रायगढ़ की ख़ाकी पर लगा ‘कस्टोडियल डेथ’ का कलंक : खरसिया थाना क्षेत्र के परसकोल मामले में संदिग्ध रमेश चौहान की मौत, पुलिसिया टॉर्चर के आरोपों से गहराया मामला…

रायगढ़। क्या रायगढ़ पुलिस अब ‘जांच’ के नाम पर ‘जान’ लेने पर उतारू है? खरसिया थाना क्षेत्र के परसकोल हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने का दावा करने वाली पुलिस के हाथों पर अब रमेश चौहान के खून के छींटे हैं। पुलिस कस्टडी में युवक की मौत ने रायगढ़ जिला प्रशासन और खरसिया पुलिस की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
‘थर्ड डिग्री’ का खौफनाक चेहरा : लकवाग्रस्त शरीर और सिर में खून के थक्के – परसकोल मामले में संदिग्ध मानकर उठाए गए रमेश चौहान के साथ खरसिया पुलिस ने पूछताछ के नाम पर जो ‘हैवानियत’ की, उसकी तस्दीक खुद मेडिकल रिपोर्ट कर रही है। परिजनों का आरोप है कि पुलिसिया टॉर्चर इस कदर बर्बर था कि रमेश के शरीर का एक हिस्सा पैरालाइज (लकवाग्रस्त) हो गया।
सिटी स्कैन की रिपोर्ट ने पुलिस के झूठ की कलई खोल दी है – रमेश के सिर के अंदर खून का भारी थक्का (Blood Clot) जमा मिला। यह किसी सामान्य बीमारी का नहीं, बल्कि सिर पर किए गए प्राणघातक प्रहार का सीधा सबूत है।
खरसिया से रायपुर : इलाज नहीं, ‘गुनाह’ छिपाने की कोशिश? – परिजनों का कहना है कि जब खरसिया पुलिस की पिटाई से रमेश की हालत मरणासन्न हो गई, तब आनन-फानन में उसे अस्पताल भेजा गया। खरसिया से रायगढ़ मेडिकल कॉलेज और फिर वहां से रायपुर रेफर करने का यह लंबा सफर रमेश के लिए ‘मौत का सफर’ साबित हुआ। गुरुवार तड़के करीब 3:30 बजे रायपुर के अस्पताल में उसकी सांसें थम गईं।
रायगढ़ पुलिस की रहस्यमयी चुप्पी : आखिर सच से डर क्यों? – इतनी बड़ी ‘कस्टोडियल डेथ’ और मानवाधिकारों के खुले उल्लंघन के बाद भी रायगढ़ जिला पुलिस और खरसिया थाना प्रभारी की चुप्पी संदिग्ध है।
- क्या पुलिस के पास इस ‘टॉर्चर’ का कोई जवाब है?
- क्या कानून की रक्षा करने वालों को किसी की जान लेने का हक मिल गया है?
- सिर में जमा खून का थक्का क्या पुलिस की लाठियों की गवाही नहीं दे रहा?
“मेरे भाई को अपराधी नहीं, लाश बना दिया गया। खरसिया पुलिस ने उसे इतना पीटा कि वह अपाहिज हो गया था। हमें इंसाफ चाहिए और उन पुलिसकर्मियों को जेल, जिन्होंने मेरे भाई की हत्या की है।” – पीड़ित परिजन
प्रशासन के लिए चुभते सवाल :
- खरसिया थाना क्षेत्र में हुई इस कस्टोडियल डेथ की न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) कब शुरू होगी?
- क्या दोषी पुलिसकर्मियों पर हत्या के तहत मामला दर्ज होगा?
- क्या रायगढ़ एसपी इस बर्बरता की नैतिक जिम्मेदारी लेंगे?
यह घटना केवल एक युवक की मौत नहीं, बल्कि लोकतंत्र और कानून के राज की हत्या है। अगर रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो आम आदमी न्याय के लिए कहाँ जाए?…




