विशेष रिपोर्ट: रायगढ़ में ‘होली’ का हुड़दंग बना ‘हैवानियत’, घर की दहलीज भी सुरक्षित नहीं; आरोपी बृजेश महंत सलाखों के पीछे…

रायगढ़ (छत्तीसगढ़)। त्योहारों का मतलब आपसी सौहार्द और खुशियां होता है, लेकिन रायगढ़ जिले के जूटमिल थाना क्षेत्र में एक युवक की ‘मर्यादाविहीन’ हरकत ने पूरे गांव को शर्मसार कर दिया है। होली की दोपहर जब लोग रंगों में सराबोर थे, तब 27 वर्षीय बृजेश महंत ने एक युवती की अस्मत और घर की निजता पर हमला बोला। यह घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि समाज की उस विकृत मानसिकता का आईना है जो त्योहार की आड़ में महिलाओं को अपना शिकार बनाती है।
घटना का सिलसिलेवार ब्योरा : निजता पर प्रहार – पीड़िता (21 वर्ष) अपने घर के भीतर, आंगन में बने नहाने के स्थान पर थी। उसे अंदाजा भी नहीं था कि होली के उल्लास के बीच कोई उसके घर की चारदीवारी फांदकर उसकी गरिमा को ठेस पहुँचाने की ताक में बैठा है।
- दोपहर 12:00 बजे : पीड़िता अपने घर के आंगन में नहा रही थी।
- अचानक हमला : आरोपी बृजेश महंत वहां घुस आया। उसने न केवल युवती के साथ अभद्र व्यवहार किया, बल्कि जबरन छेड़छाड़ और ‘गंदी हरकत’ पर उतारू हो गया।
- अदम्य साहस : पीड़िता ने घबराने के बजाय आरोपी का पुरजोर विरोध किया और शोर मचाया।
- हिंसक हुआ आरोपी : जब आरोपी अपनी मंशा में सफल नहीं हो पाया, तो उसने पीड़िता के साथ मारपीट शुरू कर दी।
मां की ममता और आरोपी की बर्बरता – बेटी की चीख सुनकर मां उसे बचाने दौड़ी। एक सामान्य अपराधी शायद पकड़े जाने के डर से भाग जाता, लेकिन बृजेश महंत ने अपना आपा खो दिया। उसने बीच-बचाव कर रही पीड़िता की मां के साथ भी बेरहमी से धक्का-मुक्की और मारपीट की। इस हमले में मां को भी चोटें आईं, जो आरोपी की हिंसक प्रवृत्ति को दर्शाता है। अंततः जब युवती के पिता मौके पर पहुंचे, तब कहीं जाकर आरोपी वहां से फरार हुआ।
कानूनी शिकंजा : BNS की कड़ी धाराओं में मामला दर्ज – रायगढ़ की महिला थाना पुलिस ने इस मामले में संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल FIR दर्ज की। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत जो धाराएं लगाई हैं, वे उसकी सजा को सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त हैं:
- धारा 74: महिला की गरिमा को भंग करने के इरादे से हमला।
- धारा 75(2): यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) का गंभीर श्रेणी का अपराध।
- धारा 77: महिला को निर्वस्त्र करने या उसकी लज्जा भंग करने के लिए विवश करना।
- धारा 115(2): जानबूझकर किसी को शारीरिक चोट पहुँचाना।
पुलिस का बयान : “आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और मामले में साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं ताकि कोर्ट में कड़ी सजा दिलाई जा सके।”
विश्लेषण : क्या सुरक्षित है घर का आंगन? – यह घटना कई सवाल खड़े करती है:
- क्या त्योहारों के नाम पर नशा और अनियंत्रित व्यवहार को छूट मिल गई है?
- जब एक युवती अपने ही घर के आंगन में सुरक्षित नहीं है, तो बाहरी सुरक्षा के दावे कितने खोखले हैं?
- आरोपी का साहस इतना कैसे बढ़ गया कि उसने बीच-बचाव करने वाली मां पर भी हमला किया?
रायगढ़ पुलिस की त्वरित कार्रवाई प्रशंसनीय है, लेकिन ऐसे मामलों में फास्ट-ट्रैक सुनवाई की आवश्यकता है ताकि समाज के ‘बृजेश महंतों’ को यह संदेश जाए कि किसी महिला की गरिमा से खिलवाड़ करने का अंजाम सिर्फ और सिर्फ जेल की कालकोठरी है।




