रायगढ़: स्वास्थ्य सुविधाओं में नया मील का पत्थर, 100 बिस्तर अस्पताल में पहली बार सफल ‘वैजाइनल हिस्टेरेक्टॉमी’…

रायगढ़। जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत के कुशल मार्गदर्शन में, मातृ एवं शिशु 100 बिस्तर अस्पताल (MCH) रायगढ़ ने महिलाओं के जटिल उपचार में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। जिले में पहली बार ‘वैजाइनल हिस्टेरेक्टॉमी’ जैसी जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया है।
केस की संवेदनशीलता और चुनौती : जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र की रहने वाली एक 55 वर्षीय महिला बीते लंबे समय से गर्भाशय के बाहर आने (Uterine Prolapse) और असहनीय दर्द से जूझ रही थीं। आर्थिक तंगी और भौगोलिक बाधाओं के कारण वह निजी या बड़े शहरों के अस्पतालों में इलाज कराने में असमर्थ थीं। उनकी स्थिति दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही थी।
विशेषज्ञों की टीम ने किया सफल ऑपरेशन : सिविल सर्जन डॉ. दिनेश पटेल के नेतृत्व और डॉ. अभिषेक अग्रवाल के मार्गदर्शन में मरीज की जांच की गई। वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. दिशा ठाकुर क्षत्रिय एवं डॉ. उपमा पटेल ने मरीज की काउंसलिंग कर उसे ऑपरेशन के लिए तैयार किया।
ऑपरेशन की खासियत: वैजाइनल हिस्टेरेक्टॉमी में पेट पर कोई चीरा नहीं लगाया जाता। इस विधि से ऑपरेशन होने पर संक्रमण का खतरा कम रहता है, दर्द कम होता है और मरीज बहुत जल्दी स्वस्थ होकर घर लौट सकता है।
इनका रहा विशेष योगदान : इस ऐतिहासिक ऑपरेशन को सफल बनाने में विशेषज्ञों की पूरी टीम ने एकजुट होकर कार्य किया:
- सर्जरी: डॉ. दिशा ठाकुर क्षत्रिय एवं डॉ. उपमा पटेल
- एनेस्थीसिया: डॉ. पी.एल. पटेल
- सहयोग: सिस्टर इंचार्ज लता मेहर एवं जैसिंता सिस्टर
जिला स्तर पर उपलब्ध होंगी अब जटिल सुविधाएं : जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री रंजना पैकरा ने बताया कि अब रायगढ़ की महिलाओं को स्त्री रोग से जुड़ी गंभीर समस्याओं के लिए महानगरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। सरकारी अस्पतालों में मिल रही ये उच्च स्तरीय सुविधाएं जिले के लिए गर्व का विषय हैं।
चिकित्सकों की सलाह: डरें नहीं, समय पर कराएं इलाज : डॉक्टरों के अनुसार, मेनोपॉज के बाद अक्सर महिलाएं शर्म या डर के कारण गर्भाशय की समस्याओं को छुपाती हैं। यह ऑपरेशन इस बात का प्रमाण है कि बिना पेट चीरे भी सुरक्षित उपचार संभव है।




