41वें चक्रधर समारोह की दूसरी शाम : लोकधुनों और कथक की भाव-भंगिमाओं से सजी रायगढ़ की सांस्कृतिक धरा…

रायगढ़। कला, संगीत और संस्कृति की पावन नगरी रायगढ़ के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में आयोजित 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह की दूसरी संध्या शास्त्रीय लालित्य और पारंपरिक लोक विरासत के अद्भुत संगम की साक्षी बनी। ख्यातिलब्ध कलाकारों की सधी हुई प्रस्तुतियों ने कला रसिकों को देर रात तक मंत्रमुग्ध रखा।
लोक गायिका मेघा बोस ताम्रकार के स्वरों में घुली छत्तीसगढ़ की माटी की महक – रायपुर की सुप्रसिद्ध लोक गायिका मेघा बोस ताम्रकार ने अपनी सुमधुर आवाज से समारोह में छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति की जीवंत छटा बिखेर दी। गुरु चंदना सेन और कृष्ण कुमार पाटिल के सानिध्य में संगीत की साधना करने वाली मेघा ने पारंपरिक धुनों और विविध विधाओं के जरिए लोक संगीत के वास्तविक सौंदर्य को मंच पर साकार किया। मात्र 6 वर्ष की उम्र से सक्रिय और कथक विशारद मेघा की विशिष्ट गायन शैली पर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
गीतिका चक्रधर की भाव-भंगिमाओं और लयकारी ने बांधा समां – युवा कथक नृत्यांगना गीतिका चक्रधर ने शास्त्रीय नृत्य के सूक्ष्म सौंदर्य, लय और ताल के अनुपम समन्वय से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। डॉ. संगीता कापसे की शिष्या गीतिका ने ताल धमार में ‘शिव चतुरंग’ की सधी हुई प्रस्तुति देकर कार्यक्रम का आगाज़ किया। इसके उपरांत, ताल तीनताल में कृष्ण पर आधारित ठुमरी ‘छोड़ो-छोड़ो’ पर उनके सजीव भाव और नजाकत देखते ही बनी। राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय फलक पर अपनी पहचान बना चुकीं गीतिका की प्रस्तुति में कथक की गरिमा और अनुशासन स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ।
बाल नृत्यांगना अनुष्का सुल्तानिया की प्रतिभा ने जीता दिल )- समारोह के मंच पर रायपुर की नन्हीं कथक नृत्यांगना अनुष्का सुल्तानिया ने अपनी लयबद्ध पदचाप और सहज नृत्याभिव्यक्ति से सभी का ध्यान आकर्षित किया। ‘नाट्य नर्तक अवार्ड’ और ‘राधा रानी अवार्ड’ जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से अलंकृत बाल प्रतिभा अनुष्का ने कम उम्र में अपनी उत्कृष्ट तैयारी और परिपक्व प्रस्तुति से कला प्रेमियों को स्तब्ध कर दिया। उनकी प्रस्तुति के समापन पर दर्शकों ने खड़े होकर करतल ध्वनि से उनका उत्साहवर्धन किया।
शास्त्रीय नृत्य और लोक संगीत के इस सुंदर समागम ने चक्रधर समारोह की दूसरी शाम को अविस्मरणीय बना दिया।




