कलेक्टर के कड़े तेवर : कैंसर पीड़ित शिक्षिका की फाइल दबाने वाले बाबू पर गिरी गाज, 10 दिन में मिला इलाज का पैसा…

रायपुर। जब सिस्टम संवेदनहीन हो जाए, तो एक पीड़ित के लिए उम्मीद की किरण धुंधली पड़ने लगती है। लेकिन रायपुर में इसके उलट मानवता और न्याय की एक ऐसी मिसाल पेश की गई, जिसने लापरवाह कर्मचारियों को कड़ा संदेश दिया है। कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रही एक महिला व्याख्याता के इलाज की राशि रोकने वाले बाबू को जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
फाइल दबी रही, दर्द बढ़ता गया : पीड़ित महिला व्याख्याता ने अपनी चिकित्सा प्रतिपूर्ति (Medical Reimbursement) के लिए स्कूल में आवेदन दिया था। नियमतः इस फाइल को उच्च कार्यालय भेजा जाना था, ताकि इलाज के लिए राशि मिल सके। लेकिन स्कूल के सहायक ग्रेड-03 (बाबू) ने फाइल को दबाए रखा। आर्थिक तंगी और बीमारी की दोहरी मार झेल रही शिक्षिका ने हार नहीं मानी और सीधे कलेक्टर गौरव सिंह की चौखट पर दस्तक दी।
कलेक्टर का एक्शन, 10 दिन में समाधान : कलेक्टर गौरव सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे ‘प्राथमिकता’ पर लिया। उनके निर्देश मिलते ही रायपुर DEO हिमांशु भारतीय सक्रिय हुए। परिणाम यह हुआ कि:
- महज 10 दिनों के भीतर उच्च कार्यालय से लगभग 2 लाख रुपये की राशि आवंटित करा दी गई।
- संचालनालय से राशि प्राप्त होते ही इसे संबंधित आहरण संवितरण अधिकारी (DDO) को जारी कर दिया गया।
लापरवाही पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ – विभाग ने केवल राशि ही आवंटित नहीं की, बल्कि सिस्टम की सुस्ती पर कड़ा प्रहार भी किया:
- बाबू निलंबित : आवेदन को उच्च कार्यालय न भेजने वाले सहायक ग्रेड-03 को छग सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के उल्लंघन के मामले में तत्काल निलंबित कर दिया गया है। उसे धरसींवा ब्लॉक में अटैच किया गया है।
- प्राचार्य को नोटिस : इस पूरी लापरवाही के लिए संबंधित स्कूल के प्राचार्य को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
“अनुशासनहीनता और मानवीय संवेदनाओं में लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कलेक्टर महोदय के निर्देशानुसार पीड़ित शिक्षिका को 2 दिनों के भीतर संचालनालय से राशि आवंटित कराकर राहत पहुंचाई गई है।”
हिमांशु भारतीय, जिला शिक्षा अधिकारी, रायपुर
खबर का सार : ‘सिस्टम’ से बड़ी ‘इंसानियत’ – यह वाकया उन सरकारी दफ्तरों के लिए सबक है जहाँ फाइलें धूल फांकती रहती हैं। रायपुर प्रशासन ने यह साबित कर दिया कि यदि नेतृत्व में इच्छाशक्ति हो, तो ‘लालफीताशाही’ को चंद घंटों में खत्म कर आम जनता को ‘वरदान’ जैसा सुकून दिया जा सकता है।




