बलरामपुर शिक्षा विभाग में बड़ा खेल: सस्पेंड शिक्षक की जगह नई पोस्टिंग, ‘एकल शिक्षकीय’ दिखाकर दो जगह से आहरित हुआ वेतन!

- कलेक्टर तक पहुंची शिकायत: सरपंच ने DEO और BEO की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल; निष्पक्ष जांच, आदेश निरस्तीकरण और वसूली की मांग…
बलरामपुर-रामानुजगंज। जिले से शिक्षा विभाग की एक ऐसी कारगुजारी सामने आई है, जिसने प्रशासनिक गलियारों से लेकर जनमानस तक हलचल मचा दी है। विकासखंड वाड्रफनगर के शासकीय प्राथमिक शाला धनजरा में नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए एक निलंबित (सस्पेंड) पद पर ही नई पदस्थापना कर दी गई। इतना ही नहीं, कागजों में स्कूल को ‘एकल शिक्षकीय’ बताकर दोहरा वेतन आहरित करने का गंभीर वित्तीय आरोप भी लगा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्राम पंचायत रामनगर के सरपंच सुनील सिंह ने सीधे जिला कलेक्टर के समक्ष मोर्चा खोलते हुए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) की साठगांठ की लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
निलंबित पद पर ‘अवैध’ पदस्थापना का खेल – शिकायत के अनुसार, शासकीय प्राथमिक शाला धनजरा में प्रधान पाठक का पद लंबे समय से खाली है, जबकि विद्यालय के एक मूल शिक्षक 4 नवंबर 2025 से निलंबित चल रहे हैं। स्थापित प्रशासनिक नियमों (CCS CCA Rules) के अनुसार निलंबन की अवधि के दौरान संबंधित पद को रिक्त नहीं माना जाता।

इसके बावजूद, आरोप है कि BEO वाड्रफनगर ने नियम-कायदों को ताक पर रखकर इस स्कूल को “एकल शिक्षकीय विद्यालय” की फर्जी रिपोर्ट तैयार की। इसी मनगढ़ंत रिपोर्ट को आधार बनाकर DEO बलरामपुर ने आदेश क्रमांक 5660 (दिनांक 25 मई 2026) जारी कर श्री गोपाल सिंह आयम की पदस्थापना सीधे उसी पद पर कर दी, जो पहले से सस्पेंडेड शिक्षक के नाम पर दर्ज है।
वित्तीय गड़बड़ी और दोहरा वेतन आहरण! – सरपंच सुनील सिंह द्वारा कलेक्टर को सौंपी गई शिकायत में वित्तीय अनियमितता के चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए गए हैं:
- एकल शिक्षक की आड़ में दोहरा वेतन: जुलाई 2026 के वेतन बिल में स्कूल को ‘एकल शिक्षकीय’ दर्शाया गया, लेकिन आहरण दो शिक्षकों का कर लिया गया।
- नियमों का उल्लंघन: सरपंच का स्पष्ट आरोप है कि यह CCS (CCA) Rules, 1965/1966 के प्रावधानों का सीधा उल्लंघन है और सरकारी खजाने को नुकसान पहुँचाने की साजिश है।
भेदभाव का आरोप : अनुच्छेद-14 का उड़ रहा मज़ाक – शिकायत में शिक्षा विभाग के दोहरे रवैये पर भी कड़ा प्रहार किया गया है। सरपंच का कहना है कि :
“एक तरफ एक शिक्षक का निलंबन महज 45 दिनों में समाप्त कर उसे बहाल कर दिया जाता है, वहीं दूसरी तरफ समान परिस्थिति वाले दूसरे शिक्षक को पिछले 10 महीनों से निलंबित रखा गया है।”
एक ही विभाग में अलग-अलग मामलों के लिए अपनाई जा रही यह ‘पिक एंड चूज’ नीति भारतीय संविधान के अनुच्छेद-14 (समानता का अधिकार) का सीधा उल्लंघन है।
सरपंच ने कलेक्टर से की ये 3 प्रमुख मांगें :
- निष्पक्ष जांच एवं कार्रवाई: DEO और BEO के खिलाफ उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराकर दोषी अधिकारियों पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
- आदेश की निरस्ती: नियम-विरुद्ध जारी की गई अवैध पदस्थापना आदेश (क्रमांक 5660) को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।
- रिकवरी (वसूली): नियमों को ताक पर रखकर बांटे गए अवैध वेतन की पाई-पाई की वसूली संबंधित जिम्मेदारों से की जाए।
विभागीय चुप्पी पर उठते सवाल – इतने गंभीर आरोपों और साक्ष्यों के बावजूद खबर लिखे जाने तक शिक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और क्या दोषियों पर कोई गाज गिरती है या मामला फाइलों में ही दबा दिया जाएगा।
(नोट : आरोपों की अंतिम पुष्टि प्रशासनिक जांच रिपोर्ट के बाद ही हो सकेगी।)




