छत्तीसगढ़

खाकी पर ‘हत्या’ और ‘वसूली’ का दाग! रायगढ़ में बंदी की संदिग्ध मौत पर मचा बवाल, कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा…

रायगढ़। क्या खाकी वर्दी रक्षक से भक्षक बन चुकी है? क्या पुलिस कस्टडी में किसी की जान की कीमत महज 40 हजार रुपये है? ये वो सुलगते हुए सवाल हैं, जो रायगढ़ जेल में विचाराधीन बंदी संजय बघेल की संदिग्ध मौत के बाद उठ रहे हैं। पुलिस की कथित क्रूरता और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी इस घटना ने अब एक बड़े सियासी तूफान का रूप ले लिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) ने सरकार को घेरने के लिए एक 5 सदस्यीय हाई-प्रोफाइल जांच दल का गठन कर दिया है।

कस्टडी में मौत या खाकी का खूनी खेल? – मामला कोतरा रोड थाना क्षेत्र के नवापारा का है। 10 जून को पुलिस ने संजय बघेल नामक युवक को कथित रूप से अवैध शराब के आरोप में हिरासत में लिया और जेल भेज दिया। लेकिन महज 3 दिन बाद, 13 जून को अस्पताल में इलाज के दौरान संजय की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई। मौत की खबर आते ही परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने पुलिस पर जो आरोप लगाए, उसने पूरे महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

परिजनों का सनसनीखेज आरोप: “पिटाई से ली जान, 40 हजार लेकर छोड़ा दूसरा आरोपी” – मृतक के परिजनों ने सिर्फ पुलिसिया बर्बरता का ही रोना नहीं रोया, बल्कि भ्रष्टाचार का एक गंभीर बम भी फोड़ा है। परिजनों का सीधा आरोप है कि:

  • ​संजय बघेल की मौत बीमारी से नहीं, बल्कि पुलिस की अमानवीय और बर्बर पिटाई से हुई है।
  • ​गिरफ्तारी के वक्त संजय के साथ एक अन्य युवक भी था, जिसे पुलिस ने कथित तौर पर 40 हजार रुपये की मोटी घूस लेकर रफा-दफा कर दिया।
  • ​इन संगीन आरोपों के साथ परिजनों ने सड़क पर उतरकर जमकर प्रदर्शन किया है।

पुलिस का बचाव और दावों में झोल! – खुद को घिरता देख पुलिस प्रशासन डैमेज कंट्रोल में जुट गया है। नियमतः मामले की न्यायिक जांच शुरू कर दी गई है और सीजेएम (CJM) की मौजूदगी में मृतक का पोस्टमार्टम कराया गया है, जिसकी प्रारंभिक रिपोर्ट का इंतज़ार है।

  • पुलिस का दावा : सूत्रों के जरिए पुलिस यह साबित करने में जुटी है कि मारपीट जैसी कोई घटना नहीं हुई। दावा है कि संजय 4 घंटे थाने में था और पूरे समय का सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित है। पुलिस मृतक को आदतन अवैध शराब कारोबारी भी बता रही है।
  • लेकिन एक्शन कुछ और कहता है : अगर पुलिस पूरी तरह पाक-साफ है, तो फिर दो पुलिसकर्मियों को ‘लाइन अटैच’ क्यों किया गया? इस पर एसपी शशिमोहन सिंह की दलील है कि “जांच दूषित न लगे, इसलिए दोनों को थाने से हटाया गया है।”

सियासी भूचाल : कांग्रेस ने दिखाई आक्रामकता – एक विचाराधीन बंदी की मौत और परिजनों के घूसखोरी के आरोपों ने कांग्रेस को बैठे-बिठाए एक बड़ा हथियार दे दिया है। पीसीसी चीफ दीपक बैज के कड़े निर्देशों के बाद प्रभारी महामंत्री संगठन मलकीत सिंह गेंदू ने एक पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन कर दिया है, जो इस पूरे पुलिसिया खेल की तह तक जाएगी।

ये है कांग्रेस की ‘फैक्ट फाइंडिंग’ टीम :

  • चातुरी नंद (विधायक, सरायपाली) – संयोजक
  • विद्यावती सिदार (विधायक, लैलूंगा) – सदस्य
  • कविता प्राणलहरे (विधायक, बिलाईगढ़) – सदस्य
  • शेषराज हरबंश (विधायक, पामगढ़) – सदस्य
  • नागेंद्र नेगी और शाखा यादव (रायगढ़ ग्रामीण व शहर जिला अध्यक्ष) – सदस्य

आगे क्या? – अब सवाल यह है कि क्या सीजेएम की मौजूदगी में हुआ पोस्टमार्टम सच को सामने ला पाएगा? क्या पुलिस के ‘सीसीटीवी फुटेज’ के दावों में दम है, या यह महकमे को बचाने की एक ढाल मात्र है? कांग्रेस की इस जांच समिति के मैदान में उतरने के बाद यह तय है कि रायगढ़ में पुलिस प्रशासन को आने वाले दिनों में और भी तीखे सवालों का सामना करना पड़ेगा।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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