सूरजपुर

पीएचई ठेकेदार संघ ने स्वर्गीय गणेश्वर जंघेल को दी श्रद्धांजलि, लंबित बिलों के निपटारे के लिए कार्यपालन अभियंता को सौंपा ज्ञापन…

सूरजपुर। सरकारी फाइलों की धीमी चाल और सिस्टम की बेरुखी अब लोगों की जान लेने लगी है। खैरागढ़ के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग के ठेकेदार गणेश्वर जंघेल की आत्महत्या महज एक घटना नहीं, बल्कि एक भ्रष्ट और सुस्त व्यवस्था के मुंह पर करारा तमाचा है। लंबित भुगतानों के बोझ तले दबकर सोमवार (29 जून) को जंघेल द्वारा मौत को गले लगाने के बाद अब पूरे प्रदेश के पीएचई ठेकेदारों के भीतर ज्वालामुखी भड़क उठा है।

​इसी कड़ी में सूरजपुर जिले के पीएचई ठेकेदार संघ ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। स्वर्गीय जंघेल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ठेकेदारों ने जो मौन धरना दिया, उसकी गूंज सत्ता के गलियारों तक जरूर पहुंचनी चाहिए।

सरकार से सीधा सवाल : और कितनी जान चाहिए? – धरना प्रदर्शन के दौरान ठेकेदारों का गुस्सा साफ झलक रहा था। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि लगातार भुगतान में ऐसे ही देरी होती रही, तो यह आत्महत्या का आखिरी मामला नहीं होगा। मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना का जो खेल सिस्टम खेल रहा है, वह अन्य ठेकेदारों को भी खौफनाक कदम उठाने पर मजबूर कर रहा है। संघ ने शासन को चेतावनी दी है कि इस मामले को हल्के में लेना सरकार को भारी पड़ सकता है।

क्या हैं ठेकेदारों की प्रमुख मांगें? – ठेकेदार संघ ने अपनी मांगों को लेकर साफ कर दिया है कि अब केवल कोरे आश्वासनों से काम नहीं चलेगा:

  • तुरंत भुगतान : महीनों से अटके बिलों का बिना किसी देरी के तत्काल निपटारा किया जाए।
  • प्रक्रियाओं का सरलीकरण : लालफीताशाही बंद हो और विभागीय प्रक्रियाओं को आसान बनाया जाए ताकि ठेकेदारों का शोषण रुके।

ठप पड़ा विकास, मजदूरों के पेट पर लात – इस आर्थिक नाकेबंदी का असर सिर्फ ठेकेदारों पर ही नहीं, बल्कि प्रदेश के विकास कार्यों पर भी पड़ रहा है। पूंजी के अभाव में निर्माण और रखरखाव कार्य पूरी तरह से चरमरा गए हैं।

“जब जेब में पैसा ही नहीं है, तो न निर्माण सामग्री खरीदी जा सकती है और न ही मजदूरों का पेट भरा जा सकता है। सरकार की अनदेखी से विकास की रफ्तार पर ब्रेक लग चुका है।” – प्रदर्शनकारी ठेकेदार

अल्टीमेटम : मांगें नहीं मानी तो पूरे प्रदेश में मचेगा हाहाकार – धरना प्रदर्शन के बाद आक्रोशित पीएचई ठेकेदार संघ ने कार्यपालन अभियंता (EE) को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। संघ ने स्पष्ट और कड़ी चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर तत्काल और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो यह चिंगारी पूरे प्रदेश में फैलेगी और एक उग्र राज्यव्यापी आंदोलन का रूप लेगी।

अब देखना यह है कि एक ठेकेदार की जान जाने के बाद क्या कुंभकर्णी नींद में सोए इस सिस्टम की आंखें खुलेंगी, या फाइलों के नीचे और भी जिंदगियां दबने का इंतजार किया जाएगा?

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!