रायगढ़

चक्रधर समारोह 2026 : पांचवीं शाम कथक, कुचिपुड़ी, सूफी तराने और माटी के गीतों से सजी; देर रात तक झूमे कला प्रेमी…

रायगढ़। 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह की पांचवीं सांस्कृतिक संध्या शास्त्रीय नृत्य, सूफी संगीत और लोकधुनों के बहुरंगी संगम की साक्षी बनी। महाराजा चक्रधर सिंह की पावन स्मृति में आयोजित इस समारोह में शास्त्रीय गरिमा, आध्यात्मिक सूफियाना रंग और छत्तीसगढ़ की माटी की खुशबू का ऐसा तालमेल देखने को मिला कि दर्शक देर रात तक सम्मोहित होकर प्रस्तुतियों का आनंद लेते रहे।

​कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ शासन के कृषि मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री श्री रामविचार नेताम शामिल हुए। उन्होंने भगवान श्री गणेश की विधिवत पूजा-अर्चना और महाराजा चक्रधर सिंह के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम को आगे बढ़ाया।

रायगढ़ घराने का वैभव : अंजिनी मिश्रा की कृष्ण वंदना से भव्य शुरुआत – संध्या का शुभारंभ बिलासपुर की कथक नृत्यांगना अंजिनी मिश्रा की प्रस्तुति से हुआ। उन्होंने मंच पर भावपूर्ण ‘कृष्ण वंदना’ से शुरुआत की। राजा चक्रधर सिंह की शास्त्रीय रचनाओं पर आधारित घाट, उपोड़धा, परण, पैरों की तिहाई, चालन, भाव और कवित्त के माध्यम से उन्होंने रायगढ़ घराने की अनूठी नृत्य शैली को मंच पर सजीव कर दिया। कार्यक्रम के अंत में प्रस्तुत ठुमरी ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

​अंजिनी के साथ तबले पर गुरु भूपेंद्र बरेठ और गायन पर गुरु साहिल ने संगत दी। मात्र 3 वर्ष की आयु से नृत्य साधना में लीन अंजिनी, पद्मश्री पंडित रामलाल बरेठ और गुरु भूपेंद्र बरेठ की शिष्या हैं तथा भारत सरकार की सी.सी.आर.टी. छात्रवृत्ति प्राप्त कलाकार हैं।

युवा प्रतिभाओं ने कथक से बांधा समां –

  • अनंता पांडेय : अंतरराष्ट्रीय नृत्य चैंपियनशिप (थाईलैंड) की स्वर्ण विजेता अनंता पांडेय ने भाव, लय और ताल के संतुलित समन्वय से कथक की शानदार प्रस्तुति दी। इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से संबद्ध अनंता वर्तमान में अपनी संस्था ‘भवप्रीता डांस एकेडमी’ के जरिए बच्चों को नृत्य का प्रशिक्षण भी दे रही हैं।
  • शार्वी सिंह परिहार : लखनऊ घराने की परंपरा को आगे बढ़ा रहीं शार्वी सिंह परिहार ने ‘कर्पूरगौरं करुणावतारं’ शिव वंदना से शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने ठाट, गदनिक, तोड़ा-टुकड़ा, परन, लड़ी और चक्रदार तोड़ों की प्रस्तुति से कथक की तकनीकी बारीकियों को खूबसूरती से उकेरा। वे गुरु तरुण कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में पिछले 12 वर्षों से कथक सीख रही हैं।
  • डॉ. खुशबू पांचाल : उज्जैन से पधारीं वरिष्ठ नृत्यांगना एवं ‘नृत्य साधना नृत्य मंदिर’ की निदेशिका डॉ. खुशबू पांचाल के घुंघरुओं की झंकार ने सभागार को गुंजायमान कर दिया। तीन दशकों की निरंतर साधना को दर्शाते हुए उन्होंने लयकारी और पदसंचालन का उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया।

‘शिवशक्ति समर्पण’ : कुचिपुड़ी और मणिपुरी नृत्य का अद्भुत संगम –

  • श्वेता नायक एवं समूह (कुचिपुड़ी) : बिलासपुर की श्वेता नायक और उनके दल ने ‘शिवशक्ति समर्पण’ की थीम पर भगवान शिव के तांडव और माता पार्वती के लास्य का सम्मोहक रूप प्रस्तुत किया। ‘मीनाक्षी पंचरत्नम्’ के बाद पारंपरिक ‘तरंगम’ में पीतल की थाली के किनारों पर संतुलित पदसंचालन ने दर्शकों को अचंभित कर दिया। समूह में डी. धारणी, श्री दिप्ता पॉल, चेतन्या साहू, मेघा सारथी सहित अन्य कलाकारों ने शिव के गंगाधर और आनंद नटराज स्वरूपों को जीवंत किया।
  • डॉ. मंजू ईलांग्बाम (मणिपुरी) : विश्व-भारती शांतिनिकेतन से डॉक्टरेट और संगीत नाटक अकादमी के उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से सम्मानित डॉ. मंजू ने मणिपुरी शास्त्रीय नृत्य की नफासत और कोमलता को मंच पर उतारा। तालवाद्य पर इरोम रॉबर्ट सिंह, गायन में मायोंगबाम प्रियानी देवी और सितार पर लाइमायुम नेल्सन शर्मा की जुगलबंदी ने समां बांध दिया।

कबीर वाणी, सूफी तराने और छत्तीसगढ़ी लोकगीतों की गूंज –

  • पद्मश्री डॉ. भारती बंधु : सूफी गायक डॉ. भारती बंधु ने मंच संभालते ही आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर दिया। गणेश वंदना, ‘बोलो राम राम’, ‘राधे-राधे’, ‘छाप तिलक सब छीनी’ और ‘कबीरा बिगड़ गयो राम दुहाई’ जैसे पदों से उन्होंने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। 57 वर्षों से संगीत साधना में रत भारती बंधु ने बताया कि उनके परिवार की पांच पीढ़ियां भक्ति संगीत की सेवा करती आ रही हैं।
  • अनुराग शर्मा : छत्तीसगढ़ी कला जगत के सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक व अभिनेता अनुराग शर्मा ने मंच पर आते ही लोकधुनों और माटी की महक से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। 500 से अधिक लाइव शो और 11 बार बेस्ट प्लेबैक सिंगर का अवार्ड जीत चुके अनुराग ने छत्तीसगढ़ी लोकगीतों के साथ लोकप्रिय हिंदी गीतों की भी सुरीली प्रस्तुति दी।

कला प्रेमियों की साधना ही समारोह की ताकत : प्रभारी मंत्री – समारोह को संबोधित करते हुए प्रभारी मंत्री श्री रामविचार नेताम ने कहा:

​”चक्रधर समारोह केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि पीढ़ियों को परंपरा और कला से जोड़ने वाला वैश्विक सेतु है। महाराजा चक्रधर सिंह ने रायगढ़ घराने को पूरी दुनिया में विशिष्ट पहचान दिलाई। पूरी रात जागकर प्रस्तुतियों का आनंद लेने वाले रायगढ़ के श्रोता ही इस आयोजन की असली आत्मा हैं।”

मंत्री श्री नेताम ने पांचवें दिन के सभी कलाकारों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर राज्यसभा सांसद श्री देवेंद्र प्रताप सिंह, श्री अरुणधर दीवान, श्री श्रीकांत सोमावार, श्री सुभाष पाण्डेय, कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और कला प्रेमी उपस्थित रहे।

Ambika Sao

सह-संपादक : छत्तीसगढ़

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