हसदेव के गहरे पानी में समाई घर के इकलौते चिराग की जिंदगी : सतरेंगा पिकनिक स्पॉट पर दर्दनाक हादसा, 30 घंटे के रेस्क्यू के बाद निकाला गया SECL कर्मी सुभांशु का शव…

कोरबा। छत्तीसगढ़ का मिनी गोवा कहे जाने वाले सतरेंगा जलविहार केंद्र में रविवार को हुआ एक हादसा चीख-पुकार और गहरे मातम में बदल गया। कोरबा के सेंट्रल वर्कशॉप में पदस्थ 24 वर्षीय जांबाज SECL कर्मी सुभांशु ध्रुव की हसदेव नदी के गहरे और खौफनाक पानी में डूबने से मौत हो गई। नगर सेना की रेस्क्यू टीम ने सोमवार की ढलती शाम को, लगभग 30 घंटे की रूह कंपा देने वाली मशक्कत के बाद, युवक की लाश को पानी की गहराइयों से ढूंढ निकाला। इस घटना ने न केवल पर्यटन स्थल की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि एक हंसते-खेलते परिवार को कभी न भूलने वाला जख्म दे दिया है।

रोमांच की सनक या मौत का बुलावा? टापू की ओर बढ़ते ही खिंच गई काल की रेखा – प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, रविवार की छुट्टी का आनंद लेने सुभांशु अपने पांच जिगरी दोस्तों के साथ सतरेंगा पहुंचा था। चारों तरफ बिखरी प्राकृतिक खूबसूरती के बीच, दोस्तों की टोली ने नदी के बीचो-बीच स्थित एक प्राकृतिक टापू (आइलैंड) तक पैदल पार करने का दुस्साहस भरा फैसला किया।
नदी के उथले पानी से होते हुए सभी आगे बढ़ रहे थे, लेकिन तभी अचानक पानी का स्तर और नीचे की जमीन का ढलान अनियंत्रित होने लगा। खतरे की घंटी को भांपते हुए सुभांशु ने बीच मझधार से ही कदम पीछे खींचने और वापस किनारे लौटने का बुद्धिमानी भरा फैसला किया। मगर अफसोस, जैसे ही वह पीछे मुड़ा, उसका पैर नदी के एक गहरे गड्ढे में चला गया। पानी के तेज अंतःप्रवाह (undercurrent) ने उसे संभलने का मौका तक नहीं दिया और वह देखते ही देखते दोस्तों की नजरों के सामने ओझल हो गया।
चीख-पुकार, ग्रामीणों की जांबाजी और थमा हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन – सुभांशु को डूबता देख किनारे और पानी में मौजूद दोस्तों ने शोर मचाना शुरू किया। आवाज सुनकर स्थानीय नाविक और ग्रामीण तुरंत पानी में कूदे। उन्होंने अपने स्तर पर सुभांशु को तलाशने की हर संभव कोशिश की, लेकिन हसदेव का वह कोना बेहद गहरा और खतरनाक था।
घटना की भयावहता को देखते हुए तत्काल श्यांग पुलिस और लेमरु थाना को सूचित किया गया। पुलिस बल मौके पर पहुंचा, लेकिन तब तक सूरज ढल चुका था। रविवार की काली रात, पानी का तेज बहाव और नीचे का घुप्प अंधेरा रेस्क्यू टीम के आड़े आ गया, जिसके कारण भारी मन से रविवार रात को ऑपरेशन रोकना पड़ा। पूरे रविवार की रात सुभांशु के दोस्त और परिजन किनारे पर बैठकर टकटकी लगाए पानी को निहारते रहे।
सोमवार की सुबह : नगर सेना का महा-अभियान और मिला शव – सोमवार की सुबह होते ही नगर सेना (Home Guard) की पेशेवर गोताखोरों और रेस्क्यू टीम ने आधुनिक उपकरणों के साथ जल-सत्याग्रह शुरू किया। बोट्स, लाइफ जैकेट्स और गहरे पानी के कैमरों की मदद से चप्पा-चप्पा छाना गया। दोपहर से शाम हो गई, और आखिरकार सोमवार देर शाम को सुभांशु का निष्प्राण शरीर पानी के ऊपर लाया जा सका। शव को देखते ही वहां मौजूद परिजनों के सब्र का बांध टूट गया और पूरा सतरेंगा तट चीत्कारों से गूंज उठा।
नियति का सबसे क्रूर मजाक : चार साल में उजड़ गई मां की दुनिया – यह हादसा सिर्फ एक जान जाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक मां की जीती-जागती दुनिया के पूरी तरह तबाह होने की दास्तान है। सुभांशु के परिवार की पृष्ठभूमि भावुक और झकझोर देने वाली है :
- पिता का साया पहले ही उठा : ठीक चार साल पहले सुभांशु के पिता का आकस्मिक निधन हो गया था, जिससे परिवार आर्थिक और मानसिक रूप से टूट गया था।
- अनुकंपा से मिली थी संजीवनी : पिता की मौत के बाद, सुभांशु को अनुकंपा नियुक्ति के तहत SECL (साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड) में नौकरी मिली। वह पिछले ढाई साल से कोरबा क्षेत्र के सेंट्रल वर्कशॉप में पूरी लगन से काम कर रहा था।
- अकेला सहारा था सुभांशु : पिता के जाने के बाद सुभांशु ही अपनी बूढ़ी मां और परिवार का इकलौता कमाऊ बेटा और आखिरी उम्मीद था।
बड़ा सवाल : जो बेटा चार साल पहले उजड़े परिवार को संभालने के लिए लाठी बना था, आज उसी की जलसमाधि ने बूढ़ी मां को ताउम्र का रोना दे दिया है।
प्रशासनिक कार्रवाई और सुरक्षा पर सुलगते सवाल – पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवा दिया है और मर्ग कायम कर वैधानिक जांच शुरू कर दी है। लेकिन इस हादसे ने कोरबा प्रशासन और पर्यटन विभाग के दावों पर कई तीखे सवाल दाग दिए हैं:
- क्या सतरेंगा के खतरनाक और गहरे रिस्की पॉइंट्स पर ‘खतरा’ बताने वाले चेतावनी बोर्ड क्यों नहीं लगाए गए थे?
- वीकेंड (रविवार) पर जब हजारों सैलानी आते हैं, तो टापू की ओर जाने वाले प्रतिबंधित रास्तों पर सुरक्षाकर्मियों या गाइडों की तैनाती क्यों नहीं थी?
सुभांशु की असमय मौत ने एक बार फिर सैलानियों को आगाह किया है कि पानी की लहरों के साथ किया गया जरा सा भी मजाक सीधे मौत के घाट उतार सकता है।




