बस्तर

बस्तर हेरिटेज मैराथन में ‘शॉर्टकट’ से जीत की साजिश : पसीने की जगह ‘पहियों’ का सहारा, CCTV ने खोला फर्जीवाड़े का राज…

जगदलपुर। बस्तर की वादियों में खेल भावना और शारीरिक क्षमता के प्रदर्शन के लिए आयोजित ‘Heritage Marathon’ अब एक शर्मनाक विवाद के घेरे में है। जिस फिनिश लाइन तक पहुँचने के लिए धावक अपनी आखिरी सांस तक झोंक देते हैं, वहाँ कुछ प्रतिभागियों ने ‘धोखे की दौड़’ लगाकर मेडल हासिल करने की कोशिश की। 42 किलोमीटर की इस अग्निपरीक्षा में पसीना बहाने के बजाय टाटा सूमो का सहारा लेने वाली दो महिला धावकों का सच अब बेनकाब हो चुका है।

ईमानदारी हारी, ‘गाड़ी’ जीती? – 22 मार्च को आयोजित इस मेगा इवेंट में हजारों धावकों ने हिस्सा लिया था। विवाद तब गहराया जब लोहंडीगुड़ा की धावक प्रमिला मंडावी ने खेल भावना का परिचय देते हुए प्रशासन से लिखित शिकायत की। प्रमिला का आरोप था कि दूसरे और तीसरे स्थान पर आने वाली नेहा और कौशल्या नेताम ने पूरी दौड़ अपने पैरों पर नहीं, बल्कि चार पहिया वाहन के अंदर बैठकर पूरी की है।

CCTV ने उतारा ‘जीत’ का नकाब – शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जब प्रशासन ने मैराथन रूट पर लगे CCTV कैमरों की जांच की, तो नजारा चौंकाने वाला था। फुटेज में साफ देखा गया कि:

  • ​दोनों प्रतिभागी दौड़ के बीच के एक लंबे हिस्से में एक सूमो वाहन में सवार थीं।
  • ​फिनिश लाइन से कुछ दूरी पहले वे चतुराई से गाड़ी से उतरीं।
  • ​अंतिम क्षणों में थकावट का नाटक करते हुए उन्होंने दौड़ पूरी की और विजेता बनकर मंच पर वाहवाही लूटी।

यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं के सपनों और मेहनत का अपमान है जो ईमानदारी से मैदान में उतरे थे।”खेल प्रेमियों की प्रतिक्रिया

प्रशासन का कड़ा प्रहार: छीने गए खिताब – जांच में धोखाधड़ी की पुष्टि होते ही जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है।

  • अयोग्य घोषित : नेहा और कौशल्या नेताम को तत्काल प्रभाव से विजेताओं की सूची से बाहर कर दिया गया है।
  • संशोधित सूची : प्रशासन को टॉप-10 की नई सूची जारी करनी पड़ी है, ताकि वास्तविक हकदारों को उनका सम्मान मिल सके।
  • ब्लैकलिस्ट की तैयारी : सूत्रों के अनुसार, भविष्य में होने वाले आयोजनों के लिए ऐसे प्रतिभागियों पर प्रतिबंध लगाने पर भी विचार किया जा रहा है।

आयोजन की साख पर लगा दाग – बस्तर हेरिटेज मैराथन का उद्देश्य क्षेत्र की संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा देना था, लेकिन इस ‘कार-कांड’ ने आयोजन की व्यवस्थाओं पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि रूट पर मौजूद वॉलिंटियर्स और चेकपॉइंट्स पर तैनात टीम की नजरों से यह फर्जीवाड़ा कैसे बच गया?

​यह घटना उन सभी खिलाड़ियों के लिए एक सबक है जो सफलता के लिए शॉर्टकट खोजते हैं। खेल के मैदान में जीत उसी की होती है जिसका हौसला मजबूत हो, उसकी नहीं जिसके पास ‘गाड़ी की चाबी’ हो।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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