रायगढ़ पुलिस का ‘मिशन 2026’ : एसपी दिव्यांग पटेल ने तैयार किया अपराध नियंत्रण का ‘मास्टरप्लान’, थानेदारों को दो टूक- “सड़क पर दिखें, एसी कमरों में नहीं”…

● पूंजीपथरा-जूटमिल में बढ़ते हादसों पर एसपी नाराज, ट्रैफिक प्लान बदलने के निर्देश
● गुंडागर्दी और नशे के खिलाफ अलग-अलग नोडल अधिकारी नियुक्त, अब सीधी जवाबदेही तय
(रायगढ़ क्राइम रिपोर्टर) : वर्ष 2026 में रायगढ़ जिले की कानून व्यवस्था कैसी होगी, इसकी रूपरेखा तय हो गई है। जिले के कप्तान यानी पुलिस अधीक्षक श्री दिव्यांग पटेल ने रविवार को पुलिस कंट्रोल रूम में बुलाई गई मैराथन ‘अपराध समीक्षा बैठक’ में स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि यह साल अपराधियों के लिए ‘काल’ और आम जनता के लिए ‘राहत’ वाला होगा। एसपी ने अपनी नई कार्ययोजना प्रस्तुत करते हुए जिले के सभी राजपत्रित अधिकारियों और थाना प्रभारियों को “जीरो टॉलरेंस” और “विजुअल पुलिसिंग” का मंत्र दिया है।
अपराध समीक्षा : सुस्त पुलिसिंग अब बर्दाश्त नहीं – मीटिंग की शुरुआत ही पिछले साल के अपराधों के लेखा-जोखा से हुई। एसपी श्री पटेल ने शरीर संबंधी अपराध, चाकूबाजी, लूट और महिला संबंधी अपराधों के ग्राफ पर थाना-वार चर्चा की।
- मुखबिर तंत्र होगा पुनर्जीवित : एसपी ने माना कि संपत्ति संबंधी अपराधों (चोरी, नकबजनी) को रोकने के लिए पुराने और भरोसेमंद ‘मुखबिर तंत्र’ (Intelligence Network) को फिर से सक्रिय करना होगा।
- संदिग्धों की कुंडली खंगालेगी पुलिस : सख्त निर्देश दिए गए हैं कि थाना क्षेत्रों में बाहर से आकर बसे संदिग्ध व्यक्तियों और पुराने बदमाशों की नियमित चेकिंग की जाए। अगर कोई अपराधी बेल पर बाहर है और अपराध में संलिप्त पाया गया, तो उसकी बेल खारिज कराने की कार्यवाही हो।
रेड जोन अलर्ट : हादसों के ‘हॉटस्पॉट’ बने ये तीन इलाके – सड़क दुर्घटनाओं को लेकर एसपी का रुख बेहद संवेदनशील और कड़ा रहा। समीक्षा में डेटा सामने आया कि पूंजीपथरा, जूटमिल और खरसिया थाना क्षेत्रों में सड़क हादसों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है, जो चिंताजनक है। वहीं, पुसौर, भूपदेवपुर और छाल पुलिस ने बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन कर हादसों में कमी लाई है।
- iRAD डेटा बनेगा हथियार : एसपी ने जिला नोडल अधिकारी और डीएसपी ट्रैफिक को निर्देश दिया है कि वे पिछले 3 वर्षों के iRAD (Integrated Road Accident Database) का विश्लेषण करें। यह पता लगाया जाए कि हादसे क्यों हो रहे हैं—क्या सड़क खराब है, या अंधा मोड़ है?
- मानवीय दृष्टिकोण : उन्होंने स्पष्ट कहा, “सड़क हादसे महज आंकड़ा नहीं हैं, इसमें किसी की जान जाती है।” पुलिस को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए हर हाल में मृत्यु दर (Fatality Rate) कम करनी होगी।
स्पेशल टास्क : नशे और जुए पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की तैयारी – अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए एसपी ने जिम्मेदारियों का विकेंद्रीकरण (Decentralization) कर दिया है। अब हर बड़े अपराध के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी जिम्मेदार होगा:
- नोडल अधिकारी नियुक्त : आर्म्स एक्ट (हथियार), मादक पदार्थ (नशा), और जुआ-सट्टा जैसी सामाजिक बुराइयों को जड़ से खत्म करने के लिए एएसपी, सीएसपी और एसडीओपी स्तर के अधिकारियों को ‘नोडल ऑफिसर’ बनाया गया है। अब कार्यवाही की रिपोर्ट सीधे इन्हें देनी होगी।
- पेंडेंसी खत्म करें : लंबित मर्ग, पुराने चालान और गंभीर मामलों की केस डायरी की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को समय-सीमा (Deadline) के भीतर निराकरण के निर्देश दिए गए।
विजुअल पुलिसिंग : “जनता को अहसास हो कि पुलिस पास है” – श्री पटेल ने ‘विजुअल पुलिसिंग’ पर सबसे ज्यादा जोर दिया। उनका साफ कहना था कि पुलिसिंग केवल थाने के रजिस्टर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।
- सड़कों पर मौजूदगी : शहर के प्रमुख चौक-चौराहों, भीड़भाड़ वाले बाजारों और संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल की ‘विजिबिलिटी’ होनी चाहिए।
- पैदल गश्त (Foot Patrolling) : शाम के वक्त सायरन बजाती गाड़ियों के साथ-साथ पुलिसकर्मी पैदल गश्त करें, ताकि महिलाओं और व्यापारियों में सुरक्षा का भाव जगे और असामाजिक तत्वों में खौफ।
सामुदायिक पुलिसिंग : पुलिस और जनता के बीच सेतु – कड़े तेवरों के बीच एसपी ने पुलिस के मानवीय चेहरे को भी बनाए रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि ‘सामुदायिक पुलिसिंग’ के जरिए जनसंवाद, नशा मुक्ति अभियान और साइबर जागरूकता कार्यक्रम जारी रहेंगे। जब जनता पुलिस को अपना मित्र समझेगी, तभी अपराध की सूचना समय पर मिलेगी।
ये अधिकारी रहे ‘एक्शन मोड’ में : इस महत्वपूर्ण बैठक में एएसपी अनिल कुमार सोनी, सीएसपी मयंक मिश्रा, एसडीओपी खरसिया प्रभात पटेल, एसडीओपी धरमजयगढ़ सिद्धांत तिवारी, डीएसपी ट्रैफिक उत्तम प्रताप सिंह, डीएसपी हेडक्वार्टर सुशांतो बनर्जी सहित जिले के सभी थाना एवं चौकी प्रभारी और एसपी रीडर मौजूद रहे।




