सीतापुर गैंगरेप कांड : सुलग उठा अंबिकापुर, सरकार के ‘बेटी बचाओ’ नारे पर कांग्रेस का तीखा प्रहार…

अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग अंतर्गत सीतापुर थाना क्षेत्र में 23-24 की दरमियानी रात हुई सामूहिक दुष्कर्म की जघन्य वारदात ने न केवल मानवीय संवेदनाओं को झकझोर दिया है, बल्कि प्रदेश के सियासी गलियारों में भी उबाल ला दिया है। इस मामले में अब सीधे तौर पर सरकार और प्रशासन की साख दांव पर लग गई है।
पीड़ित परिवार से मिलीं जरिता लैतफलांग; सिस्टम को घेरा – घटना की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस के उच्चस्तरीय जांच दल ने शनिवार को पीड़ित परिवार से मुलाकात की। इस दौरान छत्तीसगढ़ कांग्रेस की सह-प्रभारी जरिता लैतफलांग विशेष रूप से मौजूद रहीं। पीड़ित परिवार के आंसू देख भावुक हुई लैतफलांग ने उन्हें ढांढस बंधाया और न्याय के लिए अंतिम सांस तक लड़ने का संकल्प दोहराया।
लैतफलांग ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा :
”जो सरकार ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का ढिंढोरा पीटती है, उसी के राज में बेटियां अपने घर और गलियों में सुरक्षित नहीं हैं। यह घटना कानून-व्यवस्था के पूरी तरह ध्वस्त होने का प्रमाण है।”
MLC रिपोर्ट और प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल – कांग्रेस जांच दल ने इस पूरे मामले में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा किया है। नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन मामले को ‘ठंडे बस्ते’ में डालने और लीपापोती करने की कोशिश कर रहा है।
- संदिग्ध भूमिका : कांग्रेस ने आरोप लगाया कि शुरुआती कार्रवाई में जानबूझकर देरी की गई ताकि साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की जा सके।
- MLC रिपोर्ट पर संशय : जांच दल ने मेडिकल लीगल सर्टिफिकेट (MLC) की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की है।
- पारदर्शिता का अभाव : नेताओं का दावा है कि प्रशासन मामले को दबाने का प्रयास कर रहा था, जिससे पीड़िता को समय पर न्याय मिलना मुश्किल हो गया है।
“न्याय नहीं मिला, तो होगा बड़ा आंदोलन” – सीतापुर की इस घटना ने पूरे इलाके में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि दोषियों को फांसी के फंदे तक नहीं पहुँचाया गया और पीड़ित परिवार को उचित सुरक्षा व मुआवजा नहीं मिला, तो पूरी कांग्रेस पार्टी सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगी।
एक तरफ जहां सीतापुर पुलिस आरोपियों पर कार्रवाई का दावा कर रही है, वहीं विपक्ष के तीखे सवालों ने प्रशासन को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है। अब देखना यह है कि क्या सत्ता और सियासत के इस शोर के बीच पीड़िता को वास्तविक न्याय मिल पाएगा?




