जशपुर में फाइलों में ‘पोषण’, धरातल पर ‘शोषण’ : दुलदुला के मयूरचुंडी आंगनबाड़ी में चल रहा हाजिरी का महाघोटाला, निजी भवन का किराया जेब में और नौनिहाल गायब!…

जशपुर। कुपोषण मुक्ति के सरकारी दावों की जमीनी हकीकत देखनी हो तो जनपद पंचायत दुलदुला के ग्राम पंचायत मयूरचुंडी चले आइए। यहाँ आंगनबाड़ी केंद्र के नाम पर सरकारी खजाने में खुलेआम सेंधमारी चल रही है। कागजों में बच्चों की लंबी-चौड़ी फौज खड़ी कर हर माह भारी-भरकम बजट ठिकाने लगाया जा रहा है, जबकि मौके पर आलम यह है कि केंद्र से नौनिहाल पूरी तरह नदारद हैं। जनता के टैक्स के पैसे से चलने वाली योजना अब महज कागजी आंकड़ों और फर्जी हाजिरी का चारागाह बनकर रह गई है।
शिशु मंदिर के नाम पर पर्दा डालने की हास्यास्पद कोशिश – मामले की पड़ताल में जब खाली पड़े केंद्र और गायब बच्चों को लेकर सवाल दागे गए, तो आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की ओर से जो दलील आई, उसने पूरे महकमे की कार्यप्रणाली को बेनकाब कर दिया। कार्यकर्ता का कहना है कि दर्ज बच्चों में से अधिकांश ‘शिशु मंदिर’ में पढ़ाई करने जाते हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है :
- जो बच्चे दिनभर निजी विद्यालय में बैठते हैं, उनके नाम पर आंगनबाड़ी में दैनिक हाजिरी कौन और किसके आदेश से भर रहा है?
- क्या उन बच्चों का पोषण आहार, रेडी-टू-ईट पैकेट और गर्म भोजन हवा में बंट रहा है या फिर मिलीभगत से खुले बाजार में खपाया जा रहा है?
- जब बच्चे केंद्र में पैर तक नहीं रखते, तो उनकी फर्जी उपस्थिति दिखाकर सरकारी पोर्टल पर झूठा डेटा क्यों फीड किया जा रहा है?
किराए का खेल: भवन मालिक मालामाल, योजना बेहाल – लापरवाही का यह गोरखधंधा यहीं नहीं थमता। केंद्र का संचालन एक निजी मकान में दिखाया गया है, जिसका किराया नियमित रूप से सरकारी मद से जारी हो रहा है। यानी भवन का किराया सरकार दे, कार्यकर्ता और सहायिका का मानदेय सरकार दे, पोषण आहार का आवंटन सरकार करे, लेकिन धरातल पर सेवा शून्य। ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि यह पूरा सेटअप सिर्फ और सिर्फ किराया वसूलने और राशन की बंदरबांट करने के लिए एक मुखौटे की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है।
सुपरवाइजर और परियोजना अधिकारी की रहस्यमयी चुप्पी – महिला एवं बाल विकास विभाग का मैदानी निगरानी तंत्र पूरी तरह सड़ चुका है। सेक्टर सुपरवाइजर से लेकर परियोजना अधिकारी तक, किसी ने भी मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन करने की जहमत नहीं उठाई। दफ्तरों के वातानुकूलित कमरों में बैठकर ‘सब चंगा सी’ की रिपोर्ट तैयार की जाती है। यदि नियमित मॉनिटरिंग होती, तो महीनों से चल रहा यह फर्जीवाड़ा पहले ही दिन पकड़ में आ जाता।
धरातल पर जांच हुई तो नपेंगे कई सफेदपोश – मयूरचुंडी के ग्रामीणों में इस खुली लूट को लेकर भारी आक्रोश पनप रहा है। स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और कलेक्टर से मांग की है कि तत्काल एक स्वतंत्र जांच दल गठित कर केंद्र का औचक निरीक्षण कराया जाए। दर्ज बच्चों के घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन हो, पिछले एक साल के स्टॉक रजिस्टर और वितरण पंजी की फॉरेंसिक जांच की जाए। अगर निष्पक्ष जांच हुई, तो केवल केंद्र कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि फाइलों पर आंख मूंदकर दस्तखत करने वाले आला अधिकारियों पर भी गाज गिरना तय है।




