13 महीने से चना और 7 महीने से शक्कर का ‘उपवास’: लोरो के गरीबों की सेहत सुधारने वाली ‘कमल स्व-सहायता समूह’ आखिरकार निलंबित!…

जशपुर।जिले के ग्राम पंचायत लोरो में गरीबों की सेहत और शक्कर से होने वाली डायबिटीज को लेकर ‘कमल स्व-सहायता समूह’ इतना चिंतित था कि उसने ग्रामीणों को लगातार 13 महीने तक चने के दर्शन नहीं होने दिए और 6-7 महीनों से शक्कर का स्वाद तक भूलने पर मजबूर कर दिया। लेकिन अफसोस! प्रशासन को यह “स्वास्थ्य सुधार अभियान” रास नहीं आया और अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बगीचा ने इस महान समाजसेवी संस्था की दुकान का लाइसेंस “आगामी जांच तक” निलंबित कर दिया है।

कागजों पर राशन, थाली में सन्नाटा! – कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी (रा०) बगीचा, जिला जशपुर द्वारा जारी आदेश (क्रमांक/846/रीडर/2026) के अनुसार, खाद्य निरीक्षक सन्ना द्वारा 11 जनवरी 2026 को लोरो स्थित शासकीय उचित मूल्य दुकान (आईडी 562003020) का आकस्मिक निरीक्षण किया गया था। जांच के दौरान ग्रामीणों और गवाहों ने जो खुलासा किया, उससे खुद खाद्य विभाग भी हैरान रह गया।
दुकान का संचालन करने वाली एजेंसी ‘कमल स्व-सहायता समूह लोरो’ ने:
- 13 महीने से हितग्राहियों को चने का वितरण नहीं किया।
- 6 से 7 महीने से शक्कर डकार गए या दबाकर बैठे रहे।
जब विभाग ने इस “परम कल्याणकारी” कार्य के लिए ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया, तो समूह के पास अपनी सफाई में देने के लिए कोई सबूत या संतोषजनक जवाब नहीं था। यानी साफ था—’माल भी साफ, और जवाब भी साफ!’
सरकारी कायदों की धज्जियां उड़ाने का ‘इनाम’ – समूह की इस ‘अद्भुत कार्यशैली’ को छत्तीसगढ़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली (नियंत्रण) आदेश 2016 की कंडिका 5(24), धारा 11 और आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 का स्पष्ट उल्लंघन माना गया है।
तमाम नियमों को ठेंगा दिखाने के बाद आखिरकार प्रशासन की नींद टूटी और धारा 16(1) में प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए:
- कमल स्व-सहायता समूह लोरो को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
- राशन वितरण का प्रभार और जिम्मेदारी ग्राम पंचायत लोरो को सौंप दी गई है, ताकि ग्रामीणों को अब कम से कम चना और शक्कर का मुंह देखना नसीब हो सके।
अब सवाल यह है… क्या 13 महीने तक गरीबों के हिस्से का चना और शक्कर हजम कर जाने वालों पर सिर्फ “निलंबन” ही काफी है, या उस राशन की भरपाई भी इस समूह की जेब से कराई जाएगी? फिलहाल लोरो के ग्रामीण राहत की सांस ले रहे हैं कि शायद अब राशन दुकान जाने पर खाली हाथ न लौटना पड़े!




