खाद माफिया का फर्जी नैरेटिव ध्वस्त: ₹50,000 की लाइव डिजिटल रसीद और नए खुलासों से सामने आया पूरा सच, सीलबंदी से थर्राए व्यापारी पर कसता जा रहा कानूनी शिकंजा!…

जशपुर। कृषि विभाग की ताबड़तोड़ रेड में प्रतिष्ठान के सील होते ही प्रशासनिक कार्रवाई से ध्यान भटकाने के लिए रचा गया “अवैध वसूली” और “ब्लैकमेलिंग” का पूरा षड्यंत्र अब पूरी तरह बेनकाब हो चुका है। डिजिटल मीडिया संस्थान RM24 Multimedia Pvt. Ltd. के समर्थन में सामने आई ऑनलाइन बैंकिंग ट्रांजैक्शन की अकाट्य एवं सीधी रसीद ने अन्नपूर्णा खाद भंडार (पत्थलगांव) के संचालक राजेश अग्रवाल के झूठे दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।
प्रशासनिक सीलबंदी और ओवररेटिंग के काले कारोबार से मची खलबली – पूरे विवाद की मुख्य वजह पत्थलगांव स्थित अन्नपूर्णा खाद भंडार में किसानों से खाद के नाम पर की जा रही खुलेआम ओवररेटिंग और कालाबाजारी थी। स्थानीय किसानों की शिकायतों पर कृषि विभाग की टीम ने जब त्वरित कार्रवाई करते हुए दुकान को सील कर दिया, तो अपनी अनियमितताओं और संभावित कानूनी कार्रवाई से घबराकर व्यापारी ने मीडिया संस्थान पर दबाव बनाने का नीच पैंतरा अपनाया।
व्यापारी एवं उनके सहयोगियों ने अपनी कमियों और अवैध कृत्यों को छुपाने के लिए संस्थान और इसके संस्थापक व प्रबंध निदेशक ऋषिकेश मिश्रा के खिलाफ सोशल मीडिया एवं स्थानीय मंचों पर “अवैध उगाही” और “ब्लैकमेलिंग” का झूठा और भ्रामक प्रचार शुरू कर दिया।
डिजिटल रसीद से खुलासा : ‘श्रीजन अग्रवाल’ के नाम से खुली षड्यंत्रकारियों की पोल – व्यापारी राजेश अग्रवाल द्वारा फैलाए जा रहे भ्रामक नैरेटिव की हवा तब पूरी तरह निकल गई, जब संस्थान द्वारा 01 अगस्त 2026 की आधिकारिक बैंक रसीद और डिजिटल ट्रांजैक्शन विवरण सार्वजनिक किए गए।

खाते में प्राप्त यह ₹50,000/- की राशि किसी अन्य अज्ञात मित्र के उधारी/पर्सनल ट्रांजैक्शन से संबंधित है जो वर्तमान में क्षेत्र से बाहर है। कानूनी एवं व्यापारिक मामलों के जानकारों का स्पष्ट कहना है कि किसी भी प्रकार की अवैध वसूली (Extortion) कभी भी किसी पंजीकृत प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के आधिकारिक बैंक या UPI खाते में नहीं ली जाती।
विज्ञापन का पैसा अभी भी अप्राप्त, बकाया दबाने और मानहानि की घटिया चाल – संस्थान द्वारा किए गए सबसे बड़े खुलासे के अनुसार, व्यापारी राजेश अग्रवाल द्वारा अन्नपूर्णा खाद भंडार के आधिकारिक विज्ञापन, डिजिटल कवरेज और सेवा शुल्क का पैसा अभी तक जमा ही नहीं किया गया है! पूर्व की मीडिया सेवाओं का बकाया भुगतान लंबे समय से अटकाकर रखा गया है।
कृषि विभाग की सीलबंदी की कार्रवाई हुई, तो व्यापारी ने अपना बकाया चुकाने के बजाय उल्टे मीडिया की साख पर हमला करने की साजिश रच डाली। व्यावसायिक प्रतिबद्धताओं से भागने, उधारी न चुकाने और मीडिया संस्थान पर झूठे आरोप मढ़ने का यह कृत्य व्यापारी की दूषित मानसिकता और नैतिक पतन का सीधा प्रमाण है।
एसपी और जीएसटी कमिश्नर तक पहुंची आंच: गैर-जमानती FIR की मांग – व्यावसायिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने और झूठे साक्ष्य रचने की इस आपराधिक साजिश के खिलाफ ऋषिकेश मिश्रा ने मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने पुलिस अधीक्षक (SP) रायगढ़/जशपुर, संबंधित थाना प्रभारियों तथा GST कमिश्नर संभाग अंबिकापुर को औपचारिक कानूनी शिकायत सौंपकर त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
शिकायत में मुख्य मांगें:
- कठोर धाराओं में फिर : मानहानि (Section 356 BNS), झूठी शिकायत रचने और IT Act की धारा 66D के तहत आरोपी व्यापारी राजेश अग्रवाल व उनके सहयोगियों पर तत्काल मामला दर्ज हो।
- डिजिटल फॉरेंसिक जांच : बैंक खातों के डिजिटल ट्रांजैक्शन की फॉरेंसिक जांच कराकर यह आधिकारिक रूप से सिद्ध किया जाए कि व्यापारी द्वारा उगाही का नैरेटिव पूरी तरह फर्जी है।
- GST व टैक्स चोरी पर शिकंजा: जीएसटी कमिश्नर (अंबिकापुर) द्वारा अन्नपूर्णा खाद भंडार के समस्त व्यावसायिक खातों, बिलिंग पद्धतियों और टैक्स चोरी की उच्चस्तरीय विभागीय जांच कराई जाए।




