
फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद। कानून-व्यवस्था को सीधी चुनौती देती अवैध गतिविधियां जब किसी शांतिप्रिय क्षेत्र के सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न करने लगें, तो शासन-प्रशासन के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों की मंशा पर भी सवाल उठना स्वाभाविक हो जाता है। लौह नगरी दल्ली राजहरा के वार्ड क्रमांक 20 स्थित गांधी चौक इन दिनों किसी विकास कार्य या जन कल्याणकारी पहल के लिए नहीं, बल्कि बेधड़क संचालित हो रहे अवैध सट्टेबाजी के नेटवर्क के कारण प्रशासनिक और सामाजिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। स्थानीय निवासियों और सामाजिक संगठनों द्वारा बार-बार जताई जा रही गंभीर चिंताओं को दरकिनार कर बेखौफ चलाए जा रहे इस काले धंधे ने पुलिस तंत्र की कार्यप्रणाली और स्थानीय राजनीतिक संरक्षण पर कई तीखे प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

दिव्यांगता की आड़ में कानून की आंखों में धूल
गांधी चौक एवं उसके आसपास के संवेदनशील इलाकों में जड़ें जमा चुके इस गैर-कानूनी सिंडिकेट की कमान ‘खिलावन साहू’ नाम के एक दिव्यांग सटोरिए के हाथों में बताई जा रही है। स्थानीय लोगों और समाचार माध्यमों से छनकर आ रही जानकारियों के अनुसार, मुख्य आरोपी अपनी शारीरिक सीमाओं का अनुचित लाभ उठाकर पुलिसिया तंत्र की आंखों में लगातार धूल झोंक रहा है। हैरानी की बात यह है कि शारीरिक रूप से अक्षम होने के बावजूद वह इस अवैधानिक नेटवर्क का संचालन बेहद बेफिक्री, धमक और योजनाबद्ध तरीके से कर रहा है।
क्षेत्रीय समाचार पत्रों एवं स्थानीय न्यूज़ चैनलों में इस अवैध कारोबार को लेकर लगातार खबरें उजागर होने के बाद भी बालोद पुलिस की ओर से अब तक कोई ऐसी ठोस या निर्णायक कार्रवाई देखने को नहीं मिली है, जिससे इस सिंडिकेट का पूर्णतः सफाया किया जा सके। प्रशासनिक ढिलाई के कारण इस काले कारोबार में लिप्त असामाजिक तत्वों के हौसले दिनों-दिन बुलंद हो रहे हैं। इसका सीधा दुष्प्रभाव क्षेत्र के माहौल पर पड़ रहा है और स्थानीय युवा पीढ़ी तेजी से अपराध तथा सट्टे की गर्त में धकेली जा रही है।

जनप्रतिनिधि की रहस्मयी चुप्पी से गहराता जन-आक्रोश
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अधिक दुखद और चिंताजनक पहलू वार्ड क्रमांक 20 के कांग्रेस पार्षद रोशन पटेल की भूमिका को माना जा रहा है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नाम पर बसे वार्ड में और अपनी ही आंखों के सामने सट्टे का साम्राज्य फैलते देखने के बावजूद जनप्रतिनिधि द्वारा साधी गई चुप्पी स्थानीय नागरिकों की समझ से परे है।
जब भी इस संवेदनशील विषय पर उनका पक्ष जानने या स्थिति स्पष्ट करने के उद्देश्य से मीडिया अथवा आम नागरिकों द्वारा उनसे संपर्क साधने का प्रयास किया जाता है, तो फोन न उठाना और संवाद से कतराना उनके आचरण पर संदेह को और गहरा कर देता है। जनप्रतिनिधि का यह उपेक्षात्मक और गैर-जिम्मेदाराना रवैया अब वार्डवासियों के बीच तीखे असंतोष का कारण बन चुका है। क्षेत्रवासियों का स्पष्ट कहना है कि एक तरफ गांधी जी का नाम और दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी के पार्षद की यह मौन सहमति — क्या यह किसी अनदेखे दबाव का नतीजा है या फिर कानून का क्रियान्वयन केवल कागजी औपचारिकताओं तक सीमित रह गया है?
ढाल बन रहे नाबालिग, पुलिस के लिए बनी नई चुनौती
दल्ली राजहरा में हाल ही में पुलिस महकमे में हुए बदलाव के बाद अवैध गतिविधियों पर काफी हद तक अंकुश लगा है। नए पुलिस अधीक्षक (एसपी) किरण गंगाराम चव्हाण और दुर्ग रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) अभिषेक शांडिल्य के कुशल मार्गदर्शन में जिले भर में अपराधियों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में दल्ली राजहरा थाने की कमान संभालने वाले कड़क और दबंग छवि के थाना प्रभारी सुनील तिर्की ने पदभार ग्रहण करते ही सटोरियों और असामाजिक तत्वों के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्यवाही शुरू की हैं, जिससे अपराधियों में हड़कंप व्याप्त है।
हालांकि, गांधी चौक में चल रहे सट्टे के इस विशेष नेटवर्क पर लगाम कसना पुलिस के लिए भी एक जटिल चुनौती साबित हो रहा है। बताया जा रहा है कि पुलिस की लगातार हो रही सख्त कार्यवाहियों से घबराकर मुख्य सरगना खिलावन साहू ने कार्यवाही से बचने के लिए एक नया पैंतरा आजमाया है। उसने मोहल्ले के “तीन नाबालिग बच्चों” को ढाल के रूप में सट्टा कारोबार के अग्रिम मोर्चे पर खड़ा कर दिया है। कानूनी प्रक्रियाओं और बाल संरक्षण नियमों की संवेदनशीलता के कारण पुलिस के लिए सीधे तौर पर त्वरित कार्यवाही करना चुनौतीपूर्ण हो रहा है, जिसका फायदा उठाकर यह अवैध सिंडिकेट अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है।
जन-आकांक्षाएं : सिर्फ समझाइश नहीं, सलाखों के पीछे हो जगह
पूर्व में दल्ली राजहरा थाने में पदस्थ रहे कई थाना प्रभारी गांधी चौक के इस अवैध चक्रव्यूह को पूरी तरह ध्वस्त करने में नाकाम रहे। अधिकांश मामलों में आरोपियों पर केवल औपचारिक समझाइश या आंशिक कानूनी धाराओं के तहत कार्यवाही करके छोड़ दिया जाता था, जिससे उनके हौसले कभी पस्त नहीं हुए। लेकिन वर्तमान थाना प्रभारी सुनील तिर्की के सख्त रुख को देखते हुए वार्ड 20 और गांधी चौक के निवासियों में एक नई उम्मीद जगी है।
त्रस्त नागरिकों की प्रशासन से पुरजोर मांग है कि सट्टे के इस संगठित सिंडिकेट को महज कागजी चेतावनी देकर न छोड़ा जाए। जनभावना है कि अवैध सट्टे के मुख्य सूत्रधार खिलावन साहू और उसके सहयोगियों पर कड़े कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर उन्हें सलाखों के पीछे भेजा जाए, ताकि इस सामाजिक बुराई का स्थायी समाधान हो सके।
अब संपूर्ण दल्ली राजहरा शहर की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अपनी कड़क कार्यशैली के लिए जाने जाने वाले थाना प्रभारी सुनील तिर्की किस भावी रणनीति के तहत गांधी चौक के इस अवैध तंत्र का पटाक्षेप करते हैं और कानून का इकबाल बुलंद करते हैं।




