
फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद/डोंडीलोहारा। पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजगता और गांव के कल्याण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने वाले जिले के डोंडीलोहारा तहसील अंतर्गत जी आम कोचेरा के वरिष्ठ नागरिक गुल्लू राम ठाकुर ने अपने आवास के पास जामुन और कटहल के कई पौधे रोपकर एक सकारात्मक पहल की है। 83 वर्षीय गुल्लू राम ठाकुर, जो मरोदा भिलाई के पूर्व पार्षद रह चुके हैं और बीआरपी (एचईसीएल) से सेवानिवृत्त हैं, ने स्थानीय लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का संदेश दे रहे है।

कोचेरा गांव के वरिष्ठ नागरिक और समाजसेवी गुल्लू राम ठाकुर ने हाल ही में अपने घर के आसपास और सार्वजनिक स्थलों पर जामुन व कटहल के पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। ठाकुर ने बताया कि पेड़ों का रोपण केवल गांव की हरियाली बढ़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ हवा और ठंडी छाया सुनिश्चित करने का भी जरिया है। उन्होंने कहा, “आज की बदलती जलवायु में पेड़ों की अहमियत पहले से कही अधिक हो गई है। हमें अपने प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करनी होगी।”
उन्होंने अंधाधुंध कटाई पर गहरी चिंता व्यक्त की और कहा कि लगातार पेड़ों की अवैध कटाई से स्थानीय तापमान बढ़ रहा है तथा पर्यावरणीय असंतुलन पैदा हो रहा है। उनका मानना है कि बढ़ती गर्मी और प्रदूषण का मुख्य कारण मानवीय गतिविधियाँ और पेड़ों की कमी है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे अवैध या अनियोजित कटाई के विरोध में आगे आएँ और हर परिवार कम से कम एक पेड़ जरूर लगाए।

गांव के लोगों ने ठाकुर की पहल की खुलकर प्रशंसा की। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी सक्रिय भागीदारी और लंबे समय से चली आ रही सार्वजनिक सेवा की वजह से वे एक प्रेरणास्त्रोत बन गए हैं। स्थानीय सरपंच और कई युवा स्वयंसेवकों ने भी उनके साथ मिलकर पौधारोपण में हाथ बँटाया। वहीं कुछ ग्रामीणों ने सुझाव दिया कि भविष्य में सामूहिक पौधारोपण व वृक्ष संरक्षण के लिए संबंधी अधिकारियों से सहयोग मांगा जाए और पौधों की नियमित देखभाल हेतु एक स्थानीय समिति बनाई जाए।
उन्होंने कहा कि सरकार और समाज दोनों को मिलकर ठोस कदम उठाने होंगे ताकि पेड़ों को संरक्षित रखा जा सके और नई पीढ़ी के लिए बेहतर पर्यावरण सुनिश्चित हो। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्कूलों में पर्यावरण शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए ताकि बच्चे भी पौधारोपण और पेड़ों के महत्व को समझें। स्थानीय पर्यावरणविदों ने यह उल्लेख किया कि ऐसे व्यक्तिगत और सामुदायिक प्रयासों से ही दीर्घकालिक परिवर्तन सम्भव है। गुल्लू राम ठाकुर की पहल न केवल कोचेरा गाँव में, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का काम कर रही है।




