एक्सक्लूसिव रिपोर्ट : ‘सूर्या एग्रीसाइंसेज’ के दावों पर गहराया शक, एक्सपायर्ड लाइसेंस और फर्जीवाड़े के जाल में फंसा अन्नदाता?…

जशपुर। खेत में पसीना बहाकर सुनहरे कल का सपना देखने वाले किसानों के भरोसे पर क्या नकली दावों का खेल खेला जा रहा है? लखनऊ की कंपनी M/s Surya Agrisciences Pvt. Ltd. के बीज कारोबार को लेकर जो सनसनीखेज खुलासे सामने आए हैं, उसने कृषि महकमे से लेकर बाजार तक हड़कंप मचा दिया है। एक तरफ किसान की लहलहाने से पहले ही बर्बाद हो चुकी फसल के आंसू हैं, तो दूसरी तरफ फाइलों में दफ्न ऐसे सवाल, जिनका जवाब देने से सिस्टम कतरा रहा है।
बड़ा सवाल : क्या ‘एक्सपायर्ड’ लाइसेंस पर चल रहा था करोड़ों का बीज कारोबार?
दस्तावेजों के मुताबिक, कंपनी को जारी Seed Dealer Licence No. 195 की मियाद 31 अगस्त 2025 को ही खत्म हो चुकी है।
- क्या इस तारीख के बाद लाइसेंस का कानूनी नवीनीकरण (Renewal) हुआ?
- यदि नहीं, तो छत्तीसगढ़ की धरती पर इस कंपनी के बीज किस रसूख और किसकी शह पर बेचे जा रहे थे?
- बिना वैध कागजात के बाजार में बीज उतारना सीधे तौर पर किसानों के साथ धोखाधड़ी और ‘बीज नियंत्रण आदेश’ का खुला उल्लंघन है।
पतों की भूलभुलैया: लखनऊ से पत्थलगांव तक… असली ठिकाना कहां? – कंपनी के पैकेटों और कागजातों पर दर्ज पते किसी पहेली से कम नहीं हैं।
- इंदिरा नगर (लखनऊ), पुरानी बस्ती (पत्थलगांव, जशपुर) और अटारी (रायपुर) – आखिर कंपनी का मुख्य उत्पादन, स्टोरेज और पैकिंग सेंटर वैध रूप से कहां संचालित है?
- क्या इन सभी ठिकानों की कृषि विभाग द्वारा कभी भौतिक जांच (Physical Inspection) की गई?
- या फिर पतों के इस मकड़जाल का इस्तेमाल केवल कानूनी जवाबदेही से बचने के लिए किया जा रहा है?
किसान की चीख : “लागत भी डूबी, फसल भी गई!” – जशपुर के एक पीड़ित किसान की शिकायत ने इस पूरे रैकेट की कलई खोलकर रख दी है। किसान का आरोप है कि सूर्या एग्रीसाइंसेज का बीज बोने के बाद अंकुरण ही नहीं हुआ और पूरी मेहनत मिट्टी में मिल गई।
- क्या किसान को बेचे गए बीज के Lot Number का कोई सरकारी रिकॉर्ड मौजूद है?
- क्या बाजार में उतारने से पहले इसके Germination (अंकुरण) और Physical Purity की अनिवार्य जांच हुई थी?
- यदि लॉट फेल था, तो उसे बाजार में बिकने की हरी झंडी किसने दी?
RTI के घेरे में विभागीय अफसर, जल्द खुलेंगे राज – मामले की तह तक जाने के लिए सूचना का अधिकार (RTI) के तहत विभाग से आर-पार का हिसाब मांगा गया है। लाइसेंस की मौजूदा स्थिति, KVK/ICAR की कथित परीक्षण रिपोर्ट और सैंपलिंग के तमाम रिकॉर्ड तलब किए गए हैं। दाल में कुछ काला है या पूरी दाल ही काली, इसका सच अब फाइलों से बाहर आने वाला है।
RM24 की सीधी चेतावनी – बीज केवल एक उत्पाद नहीं, किसान की जिंदगी और आजीविका की रीढ़ है। घटिया बीज बेचकर किसानों की कमर तोड़ने वालों और आंख मूंदकर बैठे जिम्मेदार अफसरों की साठगांठ की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच होनी ही चाहिए।
इंतजार कीजिए भाग-2 का : लाइसेंस के पन्नों की पड़ताल, लैब टेस्टिंग का सच और विभागीय गठजोड़ का पूरा कच्चा-चिट्ठा… सिर्फ RM24 पर!




