ब्रेकिंग न्यूज़ : सुनील इस्पात, MSP और RS इस्पात पर प्रशासन का हंटर; मजदूरों की जान से खिलवाड़ पर दर्ज हुआ ‘क्रिमिनल केस’…

रायगढ़। जिले के औद्योगिक जगत में आज उस वक्त हड़कंप मच गया जब जिला प्रशासन ने मौत का जाल बिछाकर काम कराने वाले तीन बड़े कारखानों के खिलाफ सीधे श्रम न्यायालय में आपराधिक मुकदमा ठोक दिया। औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि फैक्ट्रियों के भीतर अब मजदूरों की ‘बलि’ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इन 3 कारखानों के मालिकों और प्रबंधकों पर गिरी बिजली :
- सुनील इस्पात एंड पावर (चिरईपानी) : सुरक्षा मानकों को ठेंगा दिखाने के आरोप में प्रबंधक प्रमोद कुमार तोला के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज।
- आर.एस. इस्पात (पूंजीपतरा) : ओ.पी. जिंदल पार्क स्थित इस कंपनी के प्रबंधक विवेक चंद्र उपाध्याय पर कानूनी शिकंजा, सुरक्षा की गंभीर अनदेखी पड़ी भारी।
- एमएसपी (MSP) स्टील एंड पावर (जामगांव) : कंपनी के अधिभोगी प्रदीप कुमार डे को बनाया गया आरोपी; नियमों की धज्जियां उड़ाने पर दर्ज हुई एफआईआर जैसी सख्त कार्रवाई।
खून से सने मुनाफे पर प्रशासन की चोट – निरीक्षण के दौरान इन कारखानों की जो तस्वीरें सामने आईं, वे भयावह थीं। मशीनों की घेराबंदी (Fencing) से लेकर श्रमिकों के स्वास्थ्य तक, हर मोर्चे पर लापरवाही मिली। उप संचालक राहुल पटेल ने कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि:
“ये कारखाने मुनाफे के लिए श्रमिकों की जान दांव पर लगा रहे थे। हमने इन्हें केवल नोटिस नहीं दिया, बल्कि सीधे कोर्ट के कटघरे में खड़ा कर दिया है। उल्लंघन जारी रहा तो ताले भी लटकेंगे।”
कार्रवाई से औद्योगिक गलियारे में दहशत – इस बड़ी कार्रवाई ने जिले के अन्य उद्योगपतियों की नींद उड़ा दी है। अब तक केवल कागजी कार्रवाई और मामूली जुर्माने से बचने वाले प्रबंधन के लिए यह ‘अलार्म बेल’ है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि कारखाना अधिनियम, 1948 की धाराएं अब सिर्फ किताबों में नहीं, बल्कि दोषियों को सजा दिलाने के लिए इस्तेमाल होंगी।




