पत्थलगांव में किसानों से डाका! ‘भारत यूरिया’ पर ₹266 की जगह वसूले जा रहे ₹500, बिना बिल कैश का खेल…

- जय बालाजी खाद भंडार’ पर लगा कालाबाजारी, धोखाधड़ी और टैक्स चोरी का गंभीर आरोप…
जशपुर। खेती-किसानी के ऐन वक्त पर खाद की किल्लत का अनुचित फायदा उठाकर किसानों को लूटने का एक बड़ा मामला पत्थलगांव में सामने आया है। जशपुर रोड स्थित ‘जय बालाजी खाद भंडार’ (संचालक: धीरज अग्रवाल) पर सरकारी सब्सिडी वाले ‘भारत यूरिया’ को निर्धारित एमआरपी (MRP) से लगभग दो गुने दामों पर बेचने, पक्का बिल न देने और जबरन नकद (कैश) वसूली करने के गंभीर आरोप लगे हैं।

इस सिलसिले में प्रार्थी ने जनहित और कृषक हित में जिला कलेक्टर सह जिला दंडाधिकारी जशपुर, थाना प्रभारी पत्थलगांव तथा अनुविभागीय अधिकारी (कृषि) को लिखित आवेदन देकर प्रतिष्ठान के खिलाफ आपराधिक मामला (FIR) दर्ज करने की मांग की है।
क्या है पूरा मामला? – केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री भारतीय जन उर्वरक परियोजना (PMBJP) के तहत 45 किलोग्राम ‘भारत यूरिया’ की बोरी का शासकीय अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) ₹266.50 निर्धारित है।
शिकायत के अनुसार, ‘जय बालाजी खाद भंडार’ द्वारा सीजन के दौरान खाद का कृत्रिम अभाव दिखाकर किसानों से ₹450 से लेकर ₹500 प्रति बोरी तक वसूला जा रहा है। यानी किसानों से प्रति बोरी ₹183.50 से ₹233.50 तक की सीधी अवैध वसूली की जा रही है।
लूट का गणित (दर तुलना) :
- सरकारी निर्धारित दर (MRP): ₹266.50 प्रति बोरी (45 kg)
- दुकानदार द्वारा वसूली गई दर: ₹450.00 से ₹500.00 प्रति बोरी
- अवैध अतिरिक्त वसूली: ₹183.50 से ₹233.50 प्रति बोरी
- डी.ए.पी. (DAP): ₹1600.00 में बिना बिल/छूट के मनमाने दाम पर बिक्री
पीड़ित किसान ने खोली पोल: न बिल, न ऑनलाइन पेमेंट! -ग्राम पंगसूआ /कुमेकेला निवासी पीड़ित किसान लोहर साय नाग और अन्य कृषकों के साक्ष्यों के अनुसार:
- मनमानी मांग: यूरिया बोरी के लिए पहले ₹500 की मांग की गई, दबाव बनाने पर ₹450 नकद लिए गए।
- पक्का बिल देने से इनकार : जब किसान ने खरीदी की आधिकारिक रसीद या पक्का बिल मांगा, तो साफ मना कर दिया गया।
- टैक्स चोरी के लिए कैश पर जोर : सरकारी रिकॉर्ड और टैक्स से बचने के लिए PhonePe/UPI जैसे डिजिटल पेमेंट को खारिज कर जबरन नकद भुगतान कराया गया।
कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग – शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया कि अनावेदक का यह कृत्य उर्वरक नियंत्रण आदेश (Fertilizer Control Order 1985), आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act 1955) की धारा 3/7 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत धोखाधड़ी, गबन और कालाबाजारी की श्रेणी में आता है।
प्रशासन से की गई प्रमुख मांगें :
- भौतिक जांच: दुकान के बिक्री रजिस्टर, स्टॉक रजिस्टर, बिल बुक और POS मशीन की तत्काल जांच की जाए।
- FIR व लाइसेंस निरस्तीकरण : आवश्यक वस्तु अधिनियम व अन्य धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर खाद विक्रय लाइसेंस तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए।
- राशि की वापसी : पीड़ित किसानों से वसूली गई अतिरिक्त रकम वापस दिलाई जाए।
आवेदन पत्र के साथ पीड़ित किसान का बयान, दुकान परिसर में लेनदेन का वीडियो साक्ष्य तथा यूरिया बोरी की छायाप्रति (जिस पर MRP ₹266.50 दर्ज है) भी जांच हेतु प्रस्तुत की गई है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पर क्या सख्त कदम उठाता है।
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