अदालती फैसले के बाद उबाल पर कुर्मी समाज : ‘पटेल संस्थान’ की जमीन पर कब्जे और स्कूल संचालन के खिलाफ आर-पार की जंग…

कोरबा/बिलासपुर। न्याय की चौखट से मिली बड़ी जीत ने कोरबा के बहुचर्चित भूमि विवाद में बारूद भरने का काम किया है। राजस्व मंडल (09 फरवरी 2026) और छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय (20 अप्रैल 2026) द्वारा कुर्मी क्षत्रिय समाज के पक्ष में मुहर लगाए जाने के बाद अब समाज ने ‘आक्रामक’ रुख अख्तियार कर लिया है। बरसों के कानूनी वनवास के बाद अब समाज अपनी जमीन पर खड़े ‘अवैध’ साम्राज्य को उखाड़ फेंकने के लिए प्रशासन को अल्टीमेटम दे चुका है।

शिक्षा की आड़ में ‘अवैध’ किला? – कुर्मी क्षत्रिय समाज के अध्यक्ष आर.के. वर्मा ने सीधे तौर पर “बिलियन पब्लिक स्कूल” के संचालन पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा किया है। समाज का आरोप है कि जिस जमीन पर सरदार वल्लभभाई पटेल की स्मृतियां जुड़नी थी, वहां बिना पुख्ता वैधानिक अनुमति के स्कूल कैसे फल-फूल रहा है? यह प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा तमाचा है।

आरोपों की झड़ी : भारी वाहन, अवैध निर्माण और टूटे नियम – समाज ने केवल जमीन की मांग नहीं की है, बल्कि परिसर के भीतर चल रही गतिविधियों का कच्चा चिट्ठा खोल दिया है:
- सुरक्षा से खिलवाड़ : स्कूल परिसर में दिन-रात खड़े होने वाले भारी वाहन और बसों ने सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ा रखी हैं।
- नियम विरुद्ध निर्माण : बिना किसी वैधानिक स्वीकृति के विशालकाय भवन का खड़ा होना, प्रशासनिक मिलीभगत की ओर इशारा कर रहा है।
- रास्ते का ‘अतिक्रमण’ : नियमों को ताक पर रखकर गेट तोड़कर नया रास्ता बनाना समाज की संप्रभुता को चुनौती देने जैसा बताया जा रहा है।
आस्था और महापुरुषों का अपमान : सुलगता आक्रोश – इस विवाद ने तब भावनात्मक मोड़ ले लिया जब समाज ने आरोप लगाया कि परिसर में स्थापित बजरंग बली की मूर्ति और लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा को क्षति पहुंचाई गई है। 1985 से जिस स्थान पर डॉ. खूबचंद बघेल और छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंतियां गूंजती थीं, वहां महापुरुषों के अपमान ने कुर्मी समाज के धैर्य का बांध तोड़ दिया है।
प्रशासन के लिए ‘अग्निपरीक्षा’ – राजस्व मंडल के आदेश (प्रकरण क्रमांक आर.एन./10/आर/अ-70/222/2016) ने पहले ही निचली अदालतों के फैसलों को ‘विधि विरुद्ध’ बताकर निरस्त कर दिया था। अब हाईकोर्ट की मुहर के बाद प्रशासन के पास बचने का कोई रास्ता नहीं है।
समाज की दो टूक: “यह जमीन केवल मिट्टी का टुकड़ा नहीं, हमारी सांस्कृतिक विरासत है। यदि प्रशासन ने तत्काल ‘सरदार वल्लभभाई पटेल स्मृति संस्थान’ को कब्जा नहीं सौंपा, तो यह कानूनी लड़ाई अब सड़कों पर ‘जन-आंदोलन’ का रूप लेगी।”
कानूनी लड़ाई तो समाज ने जीत ली है, लेकिन क्या प्रशासन रसूखदारों के चंगुल से इस जमीन को मुक्त करा पाएगा? बिलासपुर से कोरबा तक सबकी निगाहें अब कलेक्ट्रेट की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि ‘बिलियन पब्लिक स्कूल’ के प्रबंधन और अवैध कब्जेदारों पर बुलडोजर चलता है या फाइलें फिर से ठंडे बस्ते में डाल दी जाती हैं।




