रायगढ़ में बाल संरक्षण की नई मिसाल: बालक को अपने ही समुदाय में मिला नया परिवार, दूसरा फोस्टर केयर प्लेसमेंट सफल…

- तकनीकी अड़चन के बीच बालक के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता; फॉर्म-32 के जरिए विधिक प्रक्रिया पूरी कर फोस्टर माता-पिता को सौंपी गई देखरेख की जिम्मेदारी।
रायगढ़। जिले में संकटग्रस्त और देखरेख के जरूरतमंद बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए एक और सकारात्मक पहल सामने आई है। जिला प्रशासन और बाल संरक्षण तंत्र की सक्रियता से रायगढ़ में दूसरा समुदाय-आधारित फोस्टर केयर (पोषण देखरेख) प्लेसमेंट सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इसके तहत चिन्हांकित बालक को एक संवेदनशील फोस्टर परिवार के सुपुर्द किया गया है। इस प्लेसमेंट की सबसे अहम कड़ी यह है कि बालक और फोस्टर परिवार दोनों एक ही सामाजिक परिवेश और समुदाय से ताल्लुक रखते हैं, जिससे बच्चे को किसी अजनबी माहौल के बजाय परिचित सांस्कृतिक व सामाजिक ताने-बाने में सहज पारिवारिक माहौल मिल सकेगा।
विधिक प्रक्रिया पूरी कर दी गई स्वीकृति- कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में जिले में संकटग्रस्त बच्चों के पुनर्वास और अधिकारों की सुरक्षा के लिए लगातार विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में बाल कल्याण समिति (CWC) और जिला बाल संरक्षण इकाई (DCPU) ने मामले में त्वरित संवेदनशीलता दिखाई।
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष गेवेश नायक सहित सदस्य रूपलाल चौहान, निवेदिता पटनायक, दिव्या पांडेय और मृदुला सिसौदिया ने प्रकरण की गहन समीक्षा की। बालक और पालक परिवार से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेजों के सत्यापन और वैधानिक प्रक्रियाओं की पूर्ति के बाद विधिवत पोषण देखरेख की अनुमति प्रदान की गई।
तकनीकी अड़चन पर भारी पड़ा बच्चे का सर्वोत्तम हित – जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा फोस्टर पालक का ऑनलाइन पंजीयन पहले ही पूरा कर लिया गया था, लेकिन तकनीकी कारणों से ऑनलाइन प्लेसमेंट आदेश जारी होने में देरी हो रही थी। बाल अधिकार नियमों के तहत बच्चे के सर्वोत्तम हित (Best Interest of the Child) को सर्वोपरि मानते हुए विभाग ने प्रक्रिया को लंबित रखने के बजाय ऑफलाइन फॉर्म-32 के माध्यम से विधिक औपचारिकताएं पूरी कीं और बालक को समय पर सुरक्षित हाथों में सौंपा।
प्रशासनिक टीम की रही सक्रिय भूमिका – यह पूरी पुनर्वास प्रक्रिया जिला कार्यक्रम अधिकारी अरुण कुमार पांडेय के दिशा-निर्देश तथा जिला बाल संरक्षण अधिकारी धीरेन्द्र शर्मा के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुई। इस संवेदनशील कार्य को धरातल पर उतारने में संरक्षण अधिकारी (गैर-संस्थागत) प्रकाश ठाकुर, कंप्यूटर ऑपरेटर खुशीराम साहू, आउटरीच वर्कर दूबीश्याम, सामाजिक कार्यकर्ता किरण मेहर, परामर्शदाता रामकुमारी पटेल एवं सीईएसी सविता साव की सक्रिय भूमिका रही।
समुदाय-आधारित फोस्टर केयर की यह सफलता साबित करती है कि यदि समाज और प्रशासन मिलकर कदम बढ़ाएं, तो बेसहारा या जरूरतमंद बच्चों को अनाथालयों या संस्थागत देखरेख के बजाय सीधे एक भरे-पूरे परिवार का स्नेह और सुरक्षा दी जा सकती है।




