बलरामपुर पुलिस की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ : तस्करों पर एसपी का चाबुक, पर थानेदार की ‘स्क्रिप्ट’ ने खड़े किए संगीन सवाल…

बलरामपुर। रघुनाथनगर थाना क्षेत्र में बेखौफ फल-फूल रहे अवैध गोवंश व मवेशी तस्करी के सिंडिकेट पर पुलिस अधीक्षक वैभव वैंकर ने सीधी स्ट्राइक की है। स्थानीय थाने को भनक तक नहीं लगने दी गई और बसंतपुर थाना प्रभारी व वाड्रफनगर चौकी प्रभारी की सादे कपड़ों में बनी विशेष संयुक्त टीम ने जंगल में घेराबंदी कर 34 मवेशियों (कीमत ₹6.80 लाख) को तस्करों के चंगुल से छुड़ा लिया। कार्रवाई में एक आरोपी दीपक सोनवानी को रंगे हाथ दबोचा गया, जबकि 6 अन्य अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए।

परंतु इस बड़ी कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे के भीतर का जो सच सामने आया है, उसने पूरे तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
थानेदार की सरपरस्ती या सिस्टम से खुला खेल? – स्थानीय स्तर पर आरोप हैं कि रघुनाथनगर में नए थाना प्रभारी डाकेश्वर सिंह की तैनाती के बाद से पशु तस्करों के हौसले बुलंद थे। जंगल के रास्ते उत्तर प्रदेश के बूचड़खानों तक मवेशियों को हांक कर ले जाने का खेल खुलेआम चल रहा था।
एसपी को मिली पुख्ता खुफिया इनपुट के बाद स्थानीय थाने को पूरी तरह बाईपास कर बाहरी टीम भेजी गई। यह सीधा संकेत है कि एसपी को भी स्थानीय थाने की भूमिका पर भरोसा नहीं था। सवाल उठता है कि जिस थाने की नाक के नीचे संगठित सिंडिकेट चल रहा था, क्या उसके मुखिया पर गृह मंत्री विजय शर्मा के उस कड़े निर्देश का असर होगा, जिसमें तस्करी पाए जाने पर सीधे थाना प्रभारी पर निलंबन व विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी?
कागजों की बाजीगरी : रेड किसी और की, FIR में हीरो कोई और? – कार्रवाई के बाद जारी कागजी दावों ने पुलिसिंग की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं:
- जमीनी हकीकत : एसपी की स्पेशल टीम (बसंतपुर व वाड्रफनगर) ने सादे लिबास में दबिश देकर केसारी (बहेराखांड) के जंगल से मवेशी पकड़े।
- FIR और प्रेस नोट की कहानी : रघुनाथनगर थाने के एएसआई फिलिरियुस टोप्पो और उनकी टीम को गश्त के दौरान मुखबिर से सूचना मिलना दिखाकर पूरा श्रेय स्थानीय थाने की झोली में डाल दिया गया।
क्या पहली बार जिले की कमान संभाल रहे युवा एसपी की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश की जा रही है? क्या स्थानीय थाना प्रभारी अपनी नाकामी और कथित संलिप्तता को छिपाने के लिए झूठी कागजी पटकथा तैयार कर विभागीय वाहवाही लूटने के खेल में लगे हैं?
संगठित अपराध (BNS 111) के तहत मामला दर्ज – बरामद 34 मवेशियों की ई-साक्ष्य ऐप (e-Sakshya App) के जरिए डिजिटल वीडियोग्राफी कर जब्ती बनाई गई है। मुख्य आरोपी दीपक सोनवानी को रिमांड पर भेजा गया है, जबकि संजय सोनवानी, मानिकचंद, अशोक, जितेन्द्र जायसवाल, गोरखनाथ और देव कुमार सोनवानी की तलाश जारी है। मामले में पहली बार भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111(2) (संगठित अपराध), पशु क्रूरता निवारण अधिनियम और छत्तीसगढ़ कृषिक पशु परिरक्षण अधिनियम की गैर-जमानती धाराओं के तहत अपराध दर्ज हुआ है।
अब नजरें पुलिस अधीक्षक पर टिकी हैं कि क्या वे केवल तस्करों की गिरफ्तारी तक सीमित रहेंगे या अपनी ही नाक के नीचे फर्जीवाड़ा रचने और तस्करों को कथित संरक्षण देने वाले थानेदार पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई करेंगे।




