बाकारुमा स्कूल में ‘तिलक’ पर तकरार : शिक्षिका पर धर्म और ब्राह्मण समाज के अपमान का आरोप, कार्रवाई न होने से आक्रोश…

रायगढ़। शिक्षा के मंदिर में एक छात्र की धार्मिक आस्था को ठेस पहुँचाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बाकारुमा में कक्षा 9वीं के छात्र ने अपनी हिंदी शिक्षिका पर तिलक लगाने को लेकर अभद्र टिप्पणी करने और सनातन परंपराओं का मजाक उड़ाने का गंभीर आरोप लगाया है। घटना के हफ़्तों बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से छात्र के परिजनों और स्थानीय समाज में भारी नाराजगी है।

“पूजा-पाठ और तिलक सिर्फ दक्षिणा के लिए…” – पीड़ित छात्र योगेश शर्मा (कक्षा 9वीं ‘बी’) के अनुसार, यह घटना 23 फरवरी की है। छात्र का आरोप है कि कक्षा में पढ़ाई के दौरान शिक्षिका सोसेन तिर्की ने उसके माथे पर लगे तिलक को देखकर न केवल आपत्तिजनक टिप्पणी की, बल्कि ब्राह्मण समाज को ‘ढोंगी’ तक कह डाला। छात्र ने बताया :
“मैडम ने कहा कि तुम ब्राह्मण लोग माथे पर बड़ा तिलक और पूजा-पाठ केवल दक्षिणा के लिए करते हो। तुम्हारा समाज और धर्म ढोंग करता है।”
जब छात्र ने इस पर विनम्रता से आपत्ति जताई, तो आरोप है कि शिक्षिका ने अपनी बात और जोर देकर दोहराई, जिससे छात्र मानसिक रूप से आहत हो गया।
समझौते के नाम पर ‘खेल’ का आरोप – मामला तब और पेचीदा हो गया जब छात्र के पिता विद्यालय पहुँचे। परिजनों का आरोप है कि शिक्षिका ने पहले तो घटना से साफ इनकार कर दिया, लेकिन बाद में आनन-फानन में एक सहमति पत्र (समझौता) तैयार कर लिया गया।
- पिता का तर्क : छात्र के पिता का कहना है कि वे कम पढ़े-लिखे हैं और स्वास्थ्य खराब होने के कारण दबाव में आकर हस्ताक्षर कर दिए।
- सवाल : परिजनों ने तीखा सवाल उठाया है कि – “यदि शिक्षिका ने कुछ गलत नहीं कहा था, तो स्कूल प्रबंधन को समझौता पत्र लिखवाने की जरूरत क्यों पड़ी?”
गवाहों की पुष्टि, फिर भी प्रशासन मौन? – कक्षा में मौजूद अन्य सहपाठियों ने भी इस विवादित घटनाक्रम की पुष्टि की है। छात्र ने प्राचार्य को लिखित शिकायत दी और विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) को भी फोन पर सूचना दी। इसके बावजूद, अब तक शिक्षिका के विरुद्ध कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे विद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
मुख्य बिंदु जो प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हैं :
- धार्मिक स्वतंत्रता का हनन : क्या एक शिक्षिका को छात्र की व्यक्तिगत आस्था और तिलक लगाने पर टिप्पणी करने का अधिकार है?
- जांच में देरी : शिकायत के इतने दिनों बाद भी विभाग ने मामले को ठंडे बस्ते में क्यों डाल रखा है?
- दबाव की राजनीति : क्या गरीब और कम पढ़े-लिखे परिजनों को गुमराह कर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की जा रही है?
परिजनों की चेतावनी : छात्र के परिवार ने स्पष्ट किया है कि यदि सनातन धर्म और समाज का अपमान करने वाली शिक्षिका पर जल्द ही न्यायोचित कार्रवाई नहीं हुई, तो वे जिला प्रशासन और कलेक्टर के पास गुहार लगाएंगे। फिलहाल, बाकारुमा क्षेत्र में यह मामला चर्चा का केंद्र बना हुआ है और लोग शिक्षा विभाग के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं।




