बिलासपुर

कंट्रोल रूम के नाम पर मज़ाक बंद करो! टैक्स हमारा, बजट तुम्हारा… तो फिर बिलासपुर बेसहारा क्यों?…

बिलासपुर। गुरुवार से शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने बिलासपुर प्रशासन और नगर निगम की ‘स्मार्ट प्लानिंग’ की ऐसी पोल खोली है कि पूरा शहर टापू में तब्दील हो गया है। हैरान करने वाली बात यह है कि शहर को यह दुर्दशा प्रकृति (बारिश) ने नहीं, बल्कि टाउन प्लानिंग के नाम पर बैठे भ्रष्टाचार के ‘एजेंटों’ और कागजी अफसरों ने दी है। करोड़ों के बजट पर कुंडली मारकर बैठी व्यवस्था आज जनता को गले तक पानी में डुबोकर खुद तमाशा देख रही है।

करोड़ों का सीवरेज फेल, सिर्फ जेबें भरी गईं! – अखबार के इन आंकड़ों को देखकर किसी भी टैक्सपेयर का खून खौल उठेगा:

  • ₹800 करोड़ स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के नाम पर फूंक दिए गए।
  • ₹390 करोड़ सिर्फ अंडरग्राउंड सीवरेज के नाम पर बहा दिए गए।
  • ₹1300 करोड़ तक पहुंच चुका है नगर निगम का बजट।

सवाल यह है कि इतने हजार करोड़ रुपये आखिर गए कहां? – धरातल की सच्चाई यह है कि करोड़ों की योजनाएं सिर्फ ‘पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन’ (PPT) और अफसरों की फाइलों में ही चमक रही हैं। ग्राउंड जीरो पर अंडरग्राउंड सीवरेज सिस्टम पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है, ड्रेनेज फेल है और नई कॉलोनियों के नाम पर केवल अवैध प्लॉटिंग का खेल चला है।

कलेक्टर-कमिश्नर के बंगलों में घुसा पानी, कंट्रोल रूम के नाम पर मज़ाक – व्यवस्था की लाचारी और ढीठपन का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आम जनता तो दूर, शहर के कर्ता-धर्ता कहे जाने वाले संभाग आयुक्त (कमिश्नर), कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त के सरकारी बंगलों तक में पानी भर गया।

​जब ये बड़े अफसर अपने खुद के आशियाने को जलजमाव से नहीं बचा पा रहे हैं, तो वो पूरे शहर की खाक हिफाजत करेंगे?

​हर साल की तरह इस बार भी प्रशासन ने एक अदद ‘कंट्रोल रूम’ का नंबर जारी करके अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है। मौसम विभाग से कोई तालमेल नहीं, कोई पूर्व तैयारी नहीं—बस आपदा आने पर तमाशा देखना ही इनका सिस्टम बन चुका है।

रेस्क्यू के लिए चल रही नावें, जनता भूखी-अंधेरे में – ​नेताओं के दावों के उलट आज बिलासपुर की कॉलोनियों और बस्तियों में हालात बदतर हैं। लोग डरे हुए हैं, भूखे हैं और अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। जिन सड़कों पर चमचमाती गाड़ियां दौड़नी चाहिए थीं, वहां लोगों को बचाने के लिए नावें चलानी पड़ रही हैं। बड़े-बड़े कॉम्प्लेक्स बनाने की मंजूरियां धड़ल्ले से दी गईं, नियम-कायदे तोड़े गए और जब निगम की टीम कार्रवाई करने पहुंची, तो राजनीतिक रसूखदारों ने उन्हें रोक दिया।

सियासी नूराकुश्ती चालू, जनता बेहाल – ​दिलचस्प बात यह है कि इस शहर को नगरीय प्रशासन विभाग के मंत्री खुद विधायक और प्रभारी मंत्री के रूप में मिले हुए हैं। इसके बावजूद बिलासपुर आज नारकीय स्थिति झेल रहा है। अब सत्तापक्ष और विपक्ष एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप मढ़ने में व्यस्त हैं कि किसके कार्यकाल में अवैध निर्माण हुए।

सीधा सवाल : जिन ज़िम्मेदारों की लापरवाही, कमीशनखोरी और मनमानी की वजह से आज पूरा बिलासपुर डूब रहा है, उनके बड़े-बड़े दावों और वादों के पीछे का असली चेहरा बेनकाब हो चुका है। कागजी ‘रेट्रोफिटिंग’ और ‘री-डेवलपमेंट’ के जुमलों ने जनता को सिर्फ छला है। अब वक्त आ गया है कि इन भ्रष्ट अधिकारियों और सफेदपोशों की जवाबदेही तय की जाए।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!