी स्वास्थ्य केंद्र में रेबीज प्रबंधन के लिए एक समर्पित नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा।
- सुरक्षा ऑडिट : अस्पताल परिसरों में आवारा कुत्तों के प्रवेश को रोकने के लिए बाउंड्रीवाल और गेट की सुरक्षा पुख्ता की जाएगी।
- स्टॉक की उपलब्धता : प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) स्तर तक टीकों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
मदद के लिए डायल करें : हेल्पलाइन नंबर – आमजन की सहायता और जागरूकता के लिए विभाग ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं:
- डॉग बाइट बचाव सहायता : 1100
- स्वास्थ्य संबंधी जानकारी : 104




